गंगा घाट पर माँ बेटी का जलवा

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, में पिछले कुछ समय से कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेता आ रहा हूँ और एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों ना में अपनी भी एक सच्ची चुदाई की घटना को लिखकर आप लोगों की सेवा में हाजिर कर दूँ। दोस्तों यह बात तब की है जब में एक बार गंगा नदी के घाट पर नहाने के लिए गया और मैंने देखा कि एक लड़की नहाने के लिए वहां पर अपनी मम्मी के साथ आई। उसकी उम्र करीब 18-19 साल होगी और उसके साथ में उसकी मम्मी भी थी उनकी उम्र करीब 35 साल होगी और दिखने में वो दोनों माँ बेटी गोरी भरे हुए बदन की थी और चेहरे से देखने पर वो मध्यमवर्गीय परिवार की नजर आ रही थी। फिर कुछ देर बाद मैंने देखा कि अब वो दोनों माँ बेटी नहाने के लिए अपने कपड़े उतारने लगी थी और मेरे देखते ही देखते उन दोनों ने अपने कपड़े उतारकर पेटीकोट को अपने बूब्स तक ऊँचा बांध लिया। दोस्तों वहां पर में गया तो नहाने था, लेकिन उन दोनों को देखकर मेरा मन बिल्कुल खराब हो गया इसलिए में अपनी गंदी नजर से उनको देखते हुए नहाने के लिए रुक गया और अब में उन दोनों को लगातार घूरकर देखने लगा।

फिर कुछ देर बाद वो दोनों माँ, बेटी घाट पर नीचे गई और नहाने लगी वो दोनों अब तक पानी में उतरकर नहाने का बड़ा मस्त मज़ा ले रही थी। फिर मैंने देखा कि अब उन दोनों माँ, बेटी के उभरे हुए बूब्स और गोरी छाती भी मुझे साफ साफ दिखाई दे रही थी और साथ में उनके उभरे हुए कूल्हे और चूत का आकार भी उनके कपड़े पूरे गीले होने की वजह से मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था और अब इतना सब देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मेरा लंड अब तनकर खड़ा हो चुका था, इसलिए में टकटकी लगाकर उन दोनों को देखने लगा था, इतने में उस लड़की की माँ की नज़र मेरे ऊपर पड़ी और मुझे देखकर वो हंसने लगी थी। फिर यह हंसी देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने भी उसी समय बिना देर किए अपने कपड़े उतारे और में नहाने के लिए पानी में उतर गया, लेकिन में उन दोनों से थोड़ा दूरी पर नहा रहा था और मेरी नजर तब भी उनके ऊपर ही थी। धीरे धीरे में मौका देखकर आगे बढ़ते हुए उनके बिल्कुल पास ही आ गया और फिर मैंने चुपके से लड़की के पैर से पैर लगा दिया और अब मुझे एकदम से बहुत ही मस्त मुलायम अहसास हुआ जिसकी वजह से मेरा पूरा शरीर उस इतने ठंडे पानी में भी गरम हो गया और उस लड़की ने ऐसा जताया कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

फिर उसकी तरफ से यह सब देखकर मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई और मैंने इस बार थोड़ी सी ज्यादा हिम्मत करके अगली बार उसकी जांघ पर पानी के अंदर ही अंदर अपने पैर को उसके पैर से छू दिया, लेकिन तब भी वो चुप ही रही। अब तो मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई इसलिए अगली बार मैंने अपने पैर को उसके पेटीकोट के नीचे से आगे बढ़ाते हुए उसकी चूत तक पहुंचा दिया। फिर तब मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूत पर कोई भी बाल नहीं था और चूत बिल्कुल मुलायम एकदम चिकनी मैंने इसी तरह से उसे बार बार पैर लगता रहा और हम दोनों यह सब खेला खेली करते रहे और फिर जब कुछ देर बाद मुझसे रहा नहीं गया तो में पानी के अंदर गर्दन तक डूबकर अपनी एक ऊँगली को मैंने उसके पेटीकोट के अंदर से उसकी गांड में डाल दिया, लेकिन तभी उसने एकदम से अपनी गांड को दबा लिया और इस तरह से गरमा गर्मी करते हुए कुछ देर बाद वो दोनों माँ बेटी नहा ली और दोनों ने बाहर आकर कपड़े बदलने शुरू कर दिए। में नहाते हुए दोनों को देख रहा था।

फिर मैंने देखा कि उसकी माँ जब अपने कपड़े बदल रही थी तो उसने पेटीकोट की डोरी को खोला और उसके बाद अपनी जांघो को सिकोड़ते हुए एकदम से अपना पेटीकोट निकाल दिया और अपने बदन को एक पतले से कपड़े पीछे छुपाने की कोशिश करने लगी तब भी वो अब एकदम नंगी थी, लेकिन मुझे वो साफ साफ दिखाई दे रही थी और यह सब द्रश्य देखकर मेरा लंड एकदम से तन गया उसकी चूत को देखकर मेरा अब बड़ा बुरा हाल था और वैसे कुछ देर पहले उसकी बेटी की चूत में तो मैंने अपनी उंगली को डाला ही था, लेकिन अब उसकी माँ की चूत को देखकर मेरे लंड ने टाइट होकर झटके देने शुरू कर दिए जिसकी वजह से मुझे दर्द होने लगा और अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया। तो मैंने वहीं पानी के अंदर ही अपने एक हाथ से अपने लंड को हिलाकर शांत कर लिए मैंने लंड को मुठ मारना शुरू किया, अपना हाथ जगन्नाथ ऐसा करने से मुझे थोड़ी सी राहत जरुर मिल गई थी, लेकिन अब भी मेरा मन हो रहा था कि किसी भी तरीके से अब मुझे उस लड़की की माँ की चूत एक बार मज़े लेने के लिए मिल जाए तो में उसको जमकर चुदाई के मस्त मज़े देकर पूरी तरह से खुश कर दूंगा और उसकी इतनी मस्त चुदाई करूंगा जिसको वो कभी नहीं भुला सकेगी।

फिर में भी कुछ देर बाद नहाकर पानी से बाहर आ गया और उसके बाद मैंने सही मौका देखकर उस लड़की को अपना फोन नंबर दे दिया और उसने भी बिना नखरा किए मुझसे फोन नंबर ले लिया। उसके बाद वो मेरी तरफ मुस्कुराते हुए अपने एक हाथ को अपनी माँ से चोरी छिपे मुझसे बाय करती हुई चली गई। दोस्तों वैसे में दिल्ली का रहने वाला हूँ तो में वहाँ से नहाकर खुश होता हुआ वापस दिल्ली लौट आया और उसी रात को दो बार मैंने उस लड़की की माँ की चूत की एक तस्वीर अपने मन में बनाकर दोबारा अपना हाथ जगन्नाथ किया और उसके बाद में थक हारकर सो गया। फिर दो दिन बाद जब में अपने ऑफिस में कुछ काम कर रहा था तो मुझे एक फोन आया, जिसमे बड़ी ही सुरीली आवाज से किसी ने मेरा नाम लिया, हैल्लो क्या आप रोहित बोल रहे हो? मैंने कहा कि हाँ में रोहित ही हूँ, लेकिन आप कौन मैंने आपको ठीक तरह से पहचाना नहीं? तब वो कहने लगी कि में सीमा बोल रही हूँ, मैंने उससे कहा कि कौन सीमा आप थोड़ा खुलकर बताए? तब उसने कहा कि में वही गंगा नदी के घाट वाली जिसको अपने यह नंबर दिया था। अब तो में उसके मुहं से यह बात सुनकर अंदर ही अंदर ख़ुशी से फूला नहीं समा रहा था, में उससे बात करते हुए चुपचाप ही अपने ऑफिस से बाहर आ गया और फिर में उससे बातें करने लगा तभी उसने मुझे बताया कि वो भी दिल्ली में रोहिणी की रहने वाली है तब तो कुछ ज्यादा ही मुझे ख़ुशी हुई मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।

अब मैंने उससे बातें करते समय उसके घर का पता लिया और कुछ दिनों तक फोन पर उससे मैंने अपनी नजदीकियां बढ़ाई और फिर एक दिन रोहिणी के पास के एक सिनिमा घर में उससे मिलने का वादा लेकर में ठीक समय पर उससे मिलने हंसी ख़ुशी पहुंच गया और वहाँ पर में उससे दूसरी बार मिला। मुझे देखकर वो भी बहुत खुश नजर आ रही थी। अब में उसको अपने साथ लेकर पिज़्ज़ाहट पर पिज़्ज़ा खाने लगा और उससे इधर उधर की बातें हंसी मजाक करने लगा। फिर खाते खाते मैंने सही मौका देखकर अपना एक हाथ उसकी जांघ पर रखकर घुमाने लगा तो वो अपने सर को नीचे झुकाकर चुपचाप बैठी रही और उसकी तरफ से बिल्कुल भी विरोध ना देखकर मैंने हिम्मत करके उसकी मुलायम गरम जांघ को छूकर कुछ देर बाद अपने हाथ को उसकी चूत पर पहुंचाकर उसकी चिकनी चूत को भी महसूस किया। में अपने हाथ को लगातार उसकी जांघ चूत के ऊपर चलाता रहा और वो बैठी हुई मज़े लेती रही। फिर कुछ देर बाद उसका मूड देखकर मैंने उससे कहा कि यह सब तो उस दिन भी हम दोनों के बीच होता रहा और अब तो हमे इसके आगे का काम भी करना चाहिए, वो मज़े भी तो एक बार ले लिए जाए, चलो अब हम किसी होटल के कमरे में चलते है। फिर वो बोली तुम चाहो तो मेरे घर पर चल सकते हो में और मेरी माँ वहाँ पर अकेले ही रहते है और मेरी मम्मी अभी इस समय मेरी मौसी के यहाँ गयी है और वो शाम से पहले नहीं आएँगी। फिर में उसकी यह बात सुनकर एकदम खुश हो गया और उसी समय उसकी मम्मी की चूत मेरी आखों के सामने आ गई और में उसकी मम्मी की चूत के बारें में सोचता हुआ उसके साथ गाड़ी में बैठकर उसके घर तक पहुंच गया।

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दोस्तों उस समय दोपहर के करीब एक बजे थे और गरमी के दिन थे, इसलिए बाहर कोई भी नहीं था। इसलिए मुझे उसके साथ अंदर जाने में कोई भी समस्या नहीं हुई और जैसे ही में अंदर पहुंचा तो मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तुरंत ही सीमा को पकड़कर अपनी बाहों में जकड़ लिया। में उसकी गर्दन गालो को चूमने लगा तो वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगी कि अच्छा तो आप इसलिए यहाँ पर आए हो, लेकिन आप थोड़ा सा सब्र तो करो मुझे कुण्डी तो लगाने दो, अब मैंने कहा अच्छा तो ठीक है लगा लो तुम कुण्डी और अब उसने सही तरह से कुण्डी भी नहीं लगाई नहीं थी। फिर मैंने उसको दोबारा पकड़कर अपनी गोद में उठा लिया और फिर में पास ही बेड पर उसको अपने साथ लेकर लेट गया। उसकी उम्र भी अभी कुछ कम थी और वो कुंवारी कली थी। ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था इसलिए वो कुछ देर में ही एकदम गरम हो चुकी थी। फिर मैंने सबसे पहले उसके सूट के ऊपर से ही उसके बूब्स को दबाने लगा और तब मैंने पहली बार छूकर महसूस किया कि उसके बूब्स तो मेरी सोच से भी कहीं ज़्यादा मोटे एकदम मुलायम थे और थोड़ी देर तक बूब्स को दबाकर उनके मज़े लेने बाद मैंने उसके सूट के बड़े गले में अपने एक हाथ को डालकर उसके बूब्स को पकड़ लिया।

दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि उसका एक बूब्स मेरे एक हाथ में भी नहीं आ रहा था और उसके दोनों बूब्स का आकार बहुत बड़ा और वो एकदम रुई की तरह मुलायम थे, जिसको छूकर मुझे बड़ा आनंद मिला, लेकिन अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। फिर मैंने उसके दोनों हाथों को ऊपर करवाया और फिर बिना देर किए उसका सूट उतार दिया। तब मैंने देखा कि नीचे उसने ब्रा पहन रखी थी और उसके बड़ा मैंने ज्यादा देर नहीं लगाई और उसकी ब्रा को एकदम से एक जोरदार झटका देकर पकड़कर खींच दिया। मेरे ऐसा करने से उसकी ब्रा के हुक टूट गए और वो अब मुझसे कहने लगी कि आप तो ऐसे कर रहे है जैसे में कहीं भागकर जा रही हूँ। देखो अपने मेरी इस ब्रा को बेकार कर दिया, यह अब किसी भी काम की नहीं है। फिर मैंने उसकी बातों की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया और अब में जोश में आकर उसके बूब्स को दबाने लगा।

दोस्तों मैंने इससे पहले कभी किसी की साथ नहीं किया था और यह सब पहली बार था, इसलिए में बस पागलों की तरह उसके बूब्स को दबाए ही जा रहा था और वो मेरे साथ मस्त हुई जा रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसका नाड़ा भी खोल दिया और मैंने उसकी पूरी सलवार को एक झटके में ही उतार दिया और तब मैंने देखा कि सलवार के नीचे उसने कुछ नहीं पहना था, जिसकी वजह से अब उसकी वो कामुक नंगी एकदम चिकनी चूत ठीक मेरे सामने थी। दोस्तों मुझसे उसकी बिना बाल की चूत को देखकर रहा नहीं जा रहा था, क्योंकि वो एकदम गोरी उभरी हुई थी जिसको देखकर मेरी नियत खराब हो चुकी थी और में अपनी ललचाई हुई नजर से कुछ देर उसको देखता रहा और उसके बाद मैंने एकदम से उसकी चूत में अपनी एक उंगली को डाल दिया जो उसकी गीली रसभरी चूत में एकदम से फिसलती हुई चली गयी। उसके बाद में अपनी ऊँगली को अंदर बाहर करने के बाद मैंने अपनी दूसरी ऊँगली को भी पहले वाली के साथ ही चूत के अंदर डालने की में कोशिश करने लगा, लेकिन तब मैंने महसूस किया कि दो उँगलियाँ एक साथ अंदर नहीं जा रही थी।

अब मेरे मन में एक बात आने लगी कि कहीं यह मेरे लंड को जबरदस्ती अपनी चूत में लेकर बेहोश ना हो जाए और कहीं मुझे लेने के देने ना पड़ जाए, लेकिन दोस्तों आप लोग भी बहुत अच्छी तरह से जानते है कि एक बार खड़ा लंड कहाँ कुछ देखता है? तो मैंने इधर उधर देखा, लेकिन मुझे कहीं तेल नहीं दिखाई दिया और उससे मैंने पूछना भी ठीक नहीं समझा, क्योंकि में नहीं चाहता था कि वो जो कि अब तक इतना गरम हो चुकी थी उसका ध्यान कहीं और चला जाए। अब जब उसकी चूत का रास्ता आरामदायक चिकना बनाने का मुझे कोई भी रास्ता नहीं दिखा। फिर मैंने अपनी जीभ से ही आगे का काम चलाने की बात अपने मन में सोची और में बता दूँ कि उससे पहले कभी भी मैंने किसी की चूत नहीं चाटी थी क्योंकि मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था क्योंकि वहीं से पेशाब बाहर आता है और उसी जगह को अपनी जीभ से चाटा ज़ाए, लेकिन मैंने फिर थोड़ी सी हिम्मत करके उसकी चूत में अपनी जीभ को लगा दिया। तो मुझे एक बार बड़ा अजीब सा लगा और थोड़ी सी घिन्न आ रही थी, लेकिन फिर मैंने जोश में होने की वजह से हिम्मत करके वो काम करना शुरू किया जिसकी वजह से मुझे थोड़ा सा नमक जैसे स्वाद आया और अब में पागलों की तरह उसकी चूत को चाटने लगा था। अब में सोच रहा था कि जीभ से उसकी चूत का रास्ता चौड़ा कर दिया जाए जिसकी वजह से लंड बड़े आराम से अंदर चला जाए। फिर मैंने अपने लंड की तरफ देखा तो पाया कि मेरा लंड जोश में आकर एकदम टाइट होने की वजह से मुझे दर्द होना शुरू हो गया था। मेरा लंड करीब करीब 6 या 6.5 इंच का 2 इंच मोटा होगा। फिर मैंने अब तुरंत उसके कूल्हों के नीचे एक तकिया लगा दिया जिसकी वजह से चूत ऊपर उठकर पूरी तरह से खुल गई और फिर मैंने अपने लंड को धीरे से उसकी चूत के होंठो पर लगाकर बड़े आराम से धीरे से धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से मेरे लंड का टोपा थोड़ा सा अंदर चला गया और मुझे खुद भी उसकी टाईट चूत होने की वजह से हल्का सा दर्द हुआ और सीमा का तो उसकी वजह से क्या हाल हुआ होगा आप इस बात का खुद ही अंदाज़ा लगा सकते हो। वो उस दर्द की वजह से मचल गई फड़फड़ाने लगी।

फिर उसके दर्द को देखने के बाद मैंने अपने लंड को वहीं पर वैसे ही रोककर में उसके होंठो को चूमने लगा और कुछ देर बाद सही मौका देखकर मैंने एक दूसरा ज़ोर का अनाड़ी की तरह धक्का लगा दिया तब मेरा लंड अंदर चला गया और में वैसे ही रुक गया, लेकिन अब भी थोड़ा सा बाकी था। अब वो दर्द की वजह से ज़ोर ज़ोर से रोने लगी और उसकी आखों से आंसू बहने लगे थे जिनको देखकर में बहुत घबरा गया, लेकिन मैंने तब भी अपने लंड को बाहर नहीं निकाला और में उसी पोज़िशन में थोड़ा रुक गया और उसको धीरे से प्यार करने लगा और उसके बदन को सहलाने लगा। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने एक धक्का और लगा दिया, जिसकी वजह से अब मेरा लंड पूरा उसकी चूत के अंदर चला गया, जिसकी वजह से अब थोड़ी देर मुझे भी हल्का सा दर्द हो रहा था और उसका तो बड़ा बुरा हाल था वो आह्ह्ह्ह ऊफ्फ्फ् आईईईइ माँ मर गई प्लीज अब इसको बाहर निकालो मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है अब बहुत हुआ तुम अब मुझे छोड़ दो वरना में आज मर ही जाउंगी। दोस्तों में वैसे ही रुका रहा और उसके बूब्स को सहलाता रहा, जिसकी वजह से मुझे अब थोड़ा मज़ा और दर्द दोनों ही आ रहे थे। फिर सीमा को अपनी कुंवारी चूत में सिर्फ़ दर्द हो रहा था, लेकिन सीमा बड़ी हिम्मत वाली थी, क्योंकि वो कुछ देर बाद दर्द को सहने लगी और उसने दोबारा मुझसे नहीं बोला कि अब रहने दो और उसके थोड़ी देर बाद सभी की तरह वो भी धीरे धीरे शांत हो गई।

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अब वो मुझसे कहने लगी कि मुझे आज पहली बार ठीक तरह से पता लगा कि सभी लड़के क्यों हर चूत के इतने पागल दीवाने होते है और हम लड़कियाँ क्यों लंड की तरफ इतना आकर्षित होती है? हंसकर मुझसे इतना कहने के बाद वो अब मेरा साथ देने लगी थी। दोस्तों में बिल्कुल भी झूठ नहीं कहूँगा में उस दिन उसको सिर्फ़ उस एक पोज़िशन में ही चोदता रहा और वो मेरे धक्के खाकर चुदती रही और कुछ देर बाद उसका जोश हिम्मत देखकर मैंने अपने धक्को की स्पीड को बढ़ाकर उसको तेज धक्के देने शुरू किए जिनका हर बार उसने पूरा पूरा साथ दिया, लेकिन फिर अब में झड़ने वाला था और इसलिए करीब दस मिनट तक उसको धक्के देने के बाद मैंने हल्के हल्के धक्के देते हुए ही उसकी चूत के अंदर ही अपना पूरा वीर्य निकाल दिया। वीर्य के निकलने पर मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड अब बड़ी आसानी से फिसलता हुआ उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था और वो वीर्य की गरमी को महसूस करके मुझसे कहने लगी कि तुमने मेरे अंदर सू सू क्यों किया? तब में उसकी बात को सुनकर हंसकर उससे बोला कि मेरी जान तेरा बाप भी अगर तेरी माँ की चूत में इस तरह सू सू नहीं करता तो मेरे लिए आज इतनी अच्छी मुलायम चूत कहाँ से आती? और वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर हंसने लगी।

उसके बाद मेरा लंड अपने आप अपना आकार छोटा होने की वजह से धीरे धीरे बाहर आता चला गया। लंड के साथ साथ हम दोनों के अंदर से निकला वो गरम चिकना सफेद रस भी बाहर आकर उसकी चूत से बहता हुआ जांघो से होता हुआ पलंग और उसकी गांड के छेद तक पहुंच गया। दोस्तों में वो सब देखकर मन ही मन बड़ा खुश था, क्योंकि मेरे लंड की अच्छी किस्मत से मुझे एक कुंवारी चूत को चोदने का मौका मिला और इस तरह से सीमा और मेरा चुदाई का चक्कर शुरू हो गया। हमें जब भी मौका मिला हमने चुदाई के मस्त मज़े लिए और उसकी एक बार चुदाई हो जाने के बाद उसको अब वैसा बिल्कुल भी दर्द नहीं होता था बस हल्का सा दर्द और उसके बाद बस मज़े ही मज़े और कुछ नहीं हम दोनों ने जमकर चुदाई का सुख प्राप्त किया ।।

धन्यवाद …

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