आंटी की चूत में वीर्य का फव्वारा

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प्रेषक : राजेश …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राजेश है, में दिल्ली का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 20 साल है। में कामुकता डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ। यह मेरा इस साईट पर पहला सेक्स अनुभव है। अब में अपनी जबान में अपनी स्टोरी बताने जा रहा हूँ। मुझे आशा है कि आपको मेरी यह स्टोरी बहुत पसंद आएगी, ये मेरी पहली कहानी है। यह बात आज से 1 साल पहले की है। उस वक्त में कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुका था। में 5 फुट 9 इंच का तंदरुस्त जवान हूँ, मेरा लंड 7 इंच लम्बा और बहुत मोटा है। मेरे सामने वाले घर में एक खूबसूरत आंटी रहती थी, वो 32 साल की थी, 5 फुट 4 इंच लंबी और थोड़ी मोटी थी। उसके बूब्स बहुत ही मस्त थे, उसकी साईज करीब 34 जितनी थी, उसका फिगर साईज 34-30-36 था, वो बहुत ही सेक्सी दिखती थी, उसका नाम रेखा था। उसका घरवाला 40 साल का था, उनके दो बच्चे भी थे। में ज़्यादातर बाहर गाँव पढ़ाई करता था, इसकी वजह से मेरी उनसे ज़्यादा मुलाकात नहीं हो पाई थी, लेकिन अब मेरी पढ़ाई खत्म हो चुकी थी इसलिए में अपने घर पर रहने आया था।

फिर जब सुबह में नहाने के बाद में अपने रूम में आया और कपड़े बदलने लगा और फिर मैंने अपना तोलिया निकाल दिया और चड्डी पहनने लगा था। तो तब एकदम से मैंने मेरी खिड़की में से देखा तो सामने वाली आंटी अपने बरामदे में खड़ी थी और झाड़ू लगा रही थी। फिर उसकी और मेरी नजर एक हुई। फिर उसने मुझे अंडरवेयर पहनते हुए देखा तो में एकदम शर्मा गया और वहाँ से दूर हो गया। फिर मैंने फटाफट से अपने कपड़े पहने और बाहर चला गया। फिर जब में घर वापस आया तो वो आंटी मेरे घर में मम्मी के पास बैठी थी। फिर उसने मुझसे पूछा कि राजू तू कब आया? अब तो तू बहुत बड़ा हो गया है और ऐसा कहकर वो हंसने लगी। में फिर से शर्मा गया और कुछ नहीं बोला।

फिर दूसरे दिन में सुबह में नाहकर निकला और अपने रूम में कपड़े पहनने गया। आज मैंने पहले खिड़की में से देखा तो आंटी नजर नहीं आई इसलिए में आराम से तोलिया निकालकर आराम से अपने कपड़े बदलते रहा। तभी अचानक से सामने वाली खिड़की में से आवाज आई तो मेरी नजर उस खिड़की पर पड़ी। तब मैंने देखा कि वो आंटी वहाँ खड़ी-खड़ी मुझे कपड़े बदलते देख रही थी। अब की बार में नहीं शरमाया, लेकिन मुझे भी मज़ा आया था। फिर दूसरे दिन जब मे नाहकर बाहर निकला तो मैंने जानबूझकर खिड़की खुली कर दी और सामने देखा तो वो आंटी बरामदे में नीचे झुककर झाड़ू लगा रही थी। तो मुझे उसके बूब्स की दरार बहुत साफ दिख रही थी। फिर उसने ऊपर देखा तो हमारी नजर एक हुई तो वो मेरे सामने हंस पड़ी। तो मेरी भी हिम्मत खुल गई और मैंने भी स्माइल दिया। फिर वो वहाँ खड़ी-खड़ी झाड़ू लगाती रही और मुझे देखती रही।

फिर मैंने भी हिम्मत करके मेरा तोलिया निकाल दिया और मेरा लंड उसके सामने बता दिया। वो ये देखकर एकदम घबरा गई और अंदर भाग गई, तो में मन ही मन बहुत खुश हुआ। अब मुझे भी यह सब करना अच्छा लगने लगा था। फिर में अपने मकान की छत पर गया और वहाँ बैठकर अपनी किताब पढ़ने लगा। तब एकदम से मेरी नजर सामने वाले मकान के कमपाउंड में पड़ी तो मैंने देखा तो वो आंटी चौक में बैठकर कपड़े धो रही थी। अब उन्होंने अपने साड़ी को घुटने तक ऊपर चढ़ा रखी थी, उसके पैर बहुत ही सुंदर और सेक्सी दिख रहे थे। अब में पढ़ाई छोड़कर उसको देखने लगा था। अब वो आंटी कपड़े धोते-धोते पूरी भीग गई थी और उसका हाथ जब ऊँचा नीचा होता था तो उसके बूब्स मोहक अदा में हिल रहे थे, जिसे देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था और धीरे-धीरे पूरा 8 इंच लम्बा हो गया था। फिर आंटी कपड़े धोने के बाद वहाँ चौक में ही नहाने लगी और फिर बाद में उसने अपनी साड़ी निकाल दी और पेटीकोट और ब्लाउज पहनकर नहाने लगी।

अब नहाते-नहाते उसने अपना पेटीकोट अपनी जाँघ तक ऊपर कर दिया था। अब मेरी तो आँख फटी की फटी रह गई थी। में ज़िंदगी में पहली बार ये जलवा देख रहा था। अब मेरा लंड मेरे काबू में नहीं रहा था। अब में पूरी तरह से आंटी को नंगा देखना चाहता था और ये आशा भी मेरी जल्दी ही पूरी होने वाली थी। फिर आंटी ने धीरे से अपना ब्लाउज भी निकाल दिया और उसे भी धोने लगी। तब मैंने उसके बड़े-बड़े बूब्स देखे तो मेरी आँखे बड़ी हो गई और मेरे मुँह में से पानी टपकने लगा था। आंटी बहुत ही सेक्सी दिख रही थी। फिर उसने अपने शरीर पर साबुन लगाना शुरू किया, लेकिन ब्रा की वजह से वो आराम से अपने शरीर को रगड़ नहीं पाती थी इसलिए उसने अब अपनी ब्रा को भी अपने शरीर पर से उतार फेंका था। अब मर जाने वाली बारी मेरी थी, उसके बूब्स देखकर मेरा तो जी मेरे गले में अटक गया था, वाह क्या नज़ारा था? मैंने आज तक मेरी ज़िंदगी में इससे अच्छा नज़ारा कभी नहीं देखा था।

अब मेरा लंड मेरे काबू में नहीं था। अब वो मेरी पेंट की चैन तोड़कर बाहर आने के लिए उछल रहा था। फिर मैंने भी जल्दी ही मेरे लंड की इच्छा पूरी की और मेरे लंड को मेरी पेंट की चैन खोलकर बाहर खुली हवा में छोड़ दिया और आंटी को देखकर मुठ मारना चालू कर दिया। अब आंटी नहा चुकी थी। फिर वो खड़ी हो गई और अपना शरीर टावल से पोंछने लगी। फिर अंत में उसने अपना पेटीकोट भी उतार दिया और तुरंत टावल लपेट दिया, लेकिन उसके बीच में आंटी की चूत की एक झलक पा चुका था और मेरी मुठ मारने की स्पीड डबल हो गई थी और फिर अंत में मैंने अपना पूरा माल बाहर निकाल दिया। अब मेरे दिमाग में आंटी को चोदने के ही विचार आने लगे थे। अब में कोई भी तरीके से आंटी को चोदने की तैयारी करने लगा था। फिर दूसरे ही दिन मैंने अपनी पूरी खिड़की खोल दी और आंटी को बरामदे में आने की राह देखने लगा था। फिर जब आंटी बरामदे में झाड़ू लगाने के लिए आई, तो तब मैंने उसे स्माइल दिया और धीरे से मेरा तोलिया निकाल दिया और मेरे लंड को हवा में खुला छोड़ दिया था।

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अब मेरे 8 इंच लंबे और मोटे लंड को हवा में लहराता देखकर आंटी के तो होश ही उड़ गये थे। अब वो मेरे लंड को देखती ही रह गई थी। फिर मैंने आंटी के सामने अपने लंड को पकड़कर मुठ मारने का स्टाइल मारने लगा था। तब आंटी शर्मा गई और झट से अपने रूम में चली गई और खिड़की में से मेरा नज़ारा देखने लगी थी। फिर मैंने मेरी दोनों गोलियों को पीछे खींचकर लंड की पूरी लंबाई आंटी को बताई तो वो बिना पलक झपकाए मेरे लंबे और तगड़े लंड को आराम से देख रही थी। फिर मैंने आंटी को हवा में किस किया, तो तब वो कुछ नहीं बोली। फिर मैंने आंटी को अपने बूब्स दिखाने के लिए कहा। अब वो मना कर रही थी, लेकिन मैंने बार-बार उसे इशारा किया। आख़िर में उसने अपने ब्लाउज के बटन खोलकर अपने बड़े-बड़े बूब्स बाहर निकाले और मेरे सामने दिखाने लगी थी। अब मेरा तो खून बहुत तेज़ी से दौड़ने लगा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने उसे अपना पेटीकोट उठाने के लिए कहा तो पहले तो वो ना-ना कर रही थी, लेकिन आख़िरकार मेरी ज़िद के सामने उसने हार मान ली और अपना पेटीकोट ऊपर उठा लिया। वाह अब मेरे तो भाग्य ही खुल गये थे। अब मेरे सामने करीब 12 मीटर की दूरी पर एक मदमस्त चूत मेरे लंड का इंतजार कर रही थी। उस वक्त मेरे घर में कोई नहीं था, सिर्फ़ में अकेला ही था। तब मैंने आंटी को अपने घर में आने के लिए इशारा किया तो आंटी ने मना कर दिया। फिर मैंने बताया कि मेरे घर में मेरे सिवाए और कोई नहीं है। तब वो बोली कि में थोड़ी देर में आती हूँ। अब मेरा लंड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था और बैठे भी क्यों? अब तो उसे चोदने के लिए मदमस्त चूत मिलने वाली थी। फिर थोड़ी देर के बाद में डोरबेल बजी तो मैंने तुरंत दरवाजा खोला, तो सामने वाली आंटी खड़ी थी। अब वो बड़ी ही मादक स्माइल कर रही थी और बड़ी सेक्सी अदा में खड़ी थी, वो सुंदर नीले रंग की साड़ी पहनकर आई थी और हल्का सा मेकअप भी किया हुआ था।

फिर मैंने तुरंत उसे अंदर बुला लिया और दरवाजा बंद कर दिया। फिर वो बोली कि राजू क्या काम है? मुझे यहाँ क्यों बुलाया है? अब वो जानबूझकर भोली बन रही थी। फिर मैंने भी उसे इसी अदा में जवाब दिया कि आंटी तेरे आम का रस चूसने का बहुत मन हो रहा था, इसलिए तुझे यहाँ बुलाया है। फिर यह सुनकर वो मुझे मारने के लिए मेरे पीछे पड़ी और में अंदर बेडरूम की तरफ भाग गया। तो वो मेरे पीछे आ गई और मुझे पीछे से पकड़ लिया और बोली कि क्या बोला मेरे आम के रस चूसना है? तो चल जल्दी फटाफट चूसना शुरू कर। फिर यह सुनकर मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके रसीले होंठो को चूसना शुरू कर दिया। अब वो भी पीछे हटने वाली नहीं थी। अब वो भी मेरे होंठो को जोर से चूसने लगी थी और मेरे मुँह के अंदर अपनी जीभ फैरने लगी थी। अब इससे मेरे अंदर सेक्स का लवरस बहने लगा था। अब मैंने भी उसे कसकर पकड़ लिया था और उसके मदमस्त बूब्स को सहलाने लगा था। फिर मैंने आंटी को धीरे से बेड पर लेटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया।

फिर में उसके होंठो को चूसता रहा और ज़ोर-ज़ोर से उसके बूब्स को दबाने भी लगा था। अब वो भी जबरदस्त मूड में आ गई थी और मेरा पूरा सहयोग देने लगी थी। फिर मैंने धीरे से उसकी साड़ी भी निकाल दी और फिर उसका ब्लाउज भी उतार दिया। उसने लाल कलर की ब्रा पहनी थी और उसमें से उनके गोरे-गोरे बूब्स उछल-उछलकर बाहर आने के लिए मचल रहे थे। फिर मैंने भी अपनी शर्ट और पेंट उतार फेंकी। अब उन्होंने अपना पेटीकोट खुद ही निकाल दिया था और मुझे अपने ऊपर खींच लिया था। अब में पागलों की तरह उसे चूमने लगा था। अब वो भी मुझसे एकदम ही चिपक गई थी। फिर में उसके होंठो को छोड़कर धीरे से उसके कंधे पर से उसकी पीठ पर किस करने लगा और पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। उसकी ब्रा झट से उछलकर निकल गई और अब उसके मदमस्त बूब्स हवा में लहराने लगे थे। फिर में एक भी पल गंवाये बिना तुरंत अपने मुँह में उसके बूब्स को लेकर आम की तरह चूसने लगा। अब वो अपने मुँह से बुरी तरह सिसकारियाँ भर रही थी। अब वो बहुत ही गर्म थी। अब में बारी-बारी उसके दोनों बूब्स को लगातार चूसने लगा था।

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अब वो भी राजा ज़ोर-ज़ोर से चूसो, ये आम तुम्हारे लिए ही है, इन आम को आज तक किसी ने भी तुम्हारी तरह नहीं चूसा है, मुझे आज जन्नत का सुख मिल रहा है और ज़ोर-ज़ोर से चूसो जैसे बोले जा रही थी। तब मैंने भी कहा कि अरे मेरी प्यारी आंटी अभी जन्नत का सुख तो बाकी है, ये तो सिर्फ़ शुरुआत है अभी देखती जाओं आगे-आगे होता है क्या? और फिर मैंने ज़ोर से उसकी पेंटी को फाड़कर निकाल दिया और उसकी चूत को अच्छी तरह से सहलाने लगा था। अब तो वो और ज़ोर से मचल पड़ी थी, आह क्या मज़ा आ रहा है? अरे राजा और जन्नत का सुख दो, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और ये बोलते-बोलते उसने मेरा लंड बाहर निकाल दिया और अपने हाथ में मसलने लगी थी। फिर वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। तब मुझे भी बड़ा मज़ा आने लगा और फिर में बोला कि आह मादरचोद, आंटी तू बहुत मज़ा दे रही है, अब तो में हमेशा तुझे चोदूंगा और मज़ा करूँगा।

फिर मैंने भी उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। अब तो वो मदहोश होती जा रही थी और फिर वो बोली कि अरे राजा जल्दी अपना लंड मेरी चूत में डालो, अब तो रहा नहीं जाता, मेरी चूत का हाल बुरा होता जा रहा है। अब में भी पूरे जोश में आ गया था। फिर मैंने अपना 8 इंच लम्बा और तगड़ा लंड आंटी की चूत पर रखकर पूरे जोश से एक धक्का मारा। तो आंटी दर्द के मारे चिल्ला उठी, अरे मेरे नन्हे शेर जरा धीरे से चोदो, ये चूत तुम्हारे लंड जितनी बड़ी नहीं है। फिर मैंने भी धीरे से अपना सुपाड़ा उसकी चूत पर रगड़ा और फिर धीरे-धीरे अपना लंड आंटी की चूत में डालने लगा। फिर धीरे से मेरा पूरा लंड आंटी की चूत में डालने के बाद मैंने कहा कि आंटी कैसा लग रहा है? तो तब वो बोली कि यार बड़ा मज़ा आ रहा है, आज के बाद जब भी मौका मिलेगा तो हम जरूर ये खेल खेलेंगे, अब ज़ोर-ज़ोर से तेरी आंटी की चूत की तड़प मिटा दे। अब में भी जोश में आ गया था और दनादन धक्के मारने लगा था। अब आंटी भी चिल्ला रही थी, आह इतना मज़ा ज़िंदगी में पहली बार आ रहा है, जल्दी-जल्दी मेरे राजा चोदो, मेरी प्यासी चूत की प्यास बुझा दो, मेरी चूत की चटनी बना दो, बहुत ही आनंद मिल रहा है। अब मुझे भी स्वर्ग का सुख मिल रहा था। अब में भी फटाफट मेरे लंड को आंटी की चूत में अंदर बाहर कर रहा था। अब वो भी मुझसे एकदम चिपक गई थी। फिर मैंने मेरा पूरा ज़ोर लगाकर उसकी चूत में अपने वीर्य का फव्वारा छोड़ दिया। अब वो भी मेरे साथ झड़ गई थी और फिर उसने भी अपना पानी छोड़ दिया। फिर हम दोनों बिस्तर पर हाँफते हुए पड़े रहे और फिर ये चोदने का सिलसिला हमेशा के लिए चालू हो गया। फिर हम दोनों को जब कभी भी कोई मौका मिला, तो हमने उस मौके का भरपूर फायदा उठाया और खूब इन्जॉय किया ।।

धन्यवाद …

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