चाची की तड़पती चूत का फालूदा

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प्रेषक : राहुल …

हैल्लो दोस्तों, आप सभी कैसे हो? दोस्तों आप सभी की तरह में भी कामुकता डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ और मैंने बहुत सारी कहानियों को पढ़ा है। अब आज में अपना खुद का एक सच्चा अनुभव लिख रहा हूँ, में उम्मीद करता हूँ कि यह सभी को बहुत पसंद आएगी। दोस्तों में आज जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरी चाची के साथ की एक सच्ची घटना है। अब में सबसे पहले आप सभी को मेरा और मेरी चाची का परिचय आप सभी को देना चाहता हूँ। दोस्तों मेरा नाम राहुल है, में करनाल का रहने वाला हूँ, में अब अपना खुद का व्यापार करता हूँ और में कॉलेज में बहुत सारी लड़कियों को पहले ही चोद चुका हूँ। दोस्तों मेरी उम्र 24 साल, लम्बाई 5.10 इंच, रंग गोरा, मेरा बदन बहुत गठीला है, मेरे लंड का आकार सात इंच लंबा है और तीन इंच मोटा है। दोस्तों जब में कॉलेज में था, तब उन दिनों मेरे साथ पढ़ने वाली लड़कियाँ घंटो मेरे लंड को चूसती मज़े करती थी। दोस्तों मेरी चाची की उम्र 29 साल है, उनका नाम नयना है और हम सभी उन्हें प्यार से नीनू चाची बुलाते थे, उनकी लम्बाई 5.5 इंच, थोड़ी अच्छी भरी हुई, उनके बूब्स का आकार करीब 38 इंच उनके हॉट सेक्सी जिस्म का आकार 38-30-40, रंग गोरा, लंबे काले घने बाल जो उसके कूल्हों तक पहुंचते।

दोस्तों जब वो भी मटक मटककर चलती, तब सभी पड़ोस के लड़के उनको देखकर पागल हो जाते थे। अच्छा तो अब में आप सभी को ज्यादा बोर ना करते हुए सीधा अपनी आज की कहानी को सुनाना शुरू करता हूँ। दोस्तों हमारे घर में कुल मिलाकर दस सदस्य है में, मेरे मम्मी-पापा और मेरी बहन, चाचा-चाची और चाचा का एक लड़का, मेरे दादा-दादी और हमारे एक अंकल की लड़की जो हमारे साथ ही रहती है। दोस्तों मेरी चाची बहुत ही हॉट सेक्सी है और उन दिनों गर्मियों का मौसम था, इस वजह से हम सब लोग छत पर सोते थे, में चाचा-चाची और मेरे चाचा की लड़की और बाकी सब नीचे सोते थे। फिर उस दिन रात को मैंने चाची की सिसकियों की आवाज सुनी जिसकी वजह से में उठ गया और अब मैंने सुना कि चाची सिसकियाँ ले रही थी। अब में तुरंत समझ गया था कि मेरा चाचा उसकी चुदाई कर रहे है। फिर मैंने अपने मुँह के ऊपर से धीरे से अपनी चादर को उठाया और देखने लगा था, उस समय चाचा-चाची की चूत को चाट रहा था। अब चाची पूरी नंगी थी, उसके वो सेक्सी रेशमी बाल जो मुझे हर बार पागल करते थे। वो पूरे खुले हुए थे और चाची दर्द की वजह से सिसकियाँ ले रही थी आहह ऊह्ह्ह्ह। अब में वैसे ही गरम हो चुका था, चाचा ने चाची की चूत को शायद काटा जिसकी वजह से वो चिल्ला उठी।

तभी चाचा ने अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख दिया और बोला कि ज्यादा चिल्लाओ मत, नहीं तो राहुल और अनु जाग जाएँगे। अब चाची कहने लगी कि इतना ज़ोर से जानवर की तरह काटोगे तो में चिल्लाऊँगी नहीं तो और क्या करूँगी? फिर वो बोला कि हाँ ठीक है, मेरी रानी में अब नहीं काटता और फिर से चाचा-चाची की चूत चाटने लगा था। अब चाची दोबारा से सिसकियाँ लेने लगी थी आहह ऊफ्फ्फ यह क्या कर रहे हो? फाड़ दोगे क्या? में कहीं भागी नहीं जा रही हूँ आह्ह्ह्ह धीरे ऊह्ह्ह्ह में मर गई, मुझे पहले मालूम होता कि इतना तरसा दोगे तो में कभी तुमसे शादी नहीं करती। फिर चाचा भी जोश में आ गया और बोला कि रानी अभी तो सिर्फ चाट रहा हूँ, थोड़ी देर रूको फिर दिखाऊँगा दर्द किसको कहते है? और अब चाचा ऊपर आ गया और चाची से बोला कि ले चल अभी मुँह खोल और चूस इसको। अब मेरे चाचा का लंड चाची के मुँह में था और अब वो उसको बड़े मज़े से चूस रही थी और अपने मुहं से हल्की सी आवाज़े निकाल रही थी पच-पच पछ-पछ। तभी चाची बोली कि ऐ जी तुम्हारा निकल रहा है। अब चाचा बोला कि तो पी जा उसको और यह बात सुनकर चाची ने उसका सारा का सारा रस पी लिया और जो बचा था, वो अपने बूब्स पर रगड़ने लगी थी और फिर से चाचा को नीचे लेटाकर चाची उसके ऊपर आ गई।

अब उसके लंबे बाल उसके कूल्हों को ढक रहे थे और बाकी चाचा के ऊपर थे। फिर चाची ने चाचा के कान को काटा और फिर उसके मुँह में अपना मुँह डालकर उसको चूमने लगी थी आहह्ह्ह। अब वो दोनों बहुत जोश में थे, थोड़ी देर के बाद चाची ऊपर से उठ गई और अपनी चूत को चाचा के मुँह पर रगड़ने लगी थी। अब उसकी वो काले बालों से भरी हुई चूत गीली हो चुकी थी आहह्ह्ह और मेरा लंड तो इधर पूरा तनकर खड़ा हो गया था, लेकिन मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूँ? अगर लंड हिलाता तो उन दोनों को समझ आ जाता तब में फिर से उनका खेल देखने लगा। फिर चाची-चाचा से बोली ऐ जी अब और कितना तरसाओगे? डालो ना अंदर और दोबारा से चाची-चाचा के नीचे आ गई। अब चाचा ने अपना लंड धीरे से चाची की चूत के मुहं पर रखा, तब चाची ने सिसकी भरी सस्सस्स डालो अंदर। तब चाचा ने अपना लंड धीरे से अंदर घुसाया, अभी तक तो चाचा का टोपा ही अंदर गया था, लेकिन चाची दर्द की वजह से सिसकियाँ भरने लगी थी आहह्ह्ह उम्म क्या कर रहे हो? अब चाचा बोला कि रानी झटका मारूं क्या? तब चाची बोली कि मारो ना, किससे पूछ रहे हो? तुम्हारी ही तो है आहह। तभी चाचा ने ज़ोर से एक झटका मार दिया और चाची चिल्ला उठी ऊईईईई माँ आहह में मर गई।

फिर इतने में मुझे इधर थोड़ी सी हलचल अनु (हमारे अंकल की लड़की) की चादर के नीचे दिखाई पड़ी। और तब में तुरंत समझ गया था कि चाचा की चुदाई का पूरा मज़ा अनु भी ले रही है। अब उधर चाचा ने चाची को झटके लगाने शुरू किए और चाची नीचे से अपने कूल्हों को उठा रही थी और आवाज़े निकाल रही थी, धीरे-धीरे करो राजा मार डालोगे क्या? आह्ह्ह फाड़ दो मेरी चूत को उम्म्म् ऊईईईई माँ आह्ह्ह। अब उन दोनों की सिसकियों ने रात का पूरा शांत माहौल आवाज़ों से भर दिया और कम से कम बीस मिनट की चुदाई के बाद चाचा शांत पड़ गया। तब में झट से समझ गया कि चाचा ने अपना पानी चाची की चूत में छोड़ दिया है। फिर करीब दस मिनट के बाद चाचा-चाची के ऊपर से उठा और बोला कि क्यों रानी मज़ा आया? तब चाची बोली कि आज तो तुमने मुझे मार ही दिया। फिर उन दोनों ने अपने कपड़े पहने और सो गये, लेकिन में तो उस पूरी रात चाची के बारे में सोचता रहा और उसी दिन मैंने भी ठान लिया था कि एक ना एक दिन चाची को में भी जरूर चोदूंगा। अब तो रोज रात को चाची मेरे सपनों में मुझे नंगी दिखने लगी थी, लेकिन मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूँ? फिर उस दिन सुबह में चाची के घर में गया, जो कि पहली मंजिल पर था और मुझे उस समय कोई नजर नहीं आया।

फिर जब में अंदर चला गया, तब मैंने देखा कि बाथरूम से पानी की आवाज आ रही है और तब मैंने सोचा कि चाची को नंगा नहाते हुए देखने का यह मेरे पास एक बहुत अच्छा मौका है। अब में संडास के अंदर जाकर नल के ऊपर चढ़कर दीवार के ऊपर से बाथरूम में देखने लगा था और चाची नहा रही थी, उसके बाल खुले हुए, पूरा नंगा भीगा हुआ बदन और उसके बड़े आकार के बूब्स मेरे अंदर आग लगा रहे थे, क्योंकि चाची बिना कपड़ो के बहुत सेक्सी लग रही थी और यह मेरा पहला अनुभव था। तभी मेरा पैर नल पर से फिसल गया और में गिर पड़ा, जिसकी वजह से एक आवाज हुई। अब चाची चिल्लाई पूछने लगी कौन है? उसने शायद मुझे पहचान लिया था। अब वो बाथरूम से बाहर आती तब तक में वहाँ से भाग गया था, लेकिन अब चाची को समझ आ गया था कि मैंने उनको नंगा देखा है। दोस्तों अब उस घटना के बाद से ही उनका मुझसे बोलने बात करने और स्वभाव में थोड़ा सा बदलाव आ चुका था। अब चाची मुझसे थोड़ी हिचकिचाकर बात करने लगी थी, मेरा तो रोज रात को चाची-चाचा की चुदाई देखने का प्रोग्राम था, लेकिन मेरे दूसरे वाले अंकल (अनु के पिता) जो दिल्ली में रहते है, वो उन दिनों बहुत बीमार थे और मेरी आंटी का देहांत तो चार साल पहले ही हो गया था और इसलिए अंकल ने अनु को हमारे साथ रहने के लिए भेजा था।

फिर अंकल के बीमार होने की वजह से मेरे चाचा को दिल्ली जाना पड़ा और वो अनु को भी अपने साथ ले गये, लेकिन चाची को काम पर से छुट्टी ना मिलने की वजह से वो उनके साथ नहीं जा सकी थी। फिर वहाँ जाकर चाचा ने फोन किया और बताया कि शायद उनको वहाँ पर महीना भर रुकना पड़ेगा, चाचा जी की तबीयत बहुत खराब है, उनको एक अस्पताल में भर्ती किया था। अब यहाँ पर चाची कि तो जैसे जान ही निकल गई, जब चाचा ने महीना भर रहने की बात कही थी तभी से वो उदास थी। अब छत पर सिर्फ में और चाची सोते थे, तब पहले सप्ताह में तो हमारे बीच कुछ नहीं हुआ, लेकिन दूसरे सप्ताह में मुझे चाची की चाचा की प्रति वो तड़प अब साफ नजर आ रही थी, क्योंकि चाचा उसको हर चोदता था और छुट्टी के दिन तो दिनभर चोदता था। फिर दूसरे सप्ताह में मैंने बहुत बार गौर किया कि चाची अपनी चूत पर अक्सर अपना हाथ फैरती रहती थी। फिर उस रात चाची ने नाइटी पहनी थी और वो छत पर आ गई, उनके लंबे बाल खुले हुए थे शायद उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, क्योंकि उसके बूब्स कुछ ढीले लग रहे थे। फिर जब रात के दस बजे थे, मेरा बिस्तर तो एक कोने में लगा था और चाची का बिस्तर छत के बीचों बीच में लगा हुआ था। फिर मैंने देखा कि चाची आ गई है, तब मैंने सोने का नाटक किया।

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अब चाची ने देखा कि में सोया हुआ हूँ, तब वो भी अपने बिस्तर पर सो गई, लेकिन चाचा की कमी की वजह से उसको नींद नहीं आ रही थी। अब वो करवटे बदलती हुई सोने का प्रयास कर रही थी, तभी अचानक से मैंने देखा कि चाची ने अपनी नाइटी को उठा लिया और वो अपनी चूत पर हाथ फैर रही थी, शायद उसने पेंटी भी नहीं पहनी थी। अब अंधेरे की वजह से मुझे ठीक से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन जब उसका हाथ आगे पीछे होते देखा, तब में समझ गया कि उसने कुछ पहना नहीं है। अब मुझे उसकी वो भारी-भारी जांघे और बालों से भरी चूत हल्की सी दिख रही थी। दोस्तों उस समय चाची के हाथ में कुछ था और अब वो उसको अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी, शायद उसके हाथ में रोटी बनाने का बेलन था और अब उसको वो अपनी चूत में डालकर अंदर-बाहर करके सिसकियाँ ले रही थी। फिर यह काम दो-तीन दिन तक ऐसे ही चलता रहा, लेकिन मुझसे अब रहा नहीं गया और मैंने सोच लिया कि आज कुछ भी हो जाए में चाची की चुदाई जरूर करूंगा। फिर रात को चाची का वही काम शुरू हो गया और थोड़ी देर के बाद में हल्की सी आवाज में बोला क्या में आपकी कुछ मदद करूँ? तब चाची मेरी आवाज को सुनकर एकदम से घबरा गई, मेरी तरफ देखा और बोली कि राहुल क्या तुम जाग रहे हो? तब में बोला कि नहीं में तो नींद में बड़बड़ा रहा हूँ। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब चाची समझ चुकी थी कि में क्या चाहता हूँ? चाची से रहा नहीं गया, तब उसने पूछा कि अच्छा तो शायद उस दिन भी तुम नींद में मुझे नहाते हुए देख रहे थे शायद। तब मैंने कहा कि हाँ। अब चाची मुझसे पूछने लगी और क्या-क्या करना चाहते हो नींद में? तब में बोला कि बहुत कुछ। तभी चाची धीरे से मेरे में पास आई और बोली कि चल एक तरफ होकर सो जा, में आज तेरे साथ तेरे बिस्तर पर सोऊँगी। अब चाची मेरे बिस्तर पर आ गई, मुझसे सटकर पड़ी थी और बोली कि बेटा तेरे चाचा नहीं है तो मुझे नींद भी नहीं आती है में क्या करूँ? तब मैंने कहा कि चाचा नहीं है तो क्या हुआ? में तो हूँ। अब चाची बोली कि अरे तू तो मेरा भांजा है। तब मैंने बोला कि तो क्या हुआ? जो चाचा कर सकता है क्या में नहीं कर सकता? अब चाची जोश में आ गई और झट से मेरे लंड पर अपना एक हाथ फैरने लगी और बोली कि सच क्या तू मेरी आग को बुझाएगा? फिर मैंने भी चाची की नाइटी को ऊपर उठाया और उनकी चूत पर अपना एक हाथ फैरने लगा और बोला कि एक बार तुम आजमाकर तो देखो उसके बाद तुम चाचा को छोड़कर मेरे साथ सोने के लिए तरस जाओगी। तभी चाची ने खुश होकर जोश के साथ झट से मेरे पजामे का नाड़ा खोल दिया और मेरी अंडरवियर के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया और वो मेरे लंड को सहलाने लगी थी।

अब मैंने चाची की नाइटी को उतार दिया और मेरा शक सही था, उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी और अब चाची भी जोश में आ चुकी थी। फिर उसने मेरे सारे कपड़ों को उतार दिया और फिर उस समय हम दोनों ही बड़े जोश में थे। अब मेरा एक हाथ चाची की जाँघ पर था और उसकी जाँघ मेरी जाँघ पर थी, में उसकी जाँघ को पीछे से सहला रहा था और मेरा लंड उसकी चूत पर रगड़ रहा था। अब मेरा दूसरा हाथ उसके रेशमी बालों में था और उसके मुँह में मेरा मुँह था। अब मेरी जीभ उसकी जीभ को सहला रही थी मैंने उसको कहा आहह चाची तुम बहुत सेक्सी हो, चाची तुम्हारे यह रेशमी लटकते बाल मुझे पागल बना देते है, प्लीज इन्हें ऐसे ही रखना काटना मत। फिर चाची भी मेरे मुँह में मुँह डाले मुझे चूम रही थी और में उसके मोटे-मोटे बूब्स को दबा रहा था, आहह मुझे क्या मस्त मज़ा आ रहा था? वो सच में बहुत हॉट थी। अब मेरा लंड उसकी चूत पर घिस रहा था, मैंने चाची से पूछा कि चाची क्या में आपकी चूत को चाट सकता हूँ? तब चाची बोली कि बेटा वो आज से तेरी ही है हाँ चाट ले। फिर मैंने चाची को नीचे लेटाया और उसके दोनों पैरों को फैला दिया, मैंने देखा कि उसकी चूत थोड़ी सी गीली हो चुकी थी, उसकी झाटे बढ़ी हुई थी।

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फिर मैंने झट से मेरी जीभ को उसकी चूत पर फैर दिया और चाची ने जीभ की गरमी को पाकर आह भरी, क्योंकि चाची यह सब करवाने के लिए दो-तीन दिन से बहुत तरस रही थी। फिर में उसकी चूत को चाटने लगा और में अपनी जीभ से उसकी चूत के होंठो को फैलाने के साथ चूस भी रहा था उम्म् उसका बड़ा ही नमकीन स्वाद टेस्ट था आहह। फिर मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत के दाने को छेड़ा और उसको मेरी जीभ से चाटने लगा था। तब वो कसमसा गई और बोली कि राहुल यह क्या कर रहे हो? क्या तुम मुझे मार ही डालोगे? अब उसकी अवाजों से मेरे अंदर और भी ज्यादा जोश भर रहा था। फिर मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत के छेद में डाल दिया और अंदर बाहर करने लगा था जिसकी वजह से वो और भी पागल हो गई, उम्म्म मेरी चाची उस समय क्या मस्त सेक्सी थी? अब में पागल हो गया था और फिर मैंने उसको पूछा चाची क्या तुम मुझसे चुदवाओगी? तभी चाची बोली कि चाचा जब तक नहीं आते, तब तक तो रोज तुम्ही से अपनी चुदाई करवाऊँगी और उसके बाद तुम्हे मुझे घर के बाहर होटल में ले जाकर चोदना पड़ेगा।

अब में वो सभी बातें सुनकर तैयार हो गया और फिर अपनी जीभ को उसकी चूत के दाने के ऊपर फैर दिया और फिर उसको पूछा कि चाची मेरा लंड टाईट हो गया है क्या में इसको डाल दूँ अंदर? तब चाची बोली कि साले खुद का हो गया तो अंदर डालने लगा, चल उसको मेरे मुँह में दे। फिर मैंने कहा कि मुझे लगा कि आपको शायद पसंद नहीं आएगा, इसलिए मैंने पूछा नहीं था। अब मेरा लंड देखकर चाची पागल हो गई और बोली क्या रे क्या है यह? तू इसकी क्या रोज मालिश करता है? शायद आज इस चुदाई के समय मेरी चूत के अंदर से दोबारा कुंवारी लड़की तरह खून निकलेगा। फिर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और पागलों की तरह चूसने लगी और बोली कि उम्म्म्म क्या रे? कहाँ छुपाया था इसको तूने इतने दिन से? उम्म्म्म आहह। फिर बहुत देर तक मेरा लंड चूसने के बाद में बोला कि चाची बाहर निकाल दो, मेरा झड़ने वाला है। तब चाची बोली कि इसे मेरे मुँह में ही झड़ा दे, वो मेरा लंड छोड़ने को तैयार नहीं थी और कुछ देर बाद मेरा लंड चाची के मुँह में ही झड़ गया, आहह अब में तो पागल हो गया था। अब चाची के वो गुलाबी होंठ, उसका चेहरा, मेरे वीर्य से भरा हुआ था और फिर उसने मुझे नीचे लेटाया और उसकी चूत को मेरे मुँह के ऊपर फैरने लगी थी।

अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और उसका पानी मेरी जीभ को लग रहा था आहह जिसकी वजह से में पागल हो उठा था। फिर में चाची से बोला कि बस अब नहीं रहा जा रहा है, मुझे अंदर डालने दो। तब चाची बोली कि आजा राजा मेरे ऊपर आजा और तेरा पूरा ज़ोर निकाल दे अपनी चाची के ऊपर और फिर जब वो मेरे नीचे आ गई, तब उसके बाल मेरे पेट के ऊपर सट गये जिसकी वजह से मेरे शरीर में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी थी। अब में चाची से बोला कि वो अपने बालों को मेरे शरीर के ऊपर धीरे-धीरे फैरे और फिर में चाची के नीचे आ गया। अब चाची उसके काले लंबे घने रेशमी बाल मेरे शरीर के ऊपर फैरने लगी थी, पहले मेरे मुँह पर, फिर छाती पर, फिर पेट पर, फिर लंड पर और अब में तो पागल हो रहा था। फिर मैंने झट से चाची को पकड़कर नीचे ले लिया और बोला कि बस अब मुझे अंदर लो चाची। अब चाची ने मेरा लंड अपनी चूत पर सेट किया और बोली कि चल राजा डाल दे इसको अंदर, तेरे लंड को मेरी चूत के घर की जरूरत है। फिर जैसे ही मेरे लंड का टोपा अंदर गया, वो चिल्ला उठी आह्ह्ह माँ मर गई ऊऊईईईईईईईईईई धीरे राजा आह्ह्ह। अब में दो मिनट के लिए शांत हो गया और फिर दोबारा अपनी पूरी ताक़त के साथ इतनी ज़ोर से झटका मारा कि चाची की छाती एकदम ऊपर उठ गई और वो चिल्लाई आईईईई माँ।

अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था, चाची बोली कि क्या कर रहे हो? निकाल दो बाहर, क्या तुम मुझे आज मार ही डालोगे क्या? निकालो बाहर मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है, लेकिन मैंने उसकी एक नहीं मानी और उसको बोला कि चुप बैठ साली रंडी चुप बैठ और अब तू थोड़ा सा दर्द सहन कर। फिर कुछ देर बाद तू अपने कूल्हों को उठा उठाकर मज़ा लेगी ही ना? अब चाची कहने लगी कि हाँ रे साले, लेकिन दर्द भी तो बहुत हो रहा है। फिर मैंने बोला कि मेरी प्यारी चाची बस थोड़ा सा ही दर्द होगा, बस हो गया और फिर में पांच मिनट तक ऐसे ही चाची को समझाता रहा और थोड़ी देर के बाद चाची थोड़ी ठंडी हो गई और फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। अब चाची को दर्द हो रहा था और थोड़ी ही देर में चाची जोश में आ गई। अब आह्ह्ह उम्म्म ऊह्ह्ह की आवाज़ों से पूरा समा गूंज उठा था, क्या मस्त मज़ा आ रहा था? में शब्दों में बता नहीं सकता हूँ। अब मेरी चाची और में दोनों ही स्वर्ग में थे, चाची मेरा बहुत अच्छा साथ दे रही थी उम्म्म्म आह्ह्ह्ह राहुल तुम कितने नशीले हो? आहह चोद डाल मुझे फाड़ दे रे मेरी चूत को राहुल आज तू फाड़ दे। अब हम दोनों बहुत जोश में थे और चाची इतने में ही झड़ गई, लेकिन में अभी तक नहीं झड़ा था, में चालू ही था।

फिर करीब दस मिनट के बाद चाची फिर से झड़ गई और कम से कम बीस मिनट तक चोदने के बाद मेरा लंड झड़ने के लिए तैयार हो गया। अब मैंने चाची से पूछा कि चाची में झड़ने वाला हूँ में क्या करूँ? तब चाची बोली कि पूछता क्या है साले? डाल दे तेरा पानी मेरी चूत में और तभी में झड़ गया। अब चाची बोली कि वाह राहुल बहुत गरम मज़ा आया तू मस्त झड़ा है आहह मुझे क्या मस्त आनंद दिया है तूने? उम्म्म्म मुझे बहुत मज़ा दिया है रे तूने अपनी इस चाची को आहह। अब मैंने बोला कि मेरा लंड पूरा गीला हो गया है, चाची बोली कि बाहर निकाल और उसको अपनी चाची के मुँह पर पोंछ दे। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और चाची के मुँह और उसके पूरे बदन पर वीर्य को साफ कर दिया। फिर मैंने उस रात को चाची की तीन बार चुदाई की और अब चाची दूसरे दिन बहुत खुश थी। फिर कम से कम दो सप्ताह तक यह सब रोज रात को चालू था। एक दिन चाचा का फोन आया और चाचा बोला कि शायद उसको अभी और 15 दिन और लग सकते है, चाची वो बात सुनकर खुश हो गई। अब मैंने 15 दिन-रात चाची की चूत को चोद चोदकर उसका भोसड़ा बना दिया था।

फिर 15 दिन के बाद चाचा अनु को अपने साथ लेकर आया, लेकिन उस रात चाचा जब चाची को चोद रहा था, तब चाची उसके झटको को आराम से झेल रही थी और कोई भी सिसकी या चिल्लाना नहीं हुआ था। अब में आज भी चाची को जब भी सही मौका मिलता है तभी उसी जोश के साथ चोदता हूँ, कभी घर में, तो कभी होटल में जाकर ।।

धन्यवाद …

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