भाभी की मचलती चूत का भोसड़ा बनाया

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प्रेषक : रोहित …

हैल्लो दोस्तों, दोस्तों मेरा नाम रोहित है, मेरी उम 24 साल है और में गुजरात के अहमदाबाद के नज़दीक एक गाँव का रहने वाला हूँ। दोस्तों में एक छोटी सी दुकान चलाकर अपने परिवार की मदद करता हूँ और मेरी एक बुआजी है वो भावनगर में रहती है और उसी के पास में मेरे पापा के दूर की बहन का बेटा मतलब कि मेरे दूर के भाई और उनकी पत्नी, उनके दो बच्चे भी रहते है। दोस्तों मेरी वो भाभी बहुत ही हॉट सेक्सी पतली दुबली है। उनकी पतली कमर और 36 इंच के वो बड़े आकार के एकदम गोरे गोलमटोल बूब्स सुंदर चेहरा और उन्होंने अपने पूरे शरीर को इतना सम्भालकर रखने की वजह से मेरी भाभी को देखकर नहीं लगता था कि यह दो बच्चो की माँ भी हो सकती है। दोस्तों मेरी उस भाभी को देखकर अच्छे अच्छो के लंड अपना पानी छोड़ दे वो दिखने में कुछ ऐसी लगती है, लेकिन वो अपने पति से कुछ ज्यादा ही वफ़ादार थी और अब नहीं है।

दोस्तों वो किसी को घास नहीं डालती थी और मैंने उनको पहली बार मेरी बुआ जी की लड़की की शादी में जब देखा में उनको ठीक से पहचाना नहीं था, लेकिन मुझे वो उसी दिन बहुत पसंद आ गई थी और में लगातार हर बार घूर घूरकर देखने लगा था। मेरी नजर उनके ऊपर से हटने को बिल्कुल तैयार ही नहीं थी। फिर मैंने अपनी बुआ से पूछा कि बुआ जी यह औरत कौन है, मैंने पहले कभी इनको देखा नहीं क्या यह आपके रिश्ते में है? फिर उसी समय मेरी बुआ ने हंसते हुए कहा कि अरे तुम क्या इसको नहीं पहचानते, यह रिश्ते में तुम्हारी भाभी लगती है। फिर मेरी बुआ ने उनसे मुझे मिलवाकर मेरा परिचय भी करवाया और उसी समय मेरी भाभी ने मुझसे कहा कि में तुम्हारी भाभी होने के साथ साथ तुम्हारे चाचा के बेटे की रिश्ते में साली भी लगती हूँ और उस समय मैंने उसको अपने बहुत पास से अच्छी तरह से देख लिया था। दोस्तों ज्यादा पास से देखने उनकी रसीली आवाज को सुन लेने के बाद मेरा मन उसको अब अपनी बाहों में भरकर चूम लेने के लिए मचलने लगा था, लेकिन में ऐसा नहीं कर सका था। अब में किसी ना किसी बहाने से उनसे नज़दीक ही रहने लगा था, लेकिन वो थी कि में जितना उनके पास जाता वो उतना ही मुझसे दूर चली जाती और वो किसी से ज़्यादा बात भी नहीं करती थी।

फिर इतने में शादी का सभी काम खत्म हो जाने के बाद में दूसरे दिन वापस अपने घर आ गया और अब मुझे उनकी याद बहुत सताने लगी थी, लेकिन में कुछ भी नहीं कर सका में उसके सपनों में खोकर एकदम पागल दीवाना हो चुका था। फिर एक दिन मैंने कसम खाकर निर्णय लिया कि अगर मैंने उसको एक बार मेरे नीचे नंगा लेटाकर उसको चोद नहीं देता, में तब तक चैन से नहीं बैठ सकता और उसी दिन से में अपने मन में विचार बनाकर बैठ गया। फिर एक दिन मेरे चाचा के बेटे की शादी तय हुई और वहीं पर वो भाभी भी आई हुई थी, लेकिन मुझे पहले से बिल्कुल भी पता नहीं था कि वो भी वहां पर है। फिर शादी में पहुंच जाने के आधे एक घंटे के बाद मेरी नजर ऐसे ही उन पर पड़ गई और में उनको देखकर बहुत खुश हो गया, लेकिन अब भी भाभी ने मुझे नहीं देखा था। अब मैंने तुरंत ही सही मौका देखकर उसके पीछे जाकर अपने दोनों हाथों को उसकी दोनों आँखों पर रख दिया और फिर मैंने उसको अपनी तरफ पीछे की तरफ खींच लिया जिसकी वजह से वो मुझसे एकदम सट गई थी और अब मेरा लंड उसके पीछे कूल्हों में दबने लगा था, जिसकी चुभन से ही उसको शायद अंदाजा हो चुका था कि मेरे लंड में बड़ा दम है क्योंकि उसके कातिल जिस्म को देखकर मेरे लंड ने अपना आकार पहले से थोड़ा बड़ा कर लिया था।

फिर उसने मेरा विरोध करते हुए झट से मेरे दोनों हाथों को अपने चेहरे से हटाकर वो मुझसे दूर हो गई और उसने पलटकर मेरी तरफ देखकर वो भी अब हंसने लगी और वो कहने लगी कि मुझे इस तरह से पहली बार किसी ने हाथ लगाया है, वैसे तो में अच्छी तरह समझ चुकी थी कि आप कोई जान पहचान के ही हो सकते हो, लेकिन में अपने मजबूत हाथों का स्पर्श करके बिल्कुल भी नहीं पहचानी कि यह आप है और वो यह बात खत्म करके मेरी तरफ देखकर बड़ी सेक्सी स्माइल देने लगी थी। दोस्तों अब में बहुत अच्छी तरह से समझ चुका था कि यह एक बार हंसी तो जरुर मेरे जाल में फंसी और यह विचार लिए में मन ही मन बहुत खुश हो रहा था। अब वो मुझसे मेरे हालचाल पूछकर जाकर अपने काम में लग गई और कुछ देर खाना खाने के बाद आगे का कार्यक्रम शुरू हुआ और रात को गरबे के समय मैंने उनके साथ बहुत बार मजाक किया और बहुत बार मैंने उनको किसी भी बहाने से छुआ भी था। दोस्तों शायद अब मेरी उस छेड़ छाड़ में उसको भी मज़ा आ रहा था इसलिए वो मुझसे कुछ भी नहीं कह रही थी और वो मेरे अलावा किसी और के साथ बात भी नहीं कर रही थी। अब वो मेरे साथ बहुत खुश बड़ी अच्छी तरह से खुलकर हंसी मजाक भी करने लगी थी और फिर उसी दिन सही मौका देखकर मैंने उसके फोन नंबर ले लिए और उसको अपना भी नंबर मैंने दे दिया और अब उसको मैंने फोन करने का वादा भी किया।

फिर शादी खत्म होते ही सभी लोग अपने अपने घर चले गये और मेरी वो भाभी भी अपने घर चली गई, तीन दिन के बाद मेरे पास अपनी उसी भाभी का एक मिस कॉल आया और रात के करीब 12 बजे मैंने फोन किया। अब मुझे अपनी उसी सेक्सी भाभी की मधुर आवाज़ से वो बोली हैल्लो और फिर उसी दिन से हमारे बीच बातों का यह सिलसिला लगातार शुरू हो गया। अब हर रोज उनका पति रात को अपने काम पर जाते ही वो मुझे फोन कर देती और उसके बाद हम दोनों दो तीन घंटे तक लगातार बातें करने लगे थे। अब हमारे बीच सब कुछ ऐसी वैसे भी बातें होने लगी थी। वो मुझसे खुलकर बातें, अपने मन के विचार, सभी तरह की परेशानियों को कहने लगी थी जिसकी वजह से हमारे बीच की दूरियां बिल्कुल खत्म हो गई। फिर एक दिन पहले आगे होकर उसी ने मुझसे कहा कि में तुमसे प्यार करने लगी हूँ और तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो। दोस्तों में उसके मुहं से वो सब सुनकर खुश हो गया और मैंने भी उसको कहा कि हाँ में भी तुम्हे मन ही मन बहुत समय से चाहने लगा हूँ।

फिर एक दिन में अपनी बुआ के घर जाने का बहाना बनाकर चला गया और उसने मुझे अपने घर पर चाय पीने के लिए बुलाया और मेरी बुआ को कुछ काम था इसलिए वो मेरे साथ नहीं आई और इसलिए में अकेला ही उनके साथ चला गया और जाते ही उसने तुरंत ही दरवाजा अंदर से बंद करके मुझे अपनी बाहों में भर लिया और वो मुझे चूमने प्यार करने लगी, वो जोश में आकर पागलों की तरह मेरे होंठो को भी चाटने चूसने लगी थी। अब में भी उसके साथ वो सब करके गरम हो चुका था और मेरी बाहों में लिपटी होने की वजह से उसके वो दोनों बूब्स मेरी छाती से दबकर कपड़ो से बाहर आकर मुझे अपनी तरफ ललचाने लगे थे। अब मैंने भी उसको और भी ज़ोर से भींच लिया। यह सब हमारे बीच बस पांच मिनट चला होगा कि तभी किसी के आने की आहट से हम एक दूसरे से अलग होकर शांत हो गये। फिर वो मेरे लिए चाय बनाने चली गई और में उसके हाथ की बनी चाय को पीकर उसकी और चाय की तारीफ करके वहां से बाहर चला आया। दोस्तों में अपनी बुआ के घर दो दिन तक रुका, लेकिन में उनके साथ चूमने कपड़ो के ऊपर से कभी एक दो बार बूब्स को दबाने के अलावा और कुछ भी नहीं कर सका, क्योंकि हम दोनों को ऐसा कोई भी मौका नहीं मिला जिसका फायदा उठाकर हम चुदाई का वो खेल खेलकर मज़े लेते।

फिर में तीसरे दिन वापस अपने घर चला आया और अब हमारे बीच दोबारा कॉल शुरू हो गये, हमारे बीच अब जब भी उनको समय मिलता फोन पर बातें करने का कार्यक्रम शुरू हो चुका था। फिर करीब एक महीने के बाद उसको भावनगर से कहीं बाहर अपने किसी काम की वजह से जाना हुआ और उसने मुझे यह बात बताकर मुझसे कहा कि अगर तुम भी मेरे साथ आओगे तो मुझे अच्छा लगेगा हो सकता है हमारा काम भी बन जाए। अब मैंने उससे कहा कि मुझे दिन नहीं पूरी एक रात चाहिए और इस बार में अपने उस काम को जरुर पूरा करूंगा मुझे कोई भी रुकावट नहीं चाहिए। अब वो बोली हाँ ठीक है में अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगी, क्योंकि यह आग जो तुमने उस दिन लगाई थी उसको बुझाने की अब उतनी ही जल्दी मुझे भी है, में हमारे उस मिलन के लिए बहुत तड़प रही हूँ। अब हमारे बीच वो कार्यक्रम तय हुआ और उस शाम को करीब पांच बजे हम दोनों उसकी बताई हुई जगह पर मिल गये, एक दूसरे को देखकर हम बड़े खुश हुए गले लगे और हम एक होटल में हमारे लिए एक रूम बुक करवाकर अपना सामान रखकर बाहर कहीं घूमने निकल गये।

फिर हम दोनों ने बाहर ही खाना भी खाया और हम दोनों करीब रात के दस बजे उसी होटल के अपने कमरे में पहुंचे, अंदर जाकर मैंने तुरंत ही दरवाजे को अंदर से बंद कर दिया और अब में उसको किस करने लगा था, हमारे बीच यह सब करीब दस मिनट तक चला। फिर उसके बाद वो नहाने चली गई और कुछ मिनट के बाद वो मेक्सी पहनकर बाथरूम से बाहर आ गई वो वाह क्या मस्त माल लग रही थी वो उस बड़े आकार के गले वाली मेक्सी में बहुत ही सुंदर नजर आ रही थी जैसे वो अभी तक कुंवारी हो ऐसी नजर आ रही थी। फिर उसके नहाने के बाद में भी तुरंत नहाने चला गया और में अब सिर्फ़ एक पेंट पहनकर ही बाहर आ गया। अब वो मेरी चौड़ी गोरी छाती को देखकर बिल्कुल दंग रह गई और तुरंत सोफे से खड़ी होकर मेरे पास आकर वो मुझसे चिपक गई, मुझे बहुत मज़ा आया। दोस्तों आज मेरी वो कसम जरुर पूरी होने वाली थी और अब हम दोनों एक दूसरे को बाहों में भरकर चूमने प्यार करने लगे थे और उसके साथ चूमते हुए ही मैंने उसकी मेक्सी को वहीं पर उतार दिया और अब वो पूरी नंगी होकर मुझसे शरमाने लगी थी। फिर उसने भी मेरी पेंट को उतार दिया, जिसकी वजह से में भी अब उसके सामने पूरा नंगा हो गया और वो मुझसे दोबारा चिपक गई।

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अब मैंने उसको अपनी गोद में उठाया और बेड पर ले गया और मैंने उसको कहा कि रानी तूने मुझे बहुत तरसाया है आज में तुझे बिना चुदाई करे नहीं छोडूंगा। फिर उसी समय मुस्कुराते हुए वो मुझसे कहने लगी कि छूटने का मन मेरा भी नहीं है, आज में भी तुम्हारे साथ वो मज़े मस्ती करना चाहती हूँ आज मुझे तुम खुश कर दो। अब मैंने उसकी बातों से खुश होते हुए उसके बाल को खुला कर दिया जिसकी वजह से उनकी सुंदरता और भी ज्यादा बढ़ गई, मैंने उसको गाल पर चूमा उसके बाद में उसके गुलाबी रसभरे होंठो को चूसने लगा और फिर अपने दोनों हाथों से में उसके 36 इंच के बूब्स को दबाने मसलने लगा था, जिसकी वजह से वो गरम होकर मस्त होने लगी थी। फिर मैंने उसके कान के नीचे भी धीरे से चाटा और वो आअहह ऊफ्फ्फ्फ़ कर गई, कहने लगी कि आप तो बड़े ही सेक्सी है। दोस्तों वो मेरी इस हरकत से और भी ज्यादा मस्त हो गई, में अपनी दो उंगली के बीच अब उसके बूब्स के बीच निप्पल को दबाकर ऊपर उठाने लगा। अब वो आआहह ऊह्ह्ह्ह करने लगी और वो मुझसे कहने लगी कि आज तक इतना मज़ा मुझे पहले कभी नहीं आया और इतना कहकर उसने मेरा आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड तुंरत अपने नरम मुलायम हाथों में पकड़ लिया और वो खुश होकर बोली वाह यह कितना मस्त है। अब मैंने उसको पूछा क्यों क्या तेरे पति का ऐसा नहीं है?

तभी वो बोल पड़ी है, लेकिन उनका इतना कड़क नहीं होता है और ना ही उसकी लम्बाई इतनी है। अब मैंने बारी बारी से उसके दोनों बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसना शुरू किया और मज़े मस्ती की वजह से वो पागल हो रही थी। दोस्तों मैंने कुछ देर में उसके बूब्स का सारा रस पी लिया और अब बूब्स का पीछा छोड़कर मैंने नीचे उसकी नाभि में अपनी जीभ को डाल दिया। अब वो उछल पड़ी उसके मुहं से सिसकियों की आवाज आने लगी ऊउईईईई माँ वाह क्या मस्त मज़ा मुझे आ रहा है, आप मुझे इसके पहले क्यों नहीं मिले? फिर मैंने उससे कहा कि कोई फर्क नहीं पड़ता अब में मिल गया हूँ ना, आज आप इसका मज़ा दिल खोलकर ले लो। अब में उसकी नाभि में अपनी जीभ को गोल गोल घुमा फिरा रहा था जिसकी वजह से वो पागल हो रही थी और मेरा लंड वो बहुत ज़ोर से दबा रही थी। फिर मैंने उसके दोनों चिकने गदराए हुए पैरों को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। यह सब उसके लिए अब सहन करने की हद से बाहर हो चुका था और उसने उसी समय अपनी चूत का पानी छोड़ दिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

दोस्तों वो अब खुश होकर मुझसे कहने लगी कि चूत को स्पर्श किए बिना में आज पहली बार इस तरह झड़ रही हूँ वरना मेरी चूत के अंदर लंड जाए बिना धक्के दिए इसने अपना पानी नहीं छोड़ा, आप बहुत ही अच्छे है मुझे आज तक इतना अच्छा सेक्स का मज़ा मेरे पति ने भी नहीं दिया, आज आपने तो मुझे यह मज़ा देकर बिल्कुल पागल ही कर दिया। दोस्तों में अब भी अपने काम में लगा रहा और अब मैंने उनके पैर का पीछा छोड़कर अब उसकी चूत पर अपने होंठो को लगा दिया था और में चूत के होंठो को अंदर दबाने लगा। दोस्तों वो वाह क्या मस्त गरम और नशीली चूत थी। मेरे मुहं में उस चिकनी चूत को देखकर पानी आ गया और मैंने बिना देर किए ही अपना मुहं उसकी चूत पर रख दिया। में चूत के दाने को अपनी जीभ से सहलाने लगा। अब वो जोश में आकर चिल्ला पड़ी ऊऊईईईइइ माँ में मर गई यह आपने क्या किया रोहित, आप आज मुझे तो क्या एकदम पागल बनाकर ही छोड़ोगे? अब वो और भी मस्त हो गई पहले से ज्यादा लंबी गहरी सांसे लेने लगी थी और पागलों की तरह मस्ती में अपने सर को इधर उधर पटकने लगी थी। दोस्तों उसकी उस हालत को देखकर मुझे अंदाजा लगा कि शायद वो पहली बार अपनी चूत को चटवा रही थी, इसलिए इतना उचलकूद कर रही थी, लेकिन मैंने भी वो काम करना नहीं छोड़ा और मैंने उसकी चूत को पूरे दस मिनट तक चाटा और फिर उसने एक बार फिर से अपनी चूत का पानी छोड़ दिया।

अब मैंने तुरंत अपना सर उसकी चूत से दूर हटा लिया और फिर देखा कि वो बड़ी तेज तेज सांसे ले रही थी और वो चेहरे से बहुत खुश नजर आ रही थी। फिर मैंने उसको खड़ा किया और में बेड पर बैठ गया और अब मैंने उसको नीचे बैठाकर उसको मेरा लंड चूसने के लिए कहा, लेकिन मना करते हुए बोली कि मैंने कभी ऐसा नहीं किया। अपने मुहं में इसको मैंने कभी नहीं लिया, में ऐसा गंदा काम नहीं कर सकती और उसके अलावा तुम कुछ दूसरा काम करवा लो। अब मैंने उसको बड़े ही प्यार से समझाते हुए कहा कि तुम इसको एक बार लेकर तो देखो, तुम्हे इस काम को करने के बाद बड़ा मस्त मज़ा आएगा। फिर वो मान गई और अब वो अपने हाथ में मेरे लंड को लेकर उसका लाल लाल टोपा अपनी जीभ से चाटने लगी और में भी मस्ती में आकर पागल हो गया, क्योकि दोस्तों इसके पहले किसी ने मेरे लंड को ऐसे कभी नहीं चाटा था। अब मेरा लंड उसके मुहं में फूंकार उठा और मैंने तुरंत जोश में आकर उसके गले तक अपने लंड को धक्का देकर अंदर कर दिया, वो आहह ऊऊहह्ह्ह करती हुई लंड को चूसने लगी थी, लेकिन वो अब थक चुकी थी। फिर करीब बीस मिनट के उस काम के बाद मैंने अपने लंड का पानी छोड़ दिया और उसने तुरंत अपने मुहं को दूर करके मेरा सारा वीर्य अपने मुहं से नीचे थूककर गिरा दिया। फिर थोड़ी देर लेटकर आराम करने के बाद हम दोनों अब 69 की पोजीशन में आ गए और उसी तरह करीब दस मिनट तक एक दूसरे को चूसने के बाद, भाभी मुझसे बोली रोहित अब तुम डाल भी दो ना इसको मेरे अंदर अब मुझसे अब नहीं रहा जाता।

फिर में खड़ा हुआ और उसके दोनों पैरों के बीच में आ गया और अपने लंड को चूत के खुले होंठो पर रखा दिया, जिसकी वजह से वो सिहर उठी और मुझसे कहने लगी प्लीज थोड़ा धीरे धीरे से डालना यह है तो मेरे पति के जैसा ही है, लेकिन यह बहुत कड़क और बलशाली भी है। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है में कोशिश करूंगा कि तुम्हे कम से कम दर्द हो, लेकिन तुम तो एक कुंवारी लड़की से भी ज्यादा नखरा दिखा रही हो जैसे यह तुम्हारी पहली चुदाई है, तुम्हे अब तो इस काम में बहुत अनुभवी हो जाना चाहिए था और तुम बिना बात के लिए डर रही हो, जबकि तुम्हे अच्छे से पता है कि इसके आगे अब में तुम्हारे साथ क्या करने वाला हूँ। फिर मैंने उसकी दोनों जांघो को कसकर पकड़ते हुए एक ज़ोर का  झटका लगा दिया और अपने लंड का टोपा उसकी चूत के अंदर डाल दिया। अब वो थोड़ा धीरे से आअहह ऊफ्फ्फ्फ़ करके चीख उठी और वो कहने लगी कि अब तुम जल्दी से पूरा अंदर डाल दो मुझे दर्द हो रहा है।

फिर मैंने उसके मुहं से वो बात सुनकर तुरंत ही अपना दूसरा ज़ोर का झटका दिया और अब मेरा आधा लंड उसकी गीली चूत के अंदर था वो दर्द से चिल्लाई उूऊईईईईई माँ में मर गई प्लीज अब तुम इसको बाहर निकालो। फिर मैंने एक और जोरदार झटका दिया और अब मेरा पूरा आठ लंड उसकी चूत के अंदर चला गया और वो एक बार फिर से चिल्लाने लगी ऊउईईईई माँ में मर गई प्लीज रोहित अब तुम इसको बाहर निकाल लो, वरना मेरी जान इसकी वजह से निकल जाएगी मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है। दोस्तों में उसकी किसी भी बात की तरफ ध्यान ना देकर अब अपने लंड को उसकी चूत में आगे पीछे करने लगा था और उसके बूब्स को में रगड़ने लगा। फिर थोड़ी देर के बाद उसको भी मज़ा आने लगा था और वो मुझसे कहने लगी हाँ ज़ोर से और ज़ोर से डालो हाँ ऐसे ही तेज धक्के दो वाह मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। फिर मैंने उसके कान में अपनी जीभ को डाला तो वो उचक पड़ी और बोली वाह मेरे राजा आज मुझे पहली बार कितना मस्त मज़ा आ रहा है, तुम पहले मुझे क्यों नहीं मिले वरना में पहले ही तुमसे अपनी चुदाई के यह मज़े ले चुकी होती। अब में उसकी वो जोश भरी बातें सुनकर धनाधन बड़े तेज धक्के देकर उसकी चुदाई करने लगा था और वो 15 मिनट में दो बार झड़कर अपना पानी छोड़ चुकी थी, लेकिन में अभी नहीं झड़ा था और में उसी जोश से धक्के देता रहा और करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपनी भाभी की चूत में एक ज़ोर का झटका देकर अपना वीर्य छोड़ दिया। फिर में उनके ऊपर ही लेट गया और हम दोनों उस समय ज़ोर ज़ोर से हांफ रहे थे और कुछ देर बाद हम ठीक हुए।

फिर मैंने उसको अपने सामने कुतिया वाली स्टाइल में बैठाकर करीब तीस मिनट तक मैंने उसकी चुदाई के मज़े लिए। उसके बाद मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी चूत की गहराईयों में डालकर में थककर उसके ऊपर ही लेटा रहा। फिर थोड़ी देर के बाद हमारी तीसरी चुदाई शुरू हो गई और हमने इस बार बीस मिनट तक चुदाई के मज़े लिए और इन तीन बार की चुदाई में वो 17 बार अपनी चूत का पानी छोड़ चुकी थी और अब इसके आगे वो मुझसे चुदाई करने से साफ मना कर रही थी और अब वो मुझसे कहने लगी कि आपने मुझसे पूरी रात का समय क्यों माँगा मुझे अब पता चला? आप तो बहुत ही सेक्सी हो आपकी चुदाई करने की यह भूख मिटती ही नहीं है। अब मैंने उसको कहा कि में जितना सेक्स करता हूँ उतना ही मुझे ज़्यादा सेक्स करने की भूख लगती है और फिर उसको मैंने मेरे लंड को चूसकर तैयार करने को कहा और उसने भी ठीक वैसा ही किया और अब मैंने उसकी गांड के छेद पर बहुत सारा थूक लगाकर एक तेज झटका मारा। अब मेरे लंड का पूरा टोपा भी अंदर नहीं गया था कि वो ज़ोर से चिल्लाकर खड़ी हो गई और उसने मुझसे गांड में कुछ भी करने से साफ मना कर दिया।

फिर मैंने उससे कहा कि अगर तुम मुझे गांड नहीं मारने दोगी तो आज रात में तुम्हारी चूत को चोद चोदकर एकदम बहाल कर दूंगा। अब वो मेरे कहने से मान गई और धीरे धीरे धक्के देकर मैंने उसकी गांड भी मारकर उसके भी मज़े ले लिए और उसने अपनी गांड भी मुझसे पहली बार मरवाई थी, इसलिए वो तेज दर्द की वजह से रोने लगी थी और कुछ देर बाद बेहोश जैसी हो चुकी थी, लेकिन करीब दस मिनट के बाद उसको भी मेरे साथ मज़ा आने लगा था और वो खुश होकर मुझसे अपनी गांड मरवाने लगी। फिर उसके बाद मैंने उसकी चूत को चोदा और फिर गांड मारी इस तरह पूरी रात सुबह 6 बजे तक 13 बार मैंने उसकी चूत की चुदाई की और 7 बार गांड मारी। दोस्तों पूरी रात चुदाई करवाने की वजह से उसकी चूत से बच्चा बाहर निकल आए उसका आकार इतना बड़ा हो गया था और उसकी गांड भी बहुत दर्द करने लगी थी।

फिर दूसरे दिन करीब दस बजे के बाद हम दोनों उठे और उसने मुझसे अपने दर्द के बारे में कहा मैंने सबसे पहले कुछ नाश्ता करवाकर उसको दर्द कम होने की एक गोली देकर उसके दर्द कम होने का इंतजार किया और शाम को करीब पांच बजे हम दोनों उस होटल को छोड़कर वापस अपने अपने घर आ गए। दोस्तों इस तरह मैंने उस पूरी रात अपनी भाभी की चुदाई करके उसको पूरी तरह से संतुष्ट किया और इतना चोदा कि वो दोबारा चुदाई का नाम ना ले, लेकिन एक सप्ताह के बाद ही उनको मेरे लंड की याद आने लगी और अब वो मुझे रात को मिलने के लिए बहुत तड़प रही है, लेकिन हमे अब ऐसा कोई अच्छा मौका नहीं मिल रहा जिसका हम फायदा उठाकर दोबारा वैसे ही चुदाई के मज़े ले और आज भी हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बात करके रोज चुदाई करते है, लेकिन आज भी किसी अच्छे मौके की तलाश में है ।।

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धन्यवाद …

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