छोटे भाई ने कुंवारी चूत की सील तोड़ी

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प्रेषक : मोहिनी …

हैल्लो दोस्तों, में मोहिनी आज आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों की सेवा में अपनी एक सच्ची घटना को लेकर हाजिर हुई हूँ जिसमें मैंने मेरे अपने सगे भाई के साथ मिलकर अपनी चुदाई की भूख को शांत किया और पहली बार यह काम करने के बाद हम दोनों को बड़ा मज़ा आया। उसके बाद का हमारा यह अब हर दिन का यह काम हो गया और हम दोनों ने लगातार ही चुदाई करना शुरू किया जिसकी वजह से हम खुश होकर जब भी हमें मौका मिलता यह काम करते।

दोस्तों यह घटना बहुत पुरानी है, जब में उस समय 20 साल की थी और मेरा छोटा भाई जिसका नाम मोहन है वो 18 साल का था, जब में 19 साल की थी तब हम दोनों भाई बहन ने एक धर्मशाला में चोरी छिपे एक चुदाई का खेल पहली बार अपनी आखों से देखा, जिसको देखकर हम दोनों की हालत बहुत बुरी हो गई, क्योंकि हम दोनों को इससे पहले बिल्कुल भी पता नहीं था कि यह चुदाई क्या होती है, इसको कैसे किया जाता है और इसमे कितना मज़ा आता है? उस दिन हम दोनों ने देखा कि धर्मशाला में एक चारपाई हमेशा रखी रहती थी, उसी पर एक लड़की लेटी हुई थी और उसके ऊपर एक आदमी उल्टा लेटा हुआ था और वो उस लड़की पर ऊपर से ही बड़ा जोरदार दबाव बना रहा था और वो उसको बड़ी तेज़ी से झटके भी मार रहा था, जिसको देखकर हम दोनों को बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था, क्योंकि यह हम दोनों का पहला अनुभव था इसलिए हम बड़े चकित होकर अपनी आखें फाड़ फाड़कर देख रहे थे।

फिर मैंने देखा कि अचानक से वो आदमी रुक गया और उसने उस लड़के के बूब्स को अपने दोनों हाथों से सहलाना ज़ोर लगाकर दबाना शुरू किया, जिसकी वजह से उसके मुहं से सिसकियों की आवाज आने लगी। यह काम कुछ देर करने के बाद उसने दोबारा वैसे ही धक्के उसको दोबारा देने शुरू किए और उन दोनों को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे उनको इस काम को करने में मेहनत तो बहुत करती पड़ी, लेकिन उनको मज़ा भी बहुत आ रहा था, इसलिए उस लड़की का चेहरा पसीने से भीगा होने के बाद भी संतुष्टि से खिल चुका था, वो बहुत खुश नजर आ रही थी, क्योंकि कुछ देर वो भी अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर उस आदमी को कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया, लेकिन फिर भी उसने धक्के देना कम नहीं किया। तभी एक औरत ने अचानक से बीच में आकर उस आदमी को धमकाना ज़ोर ज़ोर से चिल्लाना शुरू किया। तब वो आदमी उस लड़की के ऊपर से उठ गया और उसी समय हम दोनों को उस आदमी का लंड नजर आ गया, वो उस लड़की की चूत से बाहर निकलकर बिल्कुल चिकना होकर तनकर खड़ा हुआ था। फिर उसके बाद हमे उस लड़की की चूत भी नजर आने लगी और वो लंड के बाहर निकलने के बाद भी फड़फड़ा रही थी। उससे चूत रस बहकर बाहर रिस रहा था जो जांघो तक पहुंच रहा था। अब मैंने उस तरफ से अपने ध्यान को हटाकर तुरंत ही अपने पास खड़े मोहन का लंड बाहर निकालकर देखा और पाया कि वो आकार में बहुत छोटा था और उसके आसपास बाल भी नहीं थे। उसके बाद मैंने अपनी चूत को देखा, वहां भी बाल नहीं थे और उसी समय मैंने मोहन का लंड अपने एक हाथ से पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ना शुरू किया। ऐसा करने से हम दोनों को बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर कुछ देर यह काम करने के बाद हम दोनों भी सभी की नजर बचाकर अपने घर आ गए और हम दोनों के कमरे में बंद होकर अकेले में एक दूसरे के लंड और चूत को बड़े ध्यान से देखकर उनके साथ खेलना शरु किया। दोस्तों उस दिन के एक साल के बाद में और मेरा भाई मोहन किसी काम की वजह से दिल्ली गये हुए थे। में लाल किला, इंडिया गेट देखना चाहती थी, इसलिए हम दोनों चल पड़े। अब में और मोहन एक लोकल बस में खड़े होकर सफर कर रहे थे, उसमे भीड़ कुछ ज्यादा ही थी इसलिए हम दोनों को बड़े धक्के लग रहे थे। उस समय मेरे पीछे की तरफ मोहन खड़ा हुआ था और ज्यादा भीड़ होने की वजह से मोहन मेरी पीठ से एकदम चिपका हुआ था और थोड़ी ही देर के बाद मेरी गांड पर मोहन का लंड चुभने लगा और पीछे से धक्का लगने की वजह से मोहन का लंड मेरी गांड में ठीक जगह पर सेट होकर घुसने लगा था। मुझे उसके धक्के खाने में बड़ा मज़ा आ रहा था, लेकिन कुछ देर बाद हमारे उतरने की जगह आ गई तो हम दोनों उस बस से नीचे उतरकर लाल किले में घूमने चले गए। कुछ देर देखने घूमने के बाद मुझे बड़ी ज़ोर से पेशाब आने लगा, जिसको ज्यादा देर रोक पाना मेरे लिए बड़ा मुश्किल था इसलिए मैंने मोहन से कहा कि मुझे पेशाब करना है, में बड़ी देर से रोक रही हूँ लेकिन अब नहीं रुकता, जल्दी से कुछ करो वरना यह अब किसी भी समय निकल जाएगा। फिर वो मुझसे बोला कि हाँ मुझे भी पेशाब तो आ रहा है और फिर हम दोनों पास ही एक एकांत जगह पर चले गये जहाँ आसपास कोई भी हमें नजर नहीं आ रहा था उसी जगह हम दोनों ने पेशाब किया। फिर पेशाब करने के बाद हम दोनों ने वहीं कुछ दूरी पर छोटे पेड़ झाड़ियों के पीछे एक लड़का लड़की को बाहों में लिपटकर एक दूसरे को चूमते हुए देखा, उसी समय में मोहन से बोली कि तू उधर क्या ऐसे घूरकर देखता है? तब मोहन बोला कि देखो वो लड़का उस लड़की को कैसे पागलों की तरह चूम रहा है और तुम देखो उसका एक हाथ कहाँ है, दिख नहीं रहा? तो मैंने मोहन को बताया कि उस लड़के का एक हाथ उस समय लड़की की चूत पर है वो अपने हाथ से देखो उसकी चूत को सहला रहा है।

दोस्तों उस समय मोहन मेरे एकदम पास ही सटकर खड़ा हुआ था और मैंने देखा कि मोहन का लंड अब वो सभी काम देखकर धीरे धीरे खड़ा हो चुका था। फिर तुरंत ही मैंने उसके लंड को अपना एक हाथ लगाकर महसूस किया कि वो बहुत कड़क हो चुका था। अब मोहन थोड़ा चकित होकर मुझसे बोला दीदी आप यह क्या कर रही हो? तब मैंने उससे कहा कि जो वो लड़का उस लड़की के साथ कर रहा है तुम भी अब मेरे साथ ठीक वैसा ही करो, हमें बड़ा मज़ा आएगा। अब मोहन मेरे साथ एकदम चिपक गया और उसके बाद हम दोनों ने आपस में चूमना शुरू किया। उसी के साथ मोहन ने मेरी चूत पर कपड़ो के ऊपर ही अपने एक हाथ को रखकर सहलाना शुरू किया, जिसकी वजह से मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था और हम दोनों ही मस्ती के सागर में गोते लगा रहे थे। वो मुझे चूमते हुए एक हाथ से मेरी चूत और अपने दूसरे हाथ से मेरे बूब्स को दबाने के साथ साथ सहला रहा था। फिर कुछ देर बाद हम अपना काम अधूरा छोड़कर उसी शाम को वापस अपने घर आ गये। हम दोनों के चेहरे खुशी से चमक रहे थे। फिर रात को खाना खा लेने के बाद हम दोनों छत पर चले गये।

दोस्तों वो रात बड़ी काली थी इसलिए ऊपर छत पर बहुत अंधेरा था। हमें आसपास का कुछ भी नजर नहीं आ रहा था और उस मौके का फायदा उठाकर मैंने उसी समय अपने सारे कपड़े उतार दिए और झट से मोहन का एक हाथ अपने हाथ से पकड़कर अपनी छाती पर रख दिया, जिसके बाद वो मेरा इशारा समझकर तुरंत ही मेरे बूब्स को मसलने लगा। वो बहुत जोश में आ चुका था और अब मैंने उससे कहा कि वो भी अपने कपड़े उतार दे और उसने ठीक वैसा ही किया, जिसकी वजह से अब हम दोनों ही पूरे नंगे हो चुके थे और पागलों की तरह हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। अब मोहन मुझसे पूछने लगा दीदी मेरा लंड अब तन गया है, क्या अब में इसको आपकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दूँ? देखो यह कैसे तनकर झटके देकर मुझे दर्द दे रहा है जो अब मुझसे सहा नहीं जाता। फिर मैंने तुरंत ही उसको हाँ कह दिया और में वहीं पर नीचे अपने दोनों पैरों को पूरा खोलकर लेट गई, जिसकी वजह से उसके सामने अब मेरी गीली जोश से भरी हुई कामुक चूत पूरी तरह से खुलकर फड़फड़ाने लगी और वो मेरे ऊपर लेट गया उसने अपना लंड मेरी चूत के मुहं पर रख दिया और उसके बाद उसके अपना पूरा दम लगाकर लंड को जबरदस्ती अंदर डालना शुरू किया और वो धक्के मारने लगा। दोस्तों मेरी यह पहली चुदाई और चूत एकदम कुंवारी थी, इसलिए वो बहुत टाईट होने के साथ साथ सील बंद थी, जिसमें उसका लंड कैसे अंदर जाता? लंड को अंदर डालने के लिए उसने अपना पूरा ज़ोर लगाया और उसने बड़ा तेज धक्का मारा जिसकी वजह से उसके लंड का टोपा मेरी चूत के अंदर जा पहुंचा और मेरी चूत में बड़ा तेज अजीब सा दर्द होने लगा और में अब कुछ भी बड़बड़ा रही थी, उससे में कहने लगी कि साले बहनचोद तूने आज मेरी कुंवारी चूत की सील को तोड़ दिया, देख में कितना दर्द से तड़प रही हूँ।

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अब मोहन मुझसे बोल रहा था दीदी अब तुम मुझे टोको मत, चुपचाप मेरे नीचे पड़ी रहो और आज तो में तुम्हे चोदकर तुम्हारी इस चूत की प्यास को बुझा दूंगा और चूत के बाद में आज तुम्हारी गांड को भी अपना लंड डालकर ऐसे ही धक्के मारकर मस्त मज़े दूंगा, जो तुम्हे हमेशा याद रहेगा। अब में अपनी गांड को अपने एक हाथ से सहला रही थी और उसके बाद में उससे कहने लगी कि साले बहनचोद आ जा आज तू अपनी बहन की चूत को पहले अच्छे से चोद ले, ज्यादा बातें मत कर मादारचोद, पहले तू मेरी चूत को ठंडा कर और उसके बाद तू मेरी गांड में भी अपने लंड को डालकर उसके भी मज़े ले लेना। अब उस बहनचोद मोहन ने अपनी छिनाल बहन की कुंवारी चूत में अपना सनसनाता हुआ पूरा लंड अंदर डाल दिया जिसकी वजह से अब हम दोनों को बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था। फिर करीब तीस मिनट तक वो मेरी चूत को वैसे ही धक्के देकर मेरी चुदाई करता रहा।

फिर कुछ देर वैसे ही तेज दमदार धक्के देने के बाद उसके लंड ने चूत के अंदर ही अपना वीर्य निकाल दिया और मैंने भी पेशाब कर दिया, जिसकी वजह से वीर्य और मेरा पेशाब दोनों ही बहकर बाहर आने लगे। उसके बाद हम दोनों आपस में चिपक गये और मोहन मेर्रे बूब्स के निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा और थोड़ी देर बाद मोहन मुझसे कहने लगा कि साली मेरी रंडी दीदी आज मैंने तेरी चूत की चुदाई का मज़ा ले लिया है। अब हम जब भी अकेले होंगे तब हम भाई बहन नहीं पति-पत्नी होंगे। अब मैंने मोहन से कहा कि हाँ ठीक है भैया आज से तुम मेरे पति हो तुम जैसा चाहोगे में वैसा ही करूंगी और फिर मोहन ने मेरे मुहं से यह बात सुनकर कुछ देर बाद दोबारा अपने लंड को खड़ा करके मेरी गांड मारी जिसकी वजह से मुझे बहुत दर्द हुआ, लेकिन मज़ा भी बहुत आया और सारी रात हम दोनों ने कई बार चुदाई के वैसे ही मज़े लिए, जिससे हम दोनों का जोश उस खेल को खेलने में पहले से ज्यादा बढ़ने लगा था, इसलिए हम लगातार चुदाई का खेल खेलने लगे और अब हम दोनों रोज रात को या दिन भी जब कभी हमे अकेले में मौका मिलता तो आपस में एक दूसरे को गरम करके मस्त चुदाई करते और हमने निरोध का इस्तेमाल कभी नहीं किया था, इसलिए एक महीने बाद जब मेरी महावारी अपने समय से नहीं आई तब में बड़ी घबरा गई और यह बात मैंने अपने भाई को बताई। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर दूसरे दिन मेरा भाई मोहन मुझे अपने एक बहुत पक्के दोस्त की बहन के पास ले गया वो किसी हॉस्पिटल में नर्स का काम करती थी, इसलिए उसको इन काम का बहुत अच्छा अनुभव था इसलिए उसने मेरी सफाई तो कर दी, लेकिन वो अब मुझसे पूछने लगी क्यों आजकल तुम किसके लंड से अपनी चुदाई करवा रही हो? लगता वो लंड बड़ा दमदार है देखो उसने तुम्हारी चूत को चोद चोदकर इसका क्या हाल कर दिया है दिखने में यह कोई चूत कम भोसड़ा ज्यादा नजर आ रही है। फिर मैंने भी मुस्कुराते हुए उससे कह दिया कि में आजकल मोहन से अपनी चुदाई करवाती हूँ। मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो बड़ी चकित होकर कहने लगी, लेकिन मोहन का लंड तो अभी बहुत छोटा होगा वो तुम्हारी चूत का ऐसा हाल कैसे कर सकता है? अब मैंने उसकी बातों से खुश होकर उसको असली चीज दिखने के लिए उसी समय मोहन को आवाज देकर अंदर बुला लिया, वो नर्स उषा जिसकी उम्र अभी 22 साल थी, उसने मोहन के अंदर आते ही तुरंत ही उसका लंड पकड़कर वो उससे बोली साले बहनचोद तूने अपनी सग़ी बहन को ही चोदकर उसको माँ बना दिया है मादरचोद तुझे अपनी इस बहन की ही चुदाई करनी थी, तो साले तुझे अपने लंड पर निरोध तो लगा लेना चाहिए था, उसके बाद तुम दोनों की जो मर्जी पड़े तुम वही सब करते, तुम्हे मना करने वाला देखने वाला कौन था? अब मोहन उससे बोला कि बहन जी बस यही हम दोनों से एक बहुत बड़ी ग़लती हो गई, वैसे यह सब हमारी नासमझी और नादानी की वजह से हुआ, क्योंकि मेरा चोदना और मेरी दीदी का मुझसे चुदवाना सब कुछ पहली बार था और उसके मज़े में हम इतने खो गए कि हमने आगे आने वाली इस मुसीबत के बारे में इतना कुछ नहीं सोचा था। फिर उषा थोड़ा गुस्से में उससे बोली कि साले तू मुझे बहन कहता है और मेरी चूत को एक बार भी हाथ नहीं लगता बहनचोद अब तू मेरी चूत को भी चोद मुझे भी तेरे इस लंड की ताकत यह जोश दिखा। मुझे भी तो चले तू बस बातें ही करता है या काम भी अच्छा कर सकता है और फिर उषा दीदी ने हम दोनों को उसी दिन वहीं पर सिखाया और समझाया कि एक सुरक्षित चुदाई कैसे की जाती है? हम उनसे वो सभी बातें सीखकर अपना काम खत्म होने के बाद वापस अपने घर चले आए।

फिर एक दिन उषा दीदी ने हम दोनों को अपने घर बुला लिया और जब हम उनके घर पहुंचे तब वो अपने घर में बिल्कुल अकेली थी। हम दोनों को अपने घर के अंदर लेते ही उन्होंने दरवाजा बंद किया और उसी समय उसने मेरे भाई मोहन का लंड अपने एक हाथ में पकड़कर उससे कहा कि चल आज तू मुझे अपने इस लंड के जलवे दिखा, इतना कहकर पहले उन्होंने तुरंत नीचे बैठकर लंड को पेंट से बाहर निकालकर उसको चूसकर खड़ा किया। उसके बाद अपने कपड़ो के साथ साथ मोहन को भी पूरा नंगा करके चुदाई का खेल खेलना शुरू किया, वो झट से लंड के खड़े होते ही नीचे लेट गई और मोहन को अपने ऊपर लेकर लंड को अपने एक हाथ से पकड़कर चूत के मुहं पर सेट किया।

फिर मोहन भी फिर क्यों पीछे हटता, उसने एक ही जोरदार धक्का देकर अपना पूरा लंड चूत की गहराइयों में डालकर तेज धक्के देने शुरू किए। अब वो मेरे सामने ही मोहन से अपनी चूत की चुदाई करवाने लगी। फिर में कुछ देर देखने के बाद कमरे से बाहर आ गई, लेकिन तभी उषा दीदी का भाई जिसका नाम दीपक था, जिसकी उम्र करीब 19 साल थी वो अचानक जाने कहाँ से आ गया और उसने अपनी उषा दीदी को मोहन के लंड से से चुदाई के मज़े लेते हुए देख लिया। फिर कुछ देर उनका वो खेल अपनी चकित आखों से देखने के बाद उसका लंड भी तनकर खड़ा हो गया। शायद अब उसका भी मन चुदाई करने का होने लगा था। में उसके मन की बात को तुरंत समझ गई, इसलिए मैंने उसको झट से पकड़ लिया और में उसको अपने साथ दूसरे कमरे में लेकर चली गई। वहां पर मैंने दीपक से अपनी चूत को चुदवाने का काम किया।

दोस्तों मुझे दीपक के साथ चुदाई करवाने में भी बहुत मज़ा आ रहा था क्योंकि उसका लंड मेरे भाई के लंड से आकार में लंबा होने के साथ साथ मोटा भी था और वो मुझे बहुत जोश में आकर तेज धक्के देता हुआ चोद रहा था, जिसकी वजह से में एक बार झड़ भी चुकी थी, लेकिन उसका जोश अब भी वैसा ही था। फिर कुछ देर धक्के देने के बाद वो भी झड़ गया और उसने तुरंत ही अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकालकर अपना पूरा वीर्य मेरे बदन पर निकाल दिया। उसके बाद भी वो मेरे बूब्स को दबाकर उसका रस निचोड़कर मेरी गीली चूत में अपनी एक उगली को डालकर कुछ टटोल रहा था। में वैसे ही अपनी दोनों आखों को बंद करके उसके सामने लेटी रही। तभी उसी समय वहां पर उषा दीदी आ गई और वो अब भी नंगी ही थी। उसने साथ मोहन भी था और उसने भी कपड़े नहीं पहने थे। अब उषा दीदी हंसती हुई अपने भाई से कहने लगी कि वाह साले दीपक बहनचोद, मोहन ने आज तेरी बहन की चूत को चोदा तो तूने भी मोहन की बहन को भी चोद डाला, क्या तेरा मेरी चुदाई करके मन नहीं भरा जो तू इसकी चूत के भी पीछे पड़ गया।

दोस्तों उस समय उस एक कमरे में हम चारो बहन भाई एकदम नंगे खड़े थे और फिर दीपक ने अपनी बहन उषा दीदी को भी पकड़कर हमारे सामने चोदना शुरू किया। हम दोनों भाई बहन खड़े खड़े उनका तमाशा देखने लगे। फिर कुछ देर बाद उषा दीदी मुझसे कहने लगी कि यह दीपक तो पक्का बहनचोद है यह पिछले चार सालो से मेरी चूत को चोद रहा है, क्योंकि इस घर के अंदर हम दोनों भाई, बहन के अलावा और कोई नहीं रहता इसलिए दीपक और में चार सालो से घर के अंदर हमेशा पूरे नंगे ही रहते है हम दोनों साथ में नहाते है और रात दिन एक ही बेड पर नंगे ही एक दूसरे से चिपककर सोते है और हर रात को जब तक दीपक मेरे बूब्स को नहीं पी लेता और अपने लंड से दो बार मेरी चूत की जमकर चुदाई नहीं कर लेता तब तक हम दोनों को नींद नहीं आती। दोस्तों हम दोनों को यह बातें बताते हुए ही उन दोनों ने अपनी चुदाई का काम खत्म किया और तब तक हम दोनों भी दोबारा जोश में आ चुके थे। मैंने नीचे बैठकर अब मोहन का लंड अपने मुहं में लेकर चूसना शुरू किया और कुछ देर चूसने के बाद उसने मेरी चूत पर चड़ाई करने का विचार बनाकर मुझे अपने सामने घोड़ी बनाकर एक ही जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड अंदर डालकर मुझे जोश में आकर तेज धक्के देकर चोदना शुरू किया।

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फिर उसी समय दीपक ने भी अपनी जगह बनाकर मेरे नीचे घुसकर मेरे बड़े आकार के झूलते हुए बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसना दबाना शुरू किया और उषा दीदी ने नीचे लेटे हुए अपने भाई के लंड को अपने मुहं में लेकर लोलीपोप की तरह चूसना शुरू किया। हम चारों को देखकर लग रहा था कि जैसे हम सब एक ही डोर में बंधे हुए है और जैसे जैसे हम झड़ते गए अलग होते चले गए और हम सभी के चेहरे ख़ुशी और संतुष्टि से चमक उठे थे और उस दिन के बाद हम चारों वैसे ही चुदाई करने लगे थे। कभी लंड पर निरोध लगाकर तो कभी बिना निरोध से हमने चुदाई के बड़े मज़े लिए और जब मेरी महावारी रुक जाती तो उषा दीदी मुझे अपने पास से कोई दवाई दे देती, जिसकी वजह से मेरी वो समस्या खत्म हो जाती और उसके बाद हम दोबारा उसी खेल में लग जाते। ऐसा करने में हम सभी को बड़ा मज़ा आने लगा था। वैसे भी कौन हमे रोकने वाला था। फिर कुछ महीनों के बाद मेरी शादी हो गई और उसके बाद फिर मोहन की भी शादी हो गई। आज में 48 साल की हूँ और मोहन भी 46 साल का है, लेकिन अब भी जब कभी हमे मौका मिलता है तो हम दोनों भाई बहन चुदाई करके अपनी चूत और लंड की प्यास को ठंडा करते हुए अपने वो पुराने दिनों को याद करते हुए मन ही मन बहुत खुश होते है। हमारे इस दूसरे रिश्ते के बारे में हम दोनों के अलावा घर में किसी को कुछ भी पता अभी तक भी नहीं है ।।

धन्यवाद …

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