भाई बहन का सच्चा प्यार

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, में आज अपने जीवन की सच्ची घटना को लेकर आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों के लिए लाया हूँ। दोस्तों में इस कहानी में बताने जा रहा हूँ कि मेरी पत्नी के इस दुनिया से चले जाने के बाद किस तरह से मैंने वो समय मुसीबत से बिताया, वो दिन गुजारे और उसके बाद मैंने क्या और कैसे मज़े लिए वो सभी में आज लिखकर बताने आया हूँ। दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि मेरी यह कहानी सभी को जरुर पसंद आएगी। दोस्तों भरी जवानी में औरत के बिना जीवन गुजारना और ऊपर से एक बच्चे की परवरिश की ज़िम्मेदारी सचमुच मेरे लिए बड़ा ही मुश्किल काम था, लेकिन छोटी बहन रानी (नाम बदल हुआ है) ने उस नवजात बच्चे को अपने छाती से लगाकर मेरे घर को एकदम सम्भाल लिया और भाभी मतलब कि मेरी पत्नी के गुजर जाने के बाद रानी मेरी माँ के कहने पर कुछ दिनों के लिए मेरे पास रहने आ गयी। दोस्तों रानी वैसे ही बड़ी सुंदर थी, उसके बदन में जवानी के लक्षण अब उभरने से वो और भी सुंदर लगने लगी थी। दोस्तों औरत के बिना मेरा जीवन बिल्कुल सूना सूना सा हो चुका था, लेकिन सेक्स की आग मेरे पूरे शरीर और मन में दिन पे दिन बढ़ती ही जा रही थी और इसलिए अब मुझसे राते गुजारना बड़ा मुश्किल हो गया था।

फिर कभी-कभी अपनी बहन रानी के बूब्स की गोलाईयों को देखकर मेरा मन ललचाने लगता था, लेकिन वो मेरी सगी बहन थी, बस यही बात सोचकर में अपने मन पर काबू कर लेता। फिर भी कभी-कभी मेरा मन बिल्कुल बेकाबू हो जाता और मेरा मन चाहता कि में रानी को पूरी नंगी करके उसको अपनी बाहों में भर लूँ, उसके छोटी-छोटी कसे हुए बूब्स को अपने मुहं में भरकर में बड़ी देर तक बूब्स को चूसता ही रहूँ और फिर उसको बिस्तर पर लेटाकर उसकी नन्ही सी चूत में अपना मोटा लंड डालकर उसकी मस्त चुदाई के मज़े लूँ। एक दिन में अपने ऑफिस के एक दोस्त के साथ एक इंग्लीश फिल्म देखने चला गया, वो फिल्म बहुत ज्यादा सेक्सी थी नंगे और संभोग के द्रश्यों की उसमे भरमार थी और इसलिए उस फिल्म को देखते हुए में कई बार उत्तेजित हो गया और अब चुदाई करने का बुखार मेरे सर पर चढ़कर बोलने लगा था। फिर घर लौटते समय भी में फिल्म के चुदाई वाले द्रश्य को बार-बार सोच रहा था और जब भी में उनके बारे में सोचता, मेरी बहन रानी का चेहरा मेरे सामने आ जाता और जिसकी वजह से में बेकाबू होने लगा था। दोस्तों अब मैंने मन में ठान लिया था कि आज चाहे जो भी हो जाए में अपनी बहन की चुदाई ज़रूर करूंगा और घर पहुंचने पर रानी ने ही आकर दरवाजा खोला।

अब मेरी नज़र सबसे पहले उसके भोलेभाले मासूम चेहरे पर गयी, उसके बाद टीशर्ट के नीचे ढके हुए उसके नन्हे बूब्स पर और फिर उसके पैरों के बीच पेंटी में छुपी हुई छोटी सी मक्खन जैसी मुलायम चूत पर। अब मुझे अपनी तरफ बड़ी अजीब सी नजरों से देखते हुए पकड़कर रानी ने मुझसे पूछा क्या बात है भैया? आप आज मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो? मैंने कहा कि कुछ नहीं रानी बस ऐसे ही मेरी तबीयत कुछ खराब हो गई। अब रानी पूछने लगी आपने कोई दावा ली या नहीं? तब मैंने जवाब देकर कहा कि अभी नहीं और फिर में अपने कमरे में जाकर लूंगी पहनकर बिस्तर पर लेट गया। तभी थोड़ी देर के बाद रानी मेरे कमरे में आ गई और वो पूछने लगी क्या आपको कुछ चाहिए भैया? दोस्तों उस समय मेरे मन में तो आया कि में उसको कह दूँ कि बहन मुझे चुदाई करने के लिए तुम्हारी चूत चाहिए, लेकिन में ऐसा उसको कह नहीं सकता था। अब मैंने उसको कहा कि रानी मेरे पैरों में बहुत दर्द है, तुम थोड़ा तेल लाकर मालिश कर दो, हाँ ठीक है भैया कहकर रानी चली गयी और फिर थोड़ी देर में एक कटोरी में तेल लेकर वो वापस आ गई। अब वो बिस्तर पर बैठ गयी और मेरे एक पैर से लुंगी को घुटने तक ऊपर उठाकर तेल लगाकर मालिश करने लगी।

दोस्तों अपनी 18 साल की बहन के नाज़ुक हाथों का स्पर्श पाकर मेरा लंड तुरंत ही कठोर होकर खड़ा हो गया, थोड़ी देर बाद मैंने उसको कहा रानी मुझे ज्यादा दर्द तो जांघो में है, तुम थोड़ा घुटने के ऊपर भी तेल मालिश कर दो। फिर वो बोली जी भैया कहकर रानी ने लुंगी को जाँघो पर से हटाना चाहा और तभी जानबूझ कर मैंने अपना दूसरा पैर ऊपर उठाया जिसकी वजह से मेरा फनफनाया हुआ खड़ा लंड लुंगी के बाहर आ गया। अब मेरे लंड पर अपनी पहली नज़र पड़ते ही रानी सकपका गयी और कुछ देर तक वो चकित होकर मेरे लंड को देखती रही और फिर उसको लुंगी से ढकने की कोशिश करने लगी, लेकिन लुंगी मेरे पैरों से दबी हुई थी और इसलिए वो उसको ढक नहीं सकी। अब मैंने सही मौका देखकर उसको पूछा क्या हुआ रानी? वो बोली जी भैया आपका अंग दिख रहा है। फिर मैंने बिल्कुल अंजान बनकर उसको पूछा कि अंग कौन सा अंग? और जब रानी ने कोई जवाब नहीं दिया, तब मैंने बड़े अंदाज से अपने लंड पर हाथ रखते हुए कहा अरे यह कैसे बाहर निकल गया? फिर मैंने कहा कि बहन जब तुमने इसको देख ही लिया तो क्या शरमाना थोड़ा तेल लगाकर इसकी भी मालिश कर दो। दोस्तों मेरे मुहं से वो बात सुनकर रानी बहुत घबरा गयी और शरमाते हुए बोली, छी भैया आप यह कैसी बात करते है? जल्दी से आप इसको ढकिये।

अब मैंने उसको कहा कि देखो रानी यह भी तो शरीर का एक अंग ही है तो फिर इसकी भी कुछ सेवा होनी चाहिए ना, तुम्हारी भाभी जब थी तो वो इसकी बड़ी सेवा करती थी, वो हर दिन इसकी मालिश किया करती थी, लेकिन उसके चले जाने के बाद यह बेचारा अब बिल्कुल अनाथ हो गया है, तुम इसके दर्द को नहीं समझोगी तो कौन समझेगा? दोस्तों मैंने उसको इतनी बात बड़े ही मासूमियता से कह डाली, लेकिन भैया में तो आपकी बहन हूँ, मुझसे ऐसा काम करवाना तो पाप होगा। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है रानी अगर तुम अपने भैया का असली दर्द नहीं समझ सकती और पाप-पुण्य की बात करती हो तो जाने दो, मैंने यह सब उसको बड़े उदासी भरे स्वर में कहा। फिर वो बोली कि में आपको दुखी नहीं देख सकती, भैया आप जो भी मुझसे कहेंगे में वो सब करूंगी और मुझे उदास होते देखकर रानी भावुक हो गयी, उसने अपने दोनों हाथों में तेल लेकर मेरे खड़े लंड को पकड़ लिया। फिर अपने लंड पर रानी के नाज़ुक हाथों का स्पर्श पाकर वासना की आग में जलते हुए मेरे पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गयी, मैंने रानी की कमर में हाथ डालकर उसको अपने से सटा लिया। फिर उसके बाद मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा बस बहन ऐसे ही सहलाती रहो, मुझे बहुत आराम मिल रहा है और थोड़ी ही देर में मेरा पूरा जिस्म कामवासना की आग में जलने लगा और जिसकी वजह से मेरा मन बेकाबू हो गया।

अब मैंने रानी की बाह पकड़कर उसको अपने ऊपर खींच लिया, जिसकी वजह से उसके दोनों बूब्स मेरी छाती से चिपक गए। फिर में उसके चेहरे को अपनी हथेलियों में लेकर उसके होंठो को चूमने लगा, लेकिन रानी को मेरा यह प्यार शायद समझ में नहीं आया और इसलिए वो कसमसाकर मुझसे अलग होते हुए बोली भैया यह आप क्या कर रहे हो? रानी आज तुम मुझे मत रोको आज मुझे जी भरकर प्यार करने दो, लेकिन भैया क्या कोई भाई अपनी बहन को ऐसे प्यार करता है? रानी ने बड़े ही आशचर्य से पूछा। अब मैंने बड़े अनुरोध भरे स्वर में उसको कहा कि छोटी बहन तो आधी घरवाली होती है और जब तुमने मेरा पूरा घर सम्भाल ही लिया है तो मुझे भी अपना बना लो में औरो की बात नहीं जानता, लेकिन आज में तुमको हर तरह से प्यार करना चाहता हूँ, तुम्हारे हर एक अंग को चूमना चाहता हूँ प्लीज आज तुम मुझे मत रोको रानी। अब वो कहने लगी, लेकिन भैया भाई-बहन के बीच यह सब तो पाप है। फिर मैंने अपना तर्क दिया पाप-पुण्य सब बेकार की बातें है, बहन जिस काम से दोनों को सुख मिले और किसी का नुकसान ना हो वो पाप कैसे हो सकता है? अब रानी ने अपना डर जताकर कहा, लेकिन भैया में तो अभी बहुत छोटी हूँ। फिर मैंने उसको समझाते हुए कहा कि वो सब तुम मुझ पर छोड़ दो, में तुम्हे कोई दर्द तकलीफ़ नहीं होने दूँगा और मैंने उसको अपनी तरफ से पूरा भरोसा दिलाया।

अब रानी कुछ देर गुमसुम सी बैठी रही, मैंने उसको पूछा बोलो बहन क्या कहती हो? ठीक है भैया आप जो चाहे कीजिए में सिर्फ आपकी खुशी चाहती हूँ। अब मेरी बहन का चेहरा शरम से लाल हो चुका था, रानी की तरफ से स्वीक्रति मिलते ही मैंने उसके नाज़ुक बदन को अपनी बाहों में भीच लिया और उसके पतले-पतले गुलाबी होंठो को चूसने लगा, उसका विरोध बिल्कुल समाप्त हो चुका था। अब में अपने एक हाथ को उसकी टी-शर्ट के अंदर डालकर उसके छोटे आकार के बूब्स को हल्के से सहलाने लगा। फिर उसके निप्पल को चुटकी में लेकर मसलने लगा, जिसकी वजह से थोड़ी ही देर में रानी को भी मज़ा आने लगा था और वो स्सीईईइ आह्ह्ह्ह करने लगी हाँ मज़ा आ रहा है भैया आह्ह्ह्हह हाँ और कीजिए मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अब अपनी बहन की मस्ती को देखकर मेरा हौसला पहले से ज्यादा बढ़ गया, हल्के विरोध के बावजूद मैंने रानी की टीशर्ट को उतार दिया और उसके एक बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा। फिर कुछ देर बाद दूसरे बूब्स को में अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे दबा रहा था और रानी को अब पूरा मज़ा आने लगा था, वो धीरे-धीरे बुदबुदाने लगी ओह्ह्ह ऊफफ्फ्फ्फ़ वाह क्या मस्त मज़ा आ रहा है? भैया और ज़ोर-ज़ोर से मेरे बूब्स को चूसिए आह्ह्ह्ह आपने यह क्या कर दिया? ओह्ह्ह  भैया।

अब अपनी बहन को पूरी तरह से मस्त होती देखकर मेरा हौसला बढ़ गया मैंने पूछा क्यों रानी मज़ा आ रहा है ना? रानी ने मस्ती में कहा हाँ भैया बहुत मज़ा आ रहा है आप बहुत अच्छी तरह से बूब्स चूस रहे है। अब मैंने उसको कहा कि तुम मेरा लंड अपने मुहं में लेकर इसको चूसो तुम्हे और भी ज्यादा मज़ा आएगा, वो बोली हाँ ठीक है भैया और वो मेरे लंड को अपने मुहं में लेने के लिए अपनी गर्दन को नीचे झुकाने लगी तो मैंने उसकी बाँह पकड़कर उसको इस तरह से लेटा दिया कि उसका चेहरा मेरे लंड के पास और उसके कूल्हे मेरे चेहरे की तरफ हो गये, वो अब मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर आईसक्रीम की तरह मज़े से चूसने लगी, जिसकी वजह से मेरे पूरे शरीर में हाई वोल्टेज का करंट दौड़ने लगा। में मस्ती में बड़बड़ाने लगा हाँ रानी हाँ शाबाश बहुत अच्छा चूस रही हो और अंदर लेकर चूसो। अब रानी तेज़ी से लंड को मुहं के अंदर बाहर करने लगी थी और में मस्ती में पागल होने लगा था, मैंने उसकी स्कर्ट और पेंटी दोनों को एक साथ खींचकर पैरों से बाहर निकालकर अपनी बहन को पूरी तरह नंगी कर दिया। फिर उसके दोनों पैरों को पूरा फैलाकर उसकी चूत को में अपनी चकित नजरों से देखने लगा, वाह क्या मस्त चूत थी बिल्कुल मक्खन की तरह चिकनी और मुलायम उस पर छोटे हल्के भूरे रंग के बाल भी उगे थे।

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अब मैंने अपना चेहरा उसकी जाँघो के बीच घुसा दिया और उसकी नन्ही सी चूत पर में अपनी जीभ को फेरने लगा, चूत पर मेरी जीभ की रगड़ से रानी का शरीर कांप गया और उसका पूरा जिस्म मस्ती में झूमने लगा। फिर वो बोल उठी हाए भैया यह आप क्या कर रहे है? मेरी चूत क्यों चाट रहे है? आह्ह्ह्ह में पागल हो जाऊंगी ओह्ह्ह्ह् मेरे अच्छे भैया हाए मुझे यह क्या होता जा रहा है? रानी मस्ती में अपनी कमर को ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करते हुए मेरे लंड को चूस रही थी, उसके मुहं से थूक निकलकर मेरी जाँघो को गीला कर रहा था और मैंने भी चाट चाटकर उसकी चूत को अपने थूक से तर कर दिया था। दोस्तों करीब दस मिनट तक हम भाई-बहन ऐसे ही एक दूसरे को चूसते चाटते रहे, हम दोनों का पूरा बदन पसीने से भीग चुका था, लेकिन अब मुझसे सहा नहीं जा रहा था और इसलिए मैंने उसको कहा रानी मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं होता। अब तू एकदम सीधी होकर अपने दोनों पैरों को पूरा फैलाकर लेट जा, क्योंकि अब में तेरी चूत में अपना लंड डालकर तुझे चोदना चाहता हूँ। फिर मेरी इस बात को सुनकर रानी एकदम डर गई, उसने अपने पैरों को सिकोड़कर अपनी चूत को छुपा लिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब वो घबराकर बोली नहीं भैया प्लीज आप ऐसा मत कीजिए मेरी चूत अभी बहुत छोटी है और आपका लंड बहुत लंबा और मोटा है, इससे मेरी चूत फट जाएगी और में मर जाऊंगी, प्लीज आप इस विचार को अपने दिमाग़ से निकाल दीजिए। अब मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके होंठो पर एक प्यार भरा चुंबन जड़ते हुए उसको कहा कि डरने की कोई बात नहीं है रानी में तुम्हारा भाई हूँ और तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ, तुम मेरा विश्वास करो में बड़े ही प्यार से धीरे-धीरे करूंगा और तुम्हे कोई भी दर्द तकलीफ़ नहीं होने दूँगा। फिर रानी ने बड़े ही घबराए हुए स्वर में पूछा, लेकिन भैया आपका इतना मोटा लंड मेरी इस छोटी सी चूत में कैसे घुसेगा? इसमे तो उंगली भी नहीं घुस सकती। अब इसकी चिंता तुम छोड़ दो रानी और अपने भैया पर भरोसा रखो में तुम्हे कोई तकलीफ़ नहीं होने दूँगा, मैंने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए भरोसा दिलाया। अब वो कहने लगी, मुझे आप पर पूरा भरोसा है भैया, लेकिन फिर भी बहुत डर लग रहा है पता नहीं क्या होने वाला है? दोस्तों रानी का डर कम नहीं हो पा रहा था मैंने उसको फिर से समझाना शुरू किया, मेरी प्यारी बहन अपने मन से सारा डर निकाल दो और आराम से पीठ के बल लेट जाओ, में तुम्हे बहुत प्यार से करूंगा और तुम्हे बहुत मज़ा आएगा।

फिर वो कहने लगी हाँ ठीक है भैया, अब मेरी जान आपके हाथों में है और रानी इतना कहकर पलंग पर सीधी होकर लेट गई, लेकिन उसके चेहरे से भय अब भी साफ झलक रहा था। अब मैंने पास की टेबल से वेसलिन की शीशी उठाई, उसके दोनों पैरों को खींचकर पलंग से बाहर लटका दिया और रानी डर की वजह से अपनी चूत को जाँघो के बीच दबाकर छुपाने की कोशिश कर रही थी। फिर मैंने उन्हे फैलाकर चौड़ा कर दिया और अब में उसके दोनों पैरों के बीच खड़ा हो गया। अब मेरा तना हुआ लंड रानी की छोटी सी नाज़ुक चूत के करीब हिचकोले मार रहा था, मैंने धीरे से वेसलिन लेकर उसकी चूत में और अपने लंड पर लगा लिया, जिसकी वजह से लंड को अंदर डालने में आसानी हो। दोस्तों अब तक सारा मामला सेट हो चुका था, अपनी कमसिन बहन की मक्खन जैसी नाज़ुक चूत की चुदाई करने का मेरा बरसो पुराना सपना आज पूरा होने वाला था। अब में अपने लंड को हाथ से पकड़कर उसकी चूत पर रगड़ने लगा, कठोर गरम लंड की रगड़ खाकर थोड़ी ही देर में रानी की चूत का दाना खड़ा होकर तन गया, वो मस्ती में कांपने लगी और अपने कूल्हों को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी और सिसकियाँ लेते हुए कहने लगी, वाह बहुत अच्छा लग रहा है भैया आह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है हाँ और रगड़िए भैया तेज-तेज रगड़िए।

अब वो मस्ती से पागल होने लगी थी और अपने ही हाथों से अपने बूब्स को मसलने लगी थी, मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था और में उसको बोला कि हाँ मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है तुम बस ऐसे ही साथ देती रहो, आज में तुम्हे चोदकर एक पूरी औरत बना दूँगा और में अपना लंड वैसे ही लगातार उसकी चूत पर रगड़ता जा रहा था। फिर वो बोलने लगी हाय भैया आह्ह्ह यह आपने क्या कर दिया? ऊऊह्ह्ह्ह मेरे पूरे बदन में करंट दौड़ रहा है, मेरी चूत के अंदर आग लगी हुई है। अब मुझसे सहा नहीं जाता ऊह्ह्ह्ह भैया मेरे अच्छे भैया प्लीज अब कुछ कीजिए ना आप मेरी चूत की आग को अब बुझा दीजिए अपना लंड मेरी चूत में डालकर चोद दो प्लीज भैया चोदो मेरी चूत को। फिर मैंने ऐसे ही उसको पूछा, लेकिन रानी तुम तो अभी कह रही थी कि मेरा लंड बहुत मोटा है, इससे तुम्हारी चूत फट जाएगी क्यों अब क्या हो गया? ओह्ह्ह भैया मुझे क्या पता था कि चुदाई में इतना मज़ा आता है आह्ह्ह्ह अब और बर्दाश्त नहीं होता। अब रानी जोश में आकर अपनी कमर को उठा उठाकर पटक रही थी ऊउफ़्फ़फ़ भैया ऊऊह्ह्ह्हह  आग लगी है मेरी चूत के अंदर। अब आप देर मत कीजिए इस लंड को डालकर चोदो ना अपनी बहन को, आप मेरी चूत को फट जाने दीजिए आपकी इस बहन को कुछ भी हो जाए, लेकिन आप चोदो मुझे।

अब रानी पागलों की तरह बड़बड़ाने लगी थी, में तुरंत समझ गया कि लोहा गरम है और इसी समय चोट मारना ठीक रहेगा। फिर मैंने अपने फनफनाए हुए कठोर लंड को उसकी चूत के छोटे से छेद पर अच्छी तरह से सेट किया और उसके पैरों को अपने पेट से सटाकर अच्छी तरह जकड़ लिया और एक ज़ोरदार धक्का मार दिया। तभी अचानक रानी के गले से एक तेज चीख निकल गई आईईईईई बाप रे में मर गयी ऊउईईईई माँ मेरी जान निकल गई, प्लीज निकालो भैया मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अब बस करो भैया मुझे नहीं चुदवाना मेरी चूत फट गयी, भैया अब आप छोड़ दीजिए मुझे मेरी जान निकल रही है और फिर रानी दर्द से एकदम बेहाल होकर रोने लगी थी। फिर मैंने देखा कि मेरे लंड का टोपा उसकी चूत को फाड़कर अंदर जा चुका था और चूत के अंदर से खून भी निकलने लगा था, अपनी दुलारी बहन को दर्द से बिलबिलाते देखकर मुझे दया तो बहुत आई, लेकिन फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि अगर इस हालत में उसको छोड़ दूँगा तो वो दुबारा फिर कभी इस काम के लिए तैयार नहीं होगी। अब मैंने उसको समझाकर हौसला देते हुए कहा कि बस तुम थोड़ा सा और दर्द सह लो पहली बार चुदवाने में दर्द तो सभी को सहना ही पड़ता है।

फिर एक बार रास्ता खुल गया तो उसके बाद मज़ा ही मज़ा है और उसको यह बात कहकर में रानी को धीरज देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वो दर्द से छटपटा रही थी और वो कहने लगी कि नहीं में मर जाऊंगी, भैया प्लीज मुझे आप छोड़ दीजिए मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है, प्लीज भैया निकाल लीजिए अपना लंड। अब रानी ने बड़े ही गिड़गिड़ाते हुए मुझसे अनुरोध किया, लेकिन मेरे लिए ऐसा करना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था और इसलिए मेरी बहन रानी मेरे सामने दर्द से रोती बिलखती रही और में उसके पैरों को कसकर पकड़े हुए अपने लंड को धीरे-धीरे आगे पीछे करता रहा। दोस्तों थोड़ी थोड़ी देर में अपने लंड का दबाव थोड़ा ज्यादा बढ़ा देता था, जिसकी वजह से लंड थोड़ा और अंदर चला जाए, इस तरह से रानी करीब दस मिनट तक तड़पती रही और में लगातार धक्के लगाता रहा। फिर कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि मेरी बहन का दर्द कुछ कम हो रहा था, दर्द के साथ साथ अब उसको मज़ा भी आने लगा था, क्योंकि अब वो अपने कूल्हों को बड़े ही ताल में ऊपर नीचे करने लगी थी। अब उसके मुहं से करहाने की आवाज के साथ साथ सिसकियाँ भी निकलने लगी थी। फिर मैंने उसको पूछा क्यों बहन अब तुम्हे कैसा लग रहा है? क्या अब तुम्हारा दर्द कुछ कम हुआ? रानी ने हाफते हुए स्वर में कहा हाँ भैया अब मुझे थोड़ा थोड़ा अच्छा लग रहा है।

अब बस आप ऐसे ही धीरे धीरे धक्के लगाते रहो, ज्यादा अंदर मत डालना मुझे बहुत दुखाता है, वो बहुत ज्यादा थक भी चुकी थी। फिर मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है, बहन तुम अब चिंता छोड़ दो, क्योंकि अब तुम्हे चुदाई का असली मज़ा आएगा। फिर उसको यह बात कहकर में धीरे-धीरे धक्के लगाता रहा, जिसकी वजह से कुछ ही देर के बाद रानी की चूत गीली होकर पानी छोड़ने लगी और उसकी वजह मेरा लंड भी अब चिकना होकर बड़े आराम से अंदर बाहर होने लगा था। अब हर धक्के के साथ फक फक फच की आवाज़ आनी शुरू हो गयी, मुझे भी अब ज्यादा मज़ा मिलने लगा था और रानी भी मस्त होकर चुदाई में मेरा पूरा सहयोग देने लगी थी। फिर वो बोल रही थी, हाँ अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है भैया अब मज़ा आ रहा है हाँ आप ऐसे ही चोदते रहो और अंदर डालकर चोदो, भैया आपका लंड बहुत मस्त है। अब यह सब मुझे बहुत सुख दे रहा है और रानी मस्ती में बड़बड़ाए जा रही थी, जिसकी वजह से मुझे भी बहुत आराम मिल रहा था। फिर मैंने भी तेज धक्कों के साथ उसकी चुदाई की गति को बढ़ा दिया था, में पहले से भी ज्यादा तेज़ी से धक्के लगाने लगा।

अब मेरा करीब पूरा लंड रानी की चूत में जा रहा था, में भी मस्ती के सातवे आसमान पर पहुंच गया और मेरे मुहं से मस्ती के शब्द फूटने लगे आह्ह्ह्ह रानी मेरी प्यारी बहन मेरी जान आज तुमने मुझसे चुदवाकर मेरे ऊपर बहुत बड़ा उपकार किया है। हाँ बहन तुम्हारी चूत बहुत टाईट है, यह बहुत मस्त है तुम्हारे बूब्स भी बहुत कसे हुए है वाह बहुत मज़ा आ रहा है। अब रानी अपने दोनों कूल्हों को ऊपर उछाल उछालकर अपनी चुदाई में मेरी पूरी मदद कर रही थी, हम दोनों भाई बहन मस्ती की बुलंदियों को छू रहे थे। तभी रानी चिल्लाई भैया मुझे कुछ हो रहा है, भैया मेरे अंदर से कुछ निकल रहा है ऊफ्फ मज़ा आ गया ऊऊईईइ आह्ह्ह्ह रानी अपनी कमर को उठाकर मेरे पूरे लंड को अपनी चूत के अंदर समा लेने की कोशिश करने लगी थी। अब में तुरंत समझ गया कि मेरी बहन का अब झड़ने का समय आ गया है वो झड़ रही थी, मुझसे भी अब और सहना मुश्किल हो रहा था। फिर में बहुत तेज तेज धक्के मारकर उसको चोदने लगा और थोड़ी ही देर में हम भाई बहन एक साथ झड़ गये। दोस्तों बड़े दिनों से इकठ्ठा मेरा ढेर सारा वीर्य रानी की चूत में तेज पिचकारी की तरह निकलकर चूत में भर गया और उसी समय में उसके ऊपर लेटकर उसको चिपक गया। अब रानी ने मुझे अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया।

फिर कुछ देर तक हम दोनों भाई बहन ऐसे ही एक दूसरे के नंगे बदन से चिपके हांफते रहे, जब हमारी साँसे कुछ काबू में हुई। फिर रानी ने मेरे होंठो पर एक प्यार भरा चुंबन लेकर कहने लगी, भैया आज आपने अपनी बहन को वो सुख दिया है में अब तक जिसके बारे में बिल्कुल अंजान थी। अब मुझे आप इसी तरह हर रोज चोदना ठीक है ना भैया? फिर मैंने भी उसके बूब्स को चूमते हुए अपना जवाब देकर उसको कहा कि आज तुम्हे चोदकर जो सुख मुझे मिला है, वो तुम्हारी भाभी को चोदकर भी नहीं मिला, तुमने आज अपने भैया को पूरी तरह से त्रप्त कर दिया है। तभी वो बीच में बोल पड़ी और हाँ भैया आज से में आपकी बहन बाद में दूसरी पत्नी पहले हूँ, आप मुझे भाभी की तरह मज़े देना क्यों ठीक है ना भैया? उसके बाद मैंने उसको अपनी बाहों में कसते हुए हंसकर उसको कहा कि हाँ मेरी जान और उसके बाद बहुत देर तक हम भाई बहन एक दूसरे को चूमते-चाटते और बातें करते रहे, कब हम नींद के आगोश में चले गये पता ही नहीं चला। दोस्तों यह थी मेरी वो सच्ची चुदाई की कहानी अपने जीवन का सच मुझे उम्मीद है कि यह आप सभी को जरुर पसंद आएगी ।।

धन्यवाद …

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