बरसात की रात में घमासान चुदाई

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प्रेषक : मनीष …

हैल्लो दोस्तों, मेरा मन अपनी माँ और चाची की चूत मार-मारकर अब भर चुका था और में गाँव वाली बुआ की भी चूत का भोसड़ा बना चुका था। हाँ लेकिन उनकी दोनों लड़कियों की प्यास अभी अधूरी ही थी, में चाहता तो बड़े आराम से उन्हें चोद सकता था बल्कि बुआ खुद ही मेरा लंड पकड़कर अपनी दोनों बेटियों की चूत में घुसेड़ती। लेकिन मेरा उनकी बेटियों में कोई इंटरेस्ट नहीं था, लेकिन अब कोई और चूत भी मेरी नजर में नहीं थी और मेरा लंड था की उतावला हो रहा था, अब उसे तो चूत चाहिए ही चाहिए थी।

खैर उस दिन तो मैंने अपनी मम्मी को ही चोदा, लेकिन फिर दूसरे दिन में बिना इरादे के ही सड़क पर टहल रहा था कि अचानक से कोई मुझसे टकराया। तो मैंने नजर उठाकर देखा, तो वो करीब 45-46 साल की लेडी रही होगी, लेकिन वो मैंनटेन बहुत थी। अब में भी ख्यालों में था और वो पता नहीं कैसे मुझसे टकरा गयी? तो मुझे अचानक से होश आया, तो तब मैंने हड़बड़ा कर उनसे सॉरी बोला। अब उनके हैंड बैग में से कुछ सामान नीचे गिर गया था और वो बैठकर अपना सामान उठा रही थी। उनका ब्लाउज काफ़ी टाईट था, जिसके अंदर उनकी बड़ी-बड़ी चूचीयाँ बाहर निकालने को बेताब थी, हालांकि उन्होंने पल्लू डाल रखा था, लेकिन पिंक कलर की पारदर्शी सी साड़ी से सब साफ-साफ नजर आ रहा था। अब में खड़े-खड़े उनके बूब्स का नज़ारा देख रहा था तो तब ही जैसे ही में नींद से जगा और में भी उनका सामान उठाने में मदद करने लगा।

तो तभी मैंने कहा कि सॉरी आंटी मेरी वजह से आपका सामान बिखर गया। तो वो बोली कि कोई बात नहीं बेटा इट्स ओके और फिर सारा सामान रखने के बाद वो मुझसे बोली कि बेटा तुम नयी पीढ़ी की यही एक प्रोब्लम है हर कोई कहीं ना कहीं खोया रहता है। तो में शर्मिंदा होते हुए बोला कि नहीं आंटी ऐसी बात नहीं है, आप गलत सोच रही है। फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि बेटा क्या तुम कॉफी पीना पसंद करोगे? तो मैंने तुरंत ही हाँ में जवाब दिया और फिर हम लोग वही पास के कॉफी शॉप पर बैठ गये, वहाँ ज़्यादातर लड़के और लड़कियाँ ही थे, वो उन सबको देख रही थी। फिर उन्होंने अचानक से मेरी तरफ देखकर पूछा कि बेटा आप क्या करते हो? तो मैंने कहा कि आंटी में लॉ कर रहा हूँ। तो वो बोली कि बहुत खूब, लेकिन तुम्हारा ध्यान किधर था? क्या तुम भी इन सब फालतू लड़को की तरह नयी तितलियों को देख रहे थे?

अब उन्होने जिस अंदाज़ में ये बात कही मुझे अज़ीब सा लगा तो मैंने हड़बड़ाते हुए कहा कि नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं है, खैर आप बताए आप कहाँ से आ रही थी? तो तब वो हँसते हुए बोली कि क्या बेवकूफी भरा सवाल किया है? अरे भाई मार्केटिंग करके आ ही रही थी कि तुमने धक्का मार दिया, अच्छा ये बताओं घर में और कौन-कौन है आपके बेटा? तो मैंने कहा कि मम्मी-पापा और एक छोटी बहन है और आंटी आपके घर में? तो उनका छोटा सा जवाब मिला में और मेरी बेटी। तो मैंने पूछा कि और अंकल? तो वो बोली कि बेटा वो एयरफोर्स में है और मेरा बेटा भी वही ट्रेनिंग कर रहा है। अब उनकी बातों में बहुत उदासी भरी थी, तो तब ही अचानक से मौसम खराब हो गया और बारिश होने लगी। फिर हम लोग बहुत देर तक इधर उधर की बातें करते रहे। फिर करीब 2 घंटे के बाद भी पानी नहीं रुका, तो आंटी कुछ परेशान हो गयी। तो मैंने पूछा कि क्या बात है आंटी? आप कुछ परेशान सी है।

तो तब उन्होंने घड़ी में देखते हुए कहा कि बेटा 8 बज रहे है और पानी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा और अब तो कोई टेक्सी भी नहीं मिलेगी। तो तब मैंने कहा कि आंटी मेरा घर पास में ही है, आप चाहे तो चल सकती है। तो तब वो बोली कि बेटा असल में घर पर नेहा अकेली होगी और आजकल का माहौल तो तुम जानते ही हो, जवान लड़की को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। तो तब मैंने कहा कि आंटी आप यही रुके में अभी कार लेकर आता हूँ। तो तब वो बोली कि बेटा तुम भीग जाओगे। तो तब मैंने कहा कि आंटी जवान लोगों पर बारिश का असर नहीं होता है और में भागकर घर गया और मम्मी को बताया कि एक दोस्त के घर जा रहा हूँ कोई ज़रूरी काम है। तो मम्मी मुझे रोकती ही रह गयी की बेटा बारिश हो रही है कल चले जाना, लेकिन में नहीं रुका और कार लेकर कॉफी शॉप पहुँच गया, पानी अभी भी बहुत तेज़ था।

फिर वो जैसे ही शॉप से बाहर मेरी गाड़ी तक आई, तो वो काफ़ी हद तक भीग चुकी थी और में तो पहले ही भीग गया था क्योंकि घर तक जाने में काफ़ी भीग चुका था। खैर फिर थोड़ी ही देर के बाद में एक बड़ी सी कोठी के सामने रुका, तो में कोठी देखकर हैरान रह गया। तो तब ही वो कार से उतरते हुए बोली कि बेटा कार पार्किंग में पार्क करके घर में चले आओ, तुम बहुत भीगे हो चेंज कर लो नहीं तो सर्दी लग जाएंगी। तो मैंने कहा कि नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं है बस आपको घर तक छोड़ दिया अब मेरा काम ख़त्म अब में चलता हूँ, इजाज़त दीजिए। तो तब आंटी ने थोड़ा डांटकर कहा कि जितना कह रही हूँ उतना करो, आख़िर में तुम्हारी माँ की तरह हूँ, जाओ गाड़ी पार्क करके आओ। तो इतनी देर की बहस में आंटी बिल्कुल भीग चुकी थी। फिर जब में गाड़ी पार्क करने के बाद वापस आया, तो आंटी वही पर खड़ी थी। अब उनकी साड़ी बिल्कुल भीगकर उनके शरीर से चिपक चुकी थी, अब पिंक साड़ी के नीचे उनकी ब्लेक डिज़ाइनर ब्रा साफ नजर आ रही थी। हालांकि मेरे मन में अभी तक उनके लिए कोई गलत विचार नहीं थे, लेकिन आख़िर कब तक मेरे अंदर का शैतान सोया रहता।

अब उनको इस पोजिशन में देखकर मेरे औज़ार में सनसनी होने लगी थी। फिर में कुछ देर तक उनको निहारता रहा। तो तब ही वो मेरी आँखों के आगे चुटकी बजाते हुए बोली कि कहाँ खो गये बेटे? तुम किसी डॉक्टर को दिखाओ, तुम्हारे अंदर कोई बीमारी है और मेरा हाथ पकड़कर अंदर ले जाने लगी। तो अंदर दाखिल होते ही मुझे एक बहुत ही खूबसुरत लड़की नजर आई, जिसकी उम्र करीब 18-19 साल की रही होगी, वो स्कर्ट टॉप पहने हुई थी और सूरत से बहुत परेशान नजर आ रही थी। फिर आंटी को देखते ही वो उनसे लिपट गयी और बोली कि मम्मी आप कहाँ चली गयी थी? में घबरा रही थी। तो आंटी ने उसको अलग करते हुए कहा कि मेरी रानी बेटी बाहर पानी बरसने लगा था इसलिए देर हो गयी और में फोन लगा रही थी तो लग नहीं रहा था, खैर कोई बात नहीं अब तो में आ गयी हूँ मेरी बहादुर बच्ची, तुमने खाना खाया?

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फिर उसने कहा कि जी मम्मी अभी थोड़ी ही देर पहले रामू काका खाना देकर अपने घर चले गये है, अब मुझे भी बहुत नींद आ रही है में भी सोने जा रही हूँ। तो अचानक से मुझे देखकर वो थोड़ी संभलते हुए बोली कि मम्मी ये साहब कौन है? तो मम्मी ने कहा कि बेटा आज में कार नहीं ले गयी थी और आज ही पानी को बरसना था, तो इसने ही मुझे लिफ्ट दी है, इनका नाम राजेश है और तब वो मुझे नमस्ते करके अपने रूम में सोने चली गयी और अब रूम में में और आंटी ही रह गये थे। तो तब ही आंटी ने मुझे एक लुंगी देते हुए कहा कि लो ये पहन लो। तो मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और लुंगी बांध ली, मैंने अपनी बनियान और अंडरवेयर नहीं उतारी थी। तो तब आंटी बोली कि बेटा सारे कपड़े उतार दो अभी थोड़ी ही देर में सूख जाएँगे, तो तब पहन लेना और बनियान भी उतारकर निचोड़ लो बहुत भीगी है। तो तब मैंने झिझकते हुए अपनी बनियान उतारकर निचोड़कर खूंटी पर टाँक दी और वही वॉशरूम में जाकर अपनी अंडरवेयर भी उतार कर सूखने को डाल दी।

अब में सिर्फ़ लुंगी में था और अभी तक आंटी ने अपनी साड़ी नहीं उतारी थी। फिर जब में रूम में आया तो तब मैंने देखा कि वो अपनी साड़ी का पल्लू निचोड़ रही थी और आँचल हटा होने की वजह से उनके पिंक ब्लाउज के अंदर ब्लेक डिज़ाइनर ब्रा साफ नजर आ रही थी, जिसे में बिना पलक झपकाए निहार रहा था। अब मुझे एकटक इस तरह देखते हुए आंटी ने कहा कि क्या देख रहे हो बेटा? तुमने अपने तो कपड़े उतार लिए, अब में भी चेंज कर लूँ। अब मेरा मन तो आंटी को चोदने के बारे में सोचने लगा था, लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो पा रही थी। तो तब ही थोड़ी देर के बाद आंटी एक बहुत ही पतली और पारदर्शी सी नाइटी पहनकर आई और वही सोफे पर बैठ गयी और कॉफी बनाने लगी। अब वो कॉफी बना रही थी और में अपनी ललचाई नजरों से उनकी उभरी हुई चूची को देख रहा था और दिल ही दिल में सोच रहा था कि काश ये आंटी मुझसे चुदवा ले तो कितना मज़ा आएगा?

अब यही सब सोच-सोचकर मेरा लंड अपनी औकात में आ चुका था और मुझे इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि कब मेरी लुंगी के बीच से उसकी टोपी बाहर झाँक रही थी? और आंटी अपनी चोर नजरों से उधर ही देख रही थी। अब मेरा पूरा ध्यान आंटी की चूचीयों की तरफ ही था और आंटी का ध्यान मेरे औज़ार की तरफ था। तो तब ही मैंने आंटी की नजरों की तरफ देखा, तो उनकी नजरे अपने औज़ार पर टिकी देखकर अंदर ही अंदर खुश हो गया और धीरे से अपनी टांगे और खोल दी, ताकि आंटी और अच्छी तरह से मेरे लंड का दीदार कर सके। फिर उसके बाद हम दोनों ने कॉफी पी और उसके बाद में अपने कपड़े पहनने लगा और दिल ही दिल में सोच रहा था कि साली अगर आज रोककर चुदवा ले तो क्या हो जाएंगा? तड़प तो इसकी भी चूत रही है, लेकिन हाय रे इंडियन नारी लाज़ की मारी लंड खाएंगी मजे ले- लेकर, लेकिन चुदवाने से पहले शरमाएंगी इतना की पूछो ही मत।

फिर जब आंटी ने मुझे कपड़े पहनते हुए देखा, तो तब वो मेरे करीब आई और बोली कि बेटा अभी कपड़े पूरी तरह से सूखे नहीं है, तुम ऐसा करो कि आज यही रुक जाओं और अपने घर पर मम्मी को कॉल कर दो। तो तब मैंने नाटक करते हुए कहा कि नहीं आंटी मुझे जाना है। तो तब वो मेरे हाथ से कपड़े लेकर बोली कि बेटा में तेरी माँ जैसी हूँ जैसा कह रही हूँ वैसा करो, कही बीमार पड़ गये तो तेरी मम्मी को कौन जवाब देगा? फिर मैंने अपने घर पर कॉल कर दी कि आज पानी बहुत बरस रहा है में आज यही मेरे दोस्त के घर रुक जाऊँगा। फिर थोड़ा बहुत खाना खाने के बाद आंटी ने मुझसे कहा कि बेटा तुम यहाँ बेड पर सो जाना, में सोफे पर लेट जाऊंगी वरना अगर तुम चाहो तो गेस्ट रूम में भी सो सकते हो। तो तब मैंने कहा कि आंटी में वहाँ अकेला बोर हो जाऊंगा, आप ऐसा कीजिए आप बेड पर सो जाइए में सोफे पर सो जाता हूँ और ये कहकर में वहीं सोफे पर लेट गया और आंटी बेड पर लेट गयी।

अब मेरे अरमान धीरे-धीरे ठंडे हो रहे थे और में आंटी की उभरी हुई चूची और फूले हुए चूतड़ अपनी आखों में बसाए कब नींद की गोद में चला गया? मुझे पता ही नहीं चला। फिर रात को अचानक से मुझे अपनी जाँघ पर कुछ सरकता हुआ महसूस हुआ तो मेरी नींद खुल गयी। फिर मुझे महसूस हुआ की ये किसी का हाथ है और घर में 2 ही लोग थे आंटी या फिर उसकी लड़की। तो थोड़ी देर तक तो में उसी पोजिशन में लेटा रहा, तो तब तक वो हाथ सरकता हुआ मेरी लुंगी को सरकाता हुआ ऊपर मेरी जांघों की जड़ तक पहुँच चुका था। अब में भी उस हाथ के सहलाने का आनंद लेना चाहता था, चाहे कोई भी हो भले ही उस वक़्त उसकी लड़की भी होती तो तब भी मैंने तय कर लिया था की उसकी कुँवारी चूत को चोद ही डालूँगा। लेकिन अब तक में जान गया था की ये हाथ आंटी का है और अब में पूरी तरह से उसके सहलाने का मज़ा लेना चाहता था। फिर में सोफे पर सीधा होकर लेट गया और वो मुझे करवट लेते हुए देखकर कुछ हडबड़ा गयी, लेकिन फिर नॉर्मल हो गयी।

फिर आंटी ने मुझे नींद में देखकर मेरी लुंगी के अंदर अपना हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ लिया, जो अभी तक शांत अवस्था में था और उसे प्यार से सहलाने लगी। अब मेरे लंड में धीरे-धीरे तनाव आने लगा था और में भी उत्तेजित होने लगा था। अब मेरा मन कर रहा था की अभी साली को बाहों में भरकर इतनी ज़ोर से दबाऊं की इसकी हड्डी तक पीस जाए, लेकिन में ऐसा कर नहीं सकता था तो में बस चुपचाप पड़ा रहा और आंटी की कारवाही देखता रहा। अब आंटी का हाथ थोड़ा खड़ा हो गया था, अब वो मुझे सोया हुआ जानकर पूरी तरह से निश्चित हो गयी थी। अब मेरे लंड को ज़ोर-ज़ोर से सहलाने के बाद जब मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया। तो तब आंटी अपने होंठो से मेरी जांघों को चूमने लगी। अब मेरे मुँह से सिसकीयाँ निकलने ही वाली थी, लेकिन मैंने अपने दांत भींचकर सिसकी नहीं निकलने दी।

अब मुझसे बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल हो रहा था तो तभी मैंने अपने लंड पर कुछ चिपचिपा सा महसूस किया, क्योंकि रूम में नाईट बल्ब जल रहा था तो मुझे कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था और में अपनी आँख भी बंद किए था। लेकिन मुझे इतना तो अंदाज़ा हो ही गया था की ये साली इसकी जीभ होगी, जो मेरे लंड पर फैर रही है और अपनी जीभ फैरते-फैरते उसने गप्प से मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया। अब तो में बर्दाश्त ही नहीं कर पाया था और झटके के साथ उठकर बैठ गया और बोला कि कौन है यहाँ पर? तो तभी आंटी ने मेरे मुँह पर हाथ रखा और धीरे से बोली कि बेटा में हूँ और उन्होने झट से रूम की लाईट जला दी। तो में देखकर हैरान रह गया कि वो पूरी तरह से नंगी थी। तो मैंने उनको नंगा देखकर चौकने का ड्रामा करते हुए कहा कि हाय आंटी आप तो नंगी है। तो तब उन्होंने मेरा लंड पकड़ते हुए कहा कि बेटा तुम भी तो नंगे हो।

तो मैंने अपने दोनों हाथ झट से अपने लंड पर रख लिए और छुपाने का नाटक करने लगा, लेकिन में जानता था की अब ये साली चुदवाएंगी तो ज़रूर। लेकिन फिर भी मैंने अपना नाटक चालू रखा और बोला कि आंटी आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था, ये गंदी बात है। तो तभी आंटी मेरे लंड को मसलते हुए बोली और तुम जो शाम से मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरी चूचीयाँ निहार रहे थे और इस तरह देख रहे थे की बस खा ही जाओंगे, वो अच्छी बात थी और जब में कॉफी बना रही थी, तो तब तुम्हारी नजरे कहाँ थी? मुझे पता है मुझे चोदना सीखा रहे हो, तुम बेटा अभी कल के बच्चे हो, में तुम्हारे जैसे ना जाने कितनो को अपनी चूत में समा कर बाहर कर चुकी हूँ। अब उसकी ये सब बात सुनकर तो मुझे बहुत ही जोश चढ़ गया था। अब उसने यक़ीनन मुझे भड़काने के लिए ही ऐसी भाषा का प्रयोग किया था, लेकिन मुझे तो शुरू से ही चोदने में गाली गलौज पसंद थी और आंटी इतनी सभ्य नजर आ रही थी की उनके मुँह से इस तरह की बात सुनना मेरे लिए एक नया अनुभव था और फिर उसके बाद हम लोगों की घमासान चुदाई हुई ।।

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धन्यवाद …

 

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