गोवा के मज़े

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों मैंने भी आप सब लोगो की तरह कामुकता डॉट कॉम पर सच्ची कहानियाँ पढ़ते पढ़ते आज बहुत हिम्मत करके आप सभी को अपने सेक्स अनुभव को सुनाने का विचार किया है और आज में पूरी तैयारी के साथ समय निकालकर इसको लिख रहा हूँ यदि आप लोगो को इसमे कोई गलती नजर आए तो मुझे माफ जरुर करना। दोस्तों यह बात तब की है जब में करीब 18 साल का था, मेरे घर में मेरे अलावा मेरी मम्मी-पापा और एक बहन भी है और वैसे तो मेरे पापा को अपने काम से फ़ुर्सत ही नहीं मिलती और इस वजह हम दोनों भाई-बहन हमारी मम्मी के साथ ही घूमते फिरते है। दोस्तों मेरी बड़ी बहन उन दिनों अधिकतर समय घर से बाहर ही रहा करती थी, उसको मौका मिलते ही वह कभी मेरी नाना-नानी तो कभी दादा-दादी या कभी और किसी रिश्तेदार के पास रहने चली जाती और उसकी पढ़ाई भी इस वजह से अच्छी नहीं हो रही थी। दोस्तों हमारी मम्मी जो कि खुद एक अच्छी पढ़ीलिखी है और वो बहुत खुले विचारो वाली औरत भी है, इसलिए वो कभी भी अपने मन में फालतू विचारों को नहीं रखती और उन्होंने कभी भी हम भाई-बहन में कोई अंतर नहीं रखा। दोस्तों इस वजह से हम लोग आपस में बहुत खुले हुए थे, हम कभी भी किसी भी बात पर अपने विचार व्यक्त कर सकते थे, हम दोनों में किसी प्रकार का कोई परदा नहीं था।

दोस्तों मेरी मम्मी और मेरी बहन जो मुझसे उम्र में करीब दो साल बड़ी है वो दोनों कभी भी मुझसे शरम या परदा नहीं करते थे और वो दोनों घर में मेरे सामने ही अपने कपड़े बदल लेती थी या कभी पीठ कर लेती थी। फिर उस वजह से में बड़ी ही सफाई से अपनी नजरे चुराकर उन दोनों के गोरे चिकने बदन का भरपूर रसस्वादन करता था और वैसे इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि में बचपन से ही बहुत सीधासाधा भोलाभंडारी दिखता था, लेकिन कोई नहीं जानता था कि में जितना ऊपर हूँ उसको कहीं ज्यादा में ज़मीन के अंदर भी हूँ। अब में सीधे अपनी आज की सच्ची घटना पर आता हूँ, मेरी मम्मी जो की बहुत बिंदास स्वाभाव की है, उनकी उम्र 38 साल है और मम्मी का गोरा गठीला बदन, उनकी लम्बाई करीब 5.5 फीट और वो बदन पूरा भरा हुआ है इस वजह से वो 30-32 से ज्यादा की नहीं लगती और वैसे मेरी बहन भी उस समय 19 साल की थी, लेकिन उसका रूप भी देखते ही बनता था। दोस्तों उसका बदन गजब का सेक्स से भरा हुआ था, मेरे कई दोस्त भी उसको घूर घूरकर देखा करते थे और मेरे पीछे से वो लोग उसके बारे में गंदी बातें भी करते थे जिन्हे में थोड़ा बहुत सुनकर बहुत खुश होता था।

दोस्तों उन दिनों मेरी बहन कुछ ज्यादा ही मोटी लगने लगी थी, शायद वो कुछ दिनों पहले ही मेरे दादा-दादी के यहाँ से आई थी और वहां उसने बहुत सारा माल खाया था और अब यहाँ पर आने के बाद मम्मी ने उसको एक दिन कहा कि उसको हर दिन कसरत करनी चाहिए। फिर उसने हाँ कह दिया और उसके बाद वो हर दिन कमरे में सुबह और शाम के समय कसरत करने लगी थी और हम दोनों एक ही कमरे में सोते थे जिसमे एक ही बड़ा पलंग लगा हुआ था। अब वो हर सुबह 6 बजे का अलार्म लगाकर उठती और फ्रेश होकर केवल स्पोर्ट्स ब्रा और नेकर पहनकर कसरत करती। फिर में धीरे से अपनी आधी आंखे खोलकर उसका भूगोल देखा करता था, कभी कभी मम्मी भी वहां पर कई बार उसको कसरत सिखाने के लिए हम दोनों के सामने ही अपनी साड़ी को खोलकर केवल ब्लाउज, पेटीकोट में कसरत सिखाती। अब तो मेरा दिमाग़ वो सब देखकर बिल्कुल खराब हो जाता और में अपना तना हुआ लंड दबाया करता, ऐसा कई महीनो तक चलता रहा और में बुद्धू बनकर मज़े मारता रहा। फिर इस बीच हम लोग पापा के पीछे पड़ गए की हम सभी को कहीं बाहर घूमाने ले जाए और वो कहने लगे कि में समय निकालने की कोशिश करता हूँ, लेकिन ऐसे ही समय बीतता चला गया और मेरी बहन ने चाचा-चाची के साथ बाहर घूमने का विचार बनाया और वो उन लोगो के साथ 15-20 दिनों के लिए घूमने चली गयी।

अब मेरे पापा ने कहा कि उनके एक दोस्त का गोवा के बाहर एक गेस्ट हाउस है और अभी वो खाली है, इसलिए हम लोग वहां पर चले जाए और बहुत मज़े करे। फिर बाद में वो भी समय निकालकर वहीं पर आ जाएगे, लेकिन हम उनके बिना वहां पर जाना नहीं चाहते थे, लेकिन उनके समझाने पर में और मम्मी गोवा चले गये और अब मेरी बहन का पापा के साथ वहां पर आना तय हुआ और प्लान के अनुसार में और मम्मी ठीक समय गोवा पहुंच गए। फिर उस समय वहां पर ऑफ सीज़न था और बारिश की वजह से घूमने वाले भी नाम के ही थे, लेकिन वहां जाते ही वहां के सेक्सी द्रश्य देखकर मुझे लगा कि हमने यहाँ पर आकर कोई ग़लती नहीं की है। फिर हमे लेने के लिए गेस्ट हाउस से एक आदमी आया और उसने कहा कि वो यहाँ पर आकर ज़रूरती सामान या खाना दे जाया करेगा और रोज़ सुबह शाम सफाई वाली आएगी और आपके सभी काम वो कर देगी। फिर मम्मी ने बाद में मुझे बताया कि गेस्ट हाउस में रुकने से हमे होटल का भारी खर्चा कमरे का पैसा नहीं देना होगा और यहाँ पर हम कम पैसो में कई दिन मज़े कर सकते है।

फिर गेस्ट हाउस में आकर हमे पता चला कि वहां पर घूमने के लिए एक गाड़ी खड़ी है, किचन और फ्रिज पूरा खाने की चीज़ो से भरा हुआ था और मुख्य सड़क से अंदर गेस्ट हाउस एक बड़ी दीवार के अंदर था और उसके चारो तरफ बड़ी, बड़ी काटेदार तार बंधे हुए थे अंदर अल्मीराह में शानदार कपड़े जिनमे तैराकी वाले कपड़े भी थे। दोस्तों उन कपड़ो को हाथ में लेने में ही शरम महसूस हो जाए और एक बात थी कि वहां कोई भी अपना परिचित नहीं था, इस वजह से शरम और संकोच का बिल्कुल भी काम नहीं था। फिर मैंने मम्मी को अपनी बहन और एक सहेली से फोन पर बातें करते हुए सुना कि यहाँ पर इतनी आज़ादी है कि चाहे तो पूरी जिन्दगी नंगे होकर यहीं पर रहो कोई देखने वाला नहीं है। दोस्तों उस गेस्ट हाउस के पीछे एक बड़ा स्विमिंगपूल था, उसमे नीला आसमान ऐसा दिख रहा था मानो ज़मीन पर उतर आया हो और कुल मिलाकर हमारी कोई लौटरी ही लग गई थी। फिर अगली सुबह जब में सोकर उठा, तब मुझे मम्मी नहीं दिखी और इसलिए में उन्हे ढूंढने के लिए दूसरे कमरे में चला गया जहाँ पर वो अल्मिराह को खोलकर अपने आकार के तैराकी वाले कपड़े देख रही थी। अब मुझे देखकर वो मुझसे कहने लगी कि चलो तुम भी कपड़े बदल लो हम अब तैराकी करेंगे। दोस्तों में तो कब से इस मौका की तलाश में राह देख रहा था, जल्दी से फ्रेश होकर में पूल के पास पहुंच गया।

फिर मैंने देखा कि मम्मी ने पहले ही नाश्ते का सारा सामान वहीं पर रखवाकर काम वाली बाई से सभी काम करवाकर उसको जाने के लिए कह दिया। अब वहां पर मेरे और मम्मी के अलावा कोई नहीं था और थोड़ी ही देर के बाद मम्मी आ गई, मेरा तो दिमाग ही खराब हो गया। दोस्तों उस समय उन्होंने जो तैराकी वाला सूट पहना हुआ था वो शायद उनके बूब्स के आकार से एक इंच कम था और इसलिए उनका पूरा बदन कपड़े फाड़कर बाहर आने के लिए मचल रहा था और वो सब देखकर मेरे होश ही उड़ गये। अब में अपनी फटी आँखों से उन्हे चकित होकर देखने लगा, तभी मम्मी ने मुझे आवाज़ देकर चौका दिया और मुझे एक सूट देते हुए कहा कि में भी इसको पहन लूँ। फिर मैंने वहीं पर वो सूट पहन लिया, लेकिन उसका आकार कुछ ऐसा था कि मेरा पूरा तना हुआ लंड बाहर से ही दिख रहा था और उसकी वजह से में शरमा रहा था। अब मम्मी मेरी उस बात को तुरंत मेरा चेहरा देखकर समझ गयी और वो मुझसे कहने लगी कि क्या तू लड़कियों से भी ज्यादा शरमाता है? तेरी जगह वो खुद या मेरी बहन होती तो अब तक पूरे गोवा में दौड़ लगा आते। फिर मुझसे यह कहकर उन्होंने मेरा टावल खिच लिया जिसको मैंने अपने लंड पर रखा था और अब में केवल उस सूट में था और शरमाते हुए पानी में पैर डालकर बैठ गया, क्योंकि मुझे तैरना नहीं आता था।

दोस्तों मेरी मम्मी को भी अच्छे से तैरना नहीं आता था और इसलिए उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर धीरे धीरे पानी में उतरना शुरू किया और जल्दी ही हम दोनों छाती तक पानी में समा गये। दोस्तों अपनी मम्मी को मैंने पहली बार इतने बिंदास अंदाज़ में देखा था, उनके अंदर शरम नाम की कोई बात ही नहीं थी और वो अपने जवान लड़के के साथ पानी में मस्ती कर रही थी, उनका सूट जो बहुत कसा हुआ था अब वो पानी में भीगने की वजह से और ज्यादा बदन से चिपक गया था। अब मम्मी की निप्पल भी थोड़ी नजर आने लगी थी जिसको देखकर मेरा लंड खड़ा होकर उस सूट को फाड़कर बाहर आने को मचलने के लिए बेताब हो गया। फिर मैंने उसको बड़ी मुश्किल से दबाए रखा करीब दो घंटे के बाद जब हमे भूख सताने लगी तब हम दोनों माँ-बेटे पानी से बाहर आ गए और मम्मी ने मेरे सामने ही थोड़ा सा टावल की आड़ करके अपनी बिकनी बदलकर एक बड़े गले की जालीदार मेक्सी को पहन लिया। दोस्तों वो उनके घुटनों से भी छोटी थी और उसमे उन्होंने कुछ नहीं पहना जिसकी वजह से उनकी मेक्सी उनकी गांड के अंदर घुस रही थी और तनी हुई निप्पल भी दिख रही थी। दोस्तों मुझे लगता है कि मम्मी ने ऐसा शायद जानबूझ कर किया था, शायद वो अपने मन में दबी सभी इच्छाए पूरी करना चाहती थी।

फिर उसके बाद हम दोनों ने पूरे दिन टीवी देखकर मज़े किए, टीवी में वहां पर चलने वाला कोई लोकल चेनेल था जिसमे वहां पर आने वाले अंग्रेज जो की नंग धड़ंग मज़े मारते है उनकी शूटिंग दिखाते है। फिर उसमे ऐसे भी द्रश्य दिखाए कि में उनको देखकर शरमा रहा था, लेकिन मम्मी ने चेनेल को बदलना जरूरी नहीं समझा। फिर शाम को जब मम्मी दरवाजे पर मेक्सी में खड़ी थी, में पीछे से चुपचाप जाकर खड़ा हो गया और सामने सुनसान बिच पर एक अंग्रेज जोड़ा करीब संभोग की मुद्रा में बड़े पत्थरों के बीच मस्ती कर रहे थे। फिर उस समय मम्मी सूर्यास्त होने की वजह डूबते हुए सूरज की रोशनी में खड़ी थी, जिसकी वजह से मम्मी मेक्सी से रौशनी इस तरह पार हो रही थी कि उनका पूरा अंदर का हिस्सा आरपार दिखाई दे रहा था। फिर जब में उनके ठीक पीछे पहुंचा तब मैंने देखा कि वो अपना एक हाथ मेक्सी के अंदर डालकर अपनी मस्त चूत को रगड़ रही थी और हल्के हल्के करहा रही थी और जब उन्होंने मुझे अपने पीछे खड़ा देखा, वो बिल्कुल बेशरम की तरह हंसकर मुझसे कहने लगी देख वो दोनों वहां पर कैसे मज़े मार रहे है और एक तू है की अंदर ही शरमा रहा है लगता है मैंने तेरे साथ आकर गलती कि मुझे तू पूरा मज़ा नहीं दे पाएगा।

अब मैंने कहा कि नहीं मम्मी यह बात नहीं है में तो शुरू में थोड़ा झिझक रहा था, लेकिन यदि आप साथ हो तो कैसी शरम? मम्मी बोली कि देखो बेटा आदमी को बार बार ऐसा मौका नहीं मिलता जब हम खुलकर अपनी दबी इच्छाए पूरी कर सके और मज़े मार सके इस मज़े के लिए अगर हम लाखो रुपये भी खर्च करेंगे तो भी हमे इतनी आज़ादी नहीं मिलेगी और इसलिए शरमाना छोड़ो यह भूल जाओ कि हम माँ-बेटे है और मौके का फायदा उठाओ, जितना हो सके मज़ा लुट लो फिर ऐसा वक्त नहीं आएगा। फिर अगले दिन सुबह से ही ज़बरदस्त बारिश हो रही थी और सामने बिच पर समुंद्र मचल मचलकर बाहर आने को बेताब नज़र आ रहा था, तभी वहां के प्रबन्धक का फोन आया वो कहने लगे कि आज सफाई वाली नहीं आएगी और हम भी बाहर ना निकले क्योंकि पानी बढ़ सकता है और हम अपने कमरों के अंदर ही रहे और यदि कोई चीज़ की आवश्कता हो तो उसको फोन कर दे, वो सब काम कर देगा। अब मम्मी ने कहा कि हाँ ठीक है हम आज आराम करेंगे आप परेशान ना हो और फिर मम्मी मुझसे बोली कि आज हम दिनभर टीवी देखेंगे बहुत खाएगे और गरम पानी से नहाएगे।

दोस्तों आज के पहले मैंने गरम पानी में नहाने का केवल सुना था, लेकिन ना मैंने देखा था और उसका अनुभव बिल्कुल भी नहीं था, वैसे मेरी मम्मी तो एक दो बार पापा के साथ घूमने गयी थी और बड़ी होटल में वो उन सबका मज़ा पहले भी ले चुकी थी। फिर सुबह के भारी नाश्ते के बाद में और मम्मी दोनों नहाने के मज़े लेने चले गये और वहां पर जाकर मम्मी ने पानी का इलेक्ट्रिक बटन चालू किया जिसकी वजह से उस कांच के केबिन में गरम भाप बनने लगी। अब मम्मी मुझसे बोली कि आओ चलो तुम भी अपने पूरे बदन पर नहाने से पहले लगाने वाला क्रीम लगा लो, तब मम्मी ने अपनी मेक्सी को खोल दिया। फिर मैंने देखा उस समय मम्मी ने अंदर केवल ब्रा-पेंटी पहन रखी थी और फिर मैंने देखा कि उनकी पेंटी से उनकी चूत की झाटे बाहर आने को मचल रही थी। अब उन्हें देखकर वो हल्की सी मुस्कुराई और कहने लगी कि बेटा देख तो यहाँ पर कहीं कोई बाल साफ करने की क्रीम रखी है क्या? अब मैंने देखा तो वहां पर अनफ्रेंच क्रीम रखा था जिसको मैंने उन्हे दे दिया। अब मम्मी बोली कि तू अंदर जाकर देख में भी आती हूँ, मैंने केबिन में जाते समय अपनी तिरछी नजरों को मम्मी पर डाला, वो अपनी पेंटी को थोड़ा सा नीचे करती नजर आई।

अब मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था, मुझे यह समझ नहीं आ रहा था कि मम्मी मुझ पर इतनी मेहरबान क्यों है? और वो मुझे इस तरह दिखाकर क्या चाहती है? क्या में खुद आगे बढ़कर हिम्मत करके कुछ करूं? उनका मज़े मारने का शब्द मुझे अंदर तक व्याकुल कर गया। फिर मैंने बाहर देखने की कोशिश कि, लेकिन अंदर गरम पानी की भाप की वजह से बाहर का कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, अचानक से मम्मी अंदर आई और वो मुझसे कहने लगी कि ऐसे ही मत बैठे, अपने पूरे बदन पर हाथ घुमाकर पसीने और भाप की मालिश करो इसकी वजह से खराब चमड़ी साफ होकर नई आती है। अब मम्मी ने मेरी तरफ अपनी पीठ को करके कहा कि चल मेरी ब्रा का हुक खोल दे और मेरी पीठ पर तू अपने मर्दाना हाथों से अच्छी तरह से मालिश कर दे। फिर में भी अब बिल्कुल बेशरम होकर मम्मी की गोरी पीठ पर हाथ फेरता जा रहा था, लेकिन में अभी तक मम्मी की निप्पल और बड़े आकार के बूब्स के खुलकर दर्शन नहीं कर सका, क्योंकि मम्मी ने अपने बूब्स पर हाथ रखा था। फिर करीब आधे घंटे यह सब कर लेने के बाद हम दोनों बाहर आ गये, मम्मी ने अपने कंधो पर टावल रखा था जिसकी वजह से मुझे उनके रसीले बूब्स को देखने का मौका नहीं मिल रहा था।

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फिर उसी शाम को पापा का फोन आया कि वो और मेरी बड़ी बहन दोनों अगले दो दिनों में हमारे पास पहुंचने वाले है और यह बात सुनकर में थोड़ा उदास हो गया, क्योंकि तब मुझे शायद पापा के सामने मम्मी का ऐसा सेक्सी रूप देखने को नहीं मिलेगा। फिर रात को मम्मी ने हल्का सा खाना बनाया जिसको हम खाकर टीवी के सामने बैठकर जम गये और बाहर हो रही उस बारिश में भी मुझे कुछ कमी महसूस होने लगी थी। अब मम्मी मुझसे बोली कि चलो टीवी देखते हुए मेरी पीठ पर हल्की मालिश भी कर दो शायद बेड बदलने से मुझे कुछ दर्द महसूस हो रहा है। दोस्तों मम्मी ने सुबह से ही टीशर्ट और नेकर पहन रखा था, मम्मी ने अपनी टीशर्ट को ऊपर उठाया और मैंने देखा कि अंदर उनकी ब्रा थी जिसका हुक खोलकर मैंने उनकी पीठ पर तेल लगाकर मसाज करना शुरू कर दिया। फिर कुछ देर बाद मम्मी कहने लगी कि ऐसा कर में अपने नेकर को थोड़ा नीचे करती हूँ उसके बाद तू मेरे कूल्हों की भी थोड़ी सी मालिश कर दे। अब में सेक्सी वीडियो को देखते हुए उनकी मालिश करता जा रहा था और कुछ देर में मम्मी सो गयी, उनकी कमर और कुल्हे अब भी खुले ही थे में ध्यान से देखता रहा और नींद आने पर उनके पास ही पलंग पर सो गया।

फिर रात को करीब दो-तीन बजे मम्मी के हल्के से करवट लेने की वजह से मेरी आँख खुल गयी और अब मैंने देखा कि मम्मी सीधी लेटी हुई थी, उनके गहरी नींद में होने का पक्काकर मैंने उनकी टीशर्ट को थोड़ा ऊपर किया। अब उनकी ब्रा भी ऊपर करके उनके मस्त रसभरे स्तानो के दर्शन करने लग गया, उनकी निप्पल भूरे रंग की थी और में उनको देखकर पागल सा हो गया और मैंने तत्काल बिना देर किए धीरे से उनको अपने मुहं में ले लिया। अब में धीरे धीरे उनको चूसने लगा, मैंने अपना एक हाथ उनकी नेकर में भी डाल दिया और उसका बटन खुला होने की वजह से वो भी उनकी चूत के पास तक सरक गया था। फिर मैंने अपनी दो उँगलियों को धीरे से अंदर डाल दिया तब मुझे अंदर सपाचट चिकना सा स्पर्श होने लगा और तभी मुझे ध्यान आया कि आज सुबह ही तो मम्मी ने नहाने के समय अपनी चूत के बाल साफ किए थे। दोस्तों मम्मी की चूत का वो हिस्सा गरम भट्टी की तरह तप रहा था और फिर मैंने महसूस किया कि मम्मी की निप्पल भी अब पहले से ज्यादा कड़क होकर बड़ी महसूस हो रही थी, लेकिन में नहीं रुका और बूब्स को चूसते हुए में सो गया।

फिर अगले दिन सुबह जब में सोकर उठा तब आसमान बिल्कुल साफ था और बाहर धुप खिली थी, रेतीली मिट्टी होने से कहीं भी पानी का नामोनिशान नहीं था, कामवाली बाई ने सभी जगह साफ सफाई का काम कर दिया। अब मैंने देखा कि मम्मी साड़ी पहनकर कामवाली बाई से पास के किसी मंदिर का पता पूछ रही थी, मैंने सोचा कि शायद पापा के आने की बात सुनकर वो नाटक कर रही है। फिर बाई के चले जाने के बाद मम्मी ने मुझसे कहा कि चलो नाश्ते के बाद हम घूमने चलेगे, में अब सोचने लगा कि मम्मी साड़ी पहनकर वहां पर क्या करेगी? लेकिन में उनको देखता ही रह गया। अब मम्मी ने एक काली रंग की बिकनी निकाली जिसका आकार पहले की तरह छोटा था और उनका सेक्सी बदन अब उस बिकनी को फाड़ने के लिए तैयार लग रहा था। फिर रास्ते में मम्मी बोली कि रात को में ऐसे ही सो गयी और सुबह जाकर समझ आया कि रात में क्या हुआ? अब में चुप ही रहा और अंदर ही अंदर समझ गया कि मम्मी सब जान गई है। फिर वहां पर जाने के बाद हमने देखा कि कोई भी नहीं है और चारो तरफ सुनसान बहुत अकेलापन भी डर लगने का कारण हो सकता है, ऐसा मुझे पहली बार महसूस हुआ कि कल की ज़ोरदार बारिश की वजह से समुंद्र का पानी बहुत ज़ोर मार रहा था।

अब मम्मी बोली कि चलो पत्थरों की तरफ चलो अंदर जाने में तो डूबने का डर रहेगा, में और मम्मी उस उथले पानी में ही छाती तक डूबकर पत्थरों पर बैठ गये, लेकिन समुंद्र की तेज़ लहरे हमे बार बार डुबाने की कोशिश करती रही। फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपककर दोबारा फिर से चट्टान पर बैठ जाते, मम्मी से इतना ज्यादा चिपकने का यह मौका में खोना नहीं चाहता था और इसलिए में मौका मिलते ही मम्मी को पकड़कर अपनी छाती से लगा लेता। फिर वहां पर एक बोट आकर रुकी उसमे एक अधेड़ आदमी जिसकी उम्र करीब 50 साल के आसपास एक 25 साल की लड़की को लेकर आया। अब मैंने देखा कि उन दोनों के हाथों में शराब की बोतल थी और वो बिकनी और बरमुडे में थे बोट को खड़ी करके वो पत्थरों के बिच आड़ में जाकर चूमाचाटी करने लगे। फिर यह सब देखकर मम्मी मुझसे कहने लगी कि हम यहाँ पर चुपचाप पत्थरों के पीछे से उनको देखते है, यह लड़की उसकी बेटी की उम्र की लग रही है और इस बुड्ढे को जवानी चढ़ी है। फिर वो दोनों कुछ देर बियर पीते हुए बात करते रहे, लेकिन उसके बाद में उस बुड्ढे ने लड़की के होंठो को चूसना शुरू कर दिया और धीरे से उसकी ब्रा को उतार दिया। अब वो मस्ती करने लगा तभी लड़की ज़ोर से हंसते हुए भाग खड़ी हुई और हमारी तरफ ही आने लगी।

अब मम्मी ने मुझसे कहा कि हम इनको ऐसे लगे कि हमने उनको अभी तक देखा ही ना हो और अब हम भी पानी में मस्ती करने लगे। फिर वो लोग भी हमारी तरफ ही आ गये, तब तक लड़की ने अपने दोनों बूब्स पर हाथ रखकर ब्रा पहनने की कोशिश कि वो आदमी हल्के से मुस्कुराया और प्यार भरे अंदाज़ में झुकते हुए मम्मी से बोला क्या आप भी ज़िंदगी का सबसे हसीन मज़ा उठा रहे हो? अब मम्मी कहने लगी कि हाँ तभी पानी में एक बड़ी सी बड़ी गेंद तेरकर आ गयी, जिसको उस लड़की ने पकड़ लिया और वो कहने लगी कि आओ हमारे साथ खेलो। फिर मम्मी ने मुझे अपनी आँखों से इशारा किया और हम भी उनके साथ मज़े करने लगे, एक तरफ वो दोनों थे और दूसरी तरफ हम दोनों माँ-बेटे। फिर जब मम्मी गेंद को लेने के लिए नीचे झुकी तब वो आदमी मम्मी के बूब्स को ध्यान से घूरकर देखने लगा और वो मम्मी के कूल्हों को घूरने लगा था। फिर करीब एक घंटे मस्ती करने के बाद वो जाने लगे, और उसने पूछा कि आप लोग किस होटल में रुके है? तभी मम्मी बीच में ही बोल पड़ी कि हम यहाँ पर रिज़ॉर्ट्स में है और कल ही वापस चले जाएँगे।

फिर जब वो अपनी बोट के पास गया तब वो मुझसे कहने लगा कि मैंने तो पैसे देकर लड़की को मज़े मस्ती के लिए तैयार किया है इसलिए यह साली ज्यादा नाटक कर रही है, लेकिन तू तो एक बच्चा होकर मस्त माल बटोर लाया साली इतनी सेक्सी चीज़ तो मैंने पूरे गोवा में नहीं देखी। अब मैंने मन ही मन सोचा कि क्या वास्तव में मेरी मम्मी इतनी सेक्सी है या वो झूठ बोल रहा था? कुछ बाद हम भी वापस चले आए, तब मम्मी बोली कि चलो गेस्ट हाउस के पीछे चलते है वहां पर स्विम्मिंग पूल में तेरकर बदन पर लगी मिट्टी और रेत साफ कर लें। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है, आप पानी में उतरो में अभी टावल और कपड़े लेकर आता हूँ, फिर जब में टावल लेकर आया तब मैंने देखा कि मम्मी ने अपनी बिकनी को उतारकर एक तरफ रख दिया था और वो नंगी होकर मेरी तरफ अपनी पीठ करके पानी में खड़ी हुई थी। दोस्तों यह सब देखकर में बहुत चकित हो गया, लेकिन तभी फोन की घंटी बजी और में अंदर चला गया, वो फोन मेरी बहन का था और वो कह रही थी कि वो पापा के साथ कल सुबह गोवा पहुंच जाएगी और आज पापा उसे दिन में तैराकी वाले कपड़े दिलवाकर आए है। तब मैंने उसको कहा कि तुम पैसे मत बिगाड़ो यहाँ पर सभी ज़रूरत की चीजे भरी पड़ी है बस तुम जल्दी से जल्दी आ जाओ।

अब वो कहने लगी कि हाँ पापा भी मुझसे कह रहे थे कि शरम संकोत्च यहीं पर छोड़ जल्दी से गोवा चलो। फिर अगले दिन दोपहर को खाने के समय तक पापा और मेरी बहन भी पहुंच गये, उस समय मम्मी ने घुटनों के ऊपर तक का पतला सा स्कर्ट और बिना बाह का टॉप पहना हुआ था और मेरी बहन भी सफेद रंग का कसा हुआ टॉप और जींस पहनकर आई थी जिसकी वजह से उसके बड़े आकार के बूब्स साफ दिखाई दे रहे थे उन गोल कूल्हों से भी वो कयामत ढा रही थी। फिर उसने बताया कि पापा ने उसे ऐसे कपड़े दिलाए है कि उनको अपने यहाँ तो पहनने कि कोई हिम्मत भी नहीं कर सकता और फिर खाना खाने के बाद हम चारो पूरा गेस्ट हाउस घूमकर पानी के पास बैठकर गपशप कर रहे थे। फिर उसी समय पापा ने बताया कि यह गेस्ट हाउस उनके बॉस का है और वो इसे केवल अपने खास लोगो को ही मज़े करने के लिए देते है और फिर भी हमे इतनी शांति गुप्त माहोल कहीं नहीं मिलेगा। अब तेज़ चलती हवाओं की वजह से मम्मी की पतले कपड़े की स्कर्ट बार बार उड़कर उनकी जांघो पर चड़ रही थी और वो उसे बड़े बेफ़िक्र अंदाज़ में आराम से सीधा करती। फिर शाम को हम सभी ने होटल में जाकर खाना खाने का विचार बनाया, मम्मी ने काले रंग का पीछे से खुला ब्लाउज पहना उस ब्लाउज से उनकी गोरी पीठ देखने वालो पर बिजली गिरा रही थी।

अब मेरी बहन ने लंबे कट वाला लंबा स्कर्ट पहना हुआ था, जिसमे से उसकी गोरी भरी हुई जांघे बहुत सुंदर नजर आ रही थी और कुर्सी पर बैठने पर पूरी साफ नज़र आ रही थी, वो दोनों ड्रेस बहुत कीमती थी। फिर शानदार लंच के बाद हम गोवा के नाइट स्पॉट्स में भी घूमे जहाँ गोवा जवान नज़र आता है। रात को मम्मी ने गेस्ट हाउस आकर अपनी वही छोटी सी मेक्सी पहन ली और बहन ने बदन पर एक सिल्क का कुर्ता डाल लिया, जिससे उसके बूब्स बहुत आकर्षक दिखाई दे रहे थे। फिर टीवी देखते हुए मैंने देखा कि मेरी बहन अब अपने दोनों पैरों को कुछ ज्यादा ही फेलाकर बैठी हुई थी, उसकी गोरी जांघे और पेंटी का एक तरफ का हिस्सा भी दिख रहा था। अब पापा भी मम्मी की जाँघो को अपने हाथों से दबाते हुए बहन को देख रहे थे। फिर अगली सुबह नज़ारा कुछ अलग था, पापा जिन्हे मैंने पहली बार तैराकी वाले कपड़ो में देखा था, उनका तना हुआ लंड बड़ा अजीब सा लग रहा था। अब मेरी बहन और मम्मी दोनों ने भी छोटी छोटी सी बिकनी पहन रखी थी, तब पापा बोले कि शरम को छोड़ दो बस मज़े मस्ती करो। फिर हम चारो ने बहुत मज़े करे, उसके बाद हम सभी समुद्र के किनारे गये और हम वहां पर समुद्र में बहुत गहराई तक जाकर तैरते रहे।

अब मैंने देखा कि पापा, मम्मी और बहन की बिकनी को खीच खीचकर उन्हे रेत पर घसीट रहे थे, जिसकी वजह से उन दोनों के बूब्स बाहर निकलने को होते और बहुत देर बाद हम वापस पानी के पास आए और मम्मी ने ठीक कल की तरह ही रेत में भरी अपनी बिकनी को उतार दिया और वो पानी में कूद गयी। फिर यह सब देखकर में वहां से अंदर आ गया मेरे पीछे पीछे मेरी बहन भी अपने अधनंगे कुल्हे हिलाती हुई आ गयी और वो मुझसे कहने लगी कि तुम पागल हो जो शरमाते हो, मज़े लूटो ऐसे खुले विचारो वाले माँ बाप तुम्हे दोबारा नहीं मिलेगे, जो तुम्हे इस तरह आज़ादी दे रहे है तुम्हारी जगह में होती तो कपड़े खोलकर कूद जाती। फिर कुछ देर बाद जब मैंने कमरे से बाहर झाककर देखा, मम्मी-पापा दोनों पूरे नंगे होकर पानी में मस्ती कर रहे है और मेरी बड़ी बहन जिसने केवल बिकनी पहन रखी थी वो एक खंबे की आड़ से यह सब तमाशा ध्यान से देखकर अपनी चूत को मसल रही थी। फिर शाम को हम सभी अधनंगे होकर एक नाइट क्लब में जा पहुंचे वहां पर शराब और शबाब का जो नंगा नाच हो रहा था, उसको देखकर तो मेरी पेंट बस फटने ही वाली थी। फिर पापा-मम्मी बोले कि जिसे जिसके साथ जोड़ी बनाना हो बना लो कोई किसी की शरम मत पालना दारू पियो या लड़कियाँ को नचाओ कोई बात नहीं।

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अब इसके बाद में और मेरी बहन जिसने बड़े गले वाली छोटी सी स्पोर्ट्स ब्रा और जींस का जॅकेट पहन रखा था और नीचे केवल दिखाने का मिनी स्कर्ट पहना था। अब हम दोनों बहुत नाचे बहन बोली कि क्यों ना हम भी बीयर या वाइन का भी मज़ा करे? तब मैंने उसको कहा कि ठीक है तू केवल बीयर पीना में थोड़ी सी वाइन पीता हूँ। फिर नशा करने के बाद डिस्को साउंड & लाईटिंग्स के बीच हम अब केवल औरत और मर्द महसूस कर रहे थे, हमारी बीच में कोई भी खून का रिश्ता नहीं बचा था। अब मैंने अपनी सारी हदे तोड़ते हुए उसके शरीर के सभी उभारो को जी भरकर छुआ ही नहीं बल्कि बहुत दबाया भी और वो मुझसे कहती रही कि हाँ और ज़ोर से मत रूको तुम आज तोड़ दो सारी हदे और एक हो जाओ। फिर मैंने देखा कि हमारी माँ जो की जीन्स और शर्ट पहनकर उत्तेजक डांस ड्रामा कर रही थी उसकी शर्ट के आधे से ज्यादा बटन खुले हुए थे और अब ब्रा से बूब्स बाहर आने को बेताब हो रहे थे। अब मम्मी के चारो और कामुक नशे में धुत्त लोगो का घेरा था, जो बार बार मम्मी के शरीर को छूने और दबाने की कोशिश कर रहे थे और उनमे वो आदमी भी था जो कि दो दिन पहले हमे मिला था। अब वो तो पागलो की तरह मम्मी की ब्रा में बंद दोनों कबूतरो को पकड़ने की कोशिश में था और इस बीच पापा मुझे कहीं नहीं दिखे।

फिर मैंने उन्हे जब खोजा तो वो एक 20-22 साल की लड़की जो की शायद मेरी बहन की उम्र की होगी उसके चक्कर में थे और वो उसके साथ शराब पी रहे थे। अब वो उसकी स्कर्ट में हाथ डालकर उसके कूल्हों को सहला रहे थे और फिर थोड़ी देर बाद पापा उसी लड़की के साथ रंगरलिया माना रहे थे जो की हमे उस बुड्ढे आदमी के साथ समुद्र किनारे मिली थी। फिर आधी रात के बाद जब रात अपने पूरे शबाब पर थी तेज़ म्यूज़िक के साथ मम्मी अपनी शर्ट को हाथ में लेकर ज़ोर से हिला हिलाकर डांस का नाटक करने लगी थी जो शायद ज्यादा नशे की वजह से था और अब मेरी बहन भी नशे में धुत्त होकर कोने के सोफे पर अपने दोनों पैर फैलाकर अपनी पेंटी दिखा रही थी। अब उसको ज़रा भी होश नहीं था कि दो लड़के उसके पैरों में बैठकर उसकी पेंटी को छु रहे थे, हम लोग करीब रात के 3-4 बजे गेस्ट हाउस पहुंचे और सीधे बेडरूम में घुस गये किसी को अपने कपड़ो का ख्याल नहीं था, मम्मी तो हाथ में अपनी शर्ट को लेकर ही घूम रही थी और मेरी बहन ने भी अपनी स्कर्ट और जेकेट को उतार फेका मेरा नशा अब कुछ कम होता सा लग रहा था, लेकिन पापा तो अब भी अपनी बची हुई दारू की बोतल को मुहं से लगाए हुए थे। दोस्तों डांस और नशे की वजह उन्हें गरमी बहुत लग रही थी, इसलिए हमने ए.सी. चालू होने के बावजूद भी अपने सारे कपड़े खोल दिए।

अब पापा तो बहन को ब्रा पेंटी में देखकर उस पर टूट ही पड़े और मम्मी ने मुझे अपने ऊपर करीब खिचते हुए अपने से लपेट लिया में भी अब कहाँ वो मौका छोड़ने वाला था, में भी पापा की तरह कपड़े खोलकर मम्मी के ऊपर चड़ गया और मम्मी की पेंट को उतारकर उनकी चिकनी चूत को मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा। फिर यह सब देखकर मेरी बहन ने भी अपनी पेंटी को उतार दिया और वो पापा के मुहं के ऊपर बैठ गयी, जैसे ही पापा ने उसकी चूत को चूसना चाटना शुरू किया वो कुछ देर बाद आनंद से भरकर मुतने लगी और पापा अपनी जवान बेटी की चूत का सारा पानी मतलब चूत रस पी गए। अब मम्मी भी अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स को दबाती जा रही थी और कहने लगी कि बेटा यह हिम्मत तू दो दिन पहले क्यों नहीं कर सका? में कब से तड़प रही थी अब तक तो हम ना जाने कितनी बार चुदाई करके मज़े ले चुके होते। फिर अगली सुबह दस बजे जब कामवाली बाई आई तब मम्मी ने उसको बोलकर बेडरूम को छोड़कर बाकी पूरा गेस्ट हाउस साफ करवा लिया क्योंकि बेडरूम में हम तीनो अभी तक नंगे पड़े हुए थे, पापा का लंड तो मेरी बहन की चूत में खाली होकर छुवारा बनकर लटक रहा था और बहन के बूब्स पर मेरा हाथ रखा हुआ था।

फिर दोपहर के भोजन के बाद हम सभी वापस बड़े पलंग पर एक साथ हुए और इस बार बिना नशा किए, मैंने अपनी बहन को चोदा मम्मी भी पापा से चुदवाने के बाद वापस मेरे लंड को खड़ा करने के लिए उसको अपने मुहं में भरकर चूसने लगी। फिर उधर पापा भी बहन की मोटी चूत की फांको का स्वाद ले रहे थे और इस तरह हम सभी अगले कुछ दिन और गोवा में रहे इस बीच हम दिन में कई बार आपस में सेक्स करते और पूरे गेस्ट हाउस पर नंगे डोलते रहे, घर वापस आने के बाद तो हम आज तक कभी भी अलग अलग नहीं सोए, हम सभी एक कमरे में बड़े आकार के बेड पर सोते है और मज़े मारते है और हाँ अब हमारे घर में कपड़ो का खर्च कुछ कम हो गया है, क्योंकि कपड़े हम केवल बाहर जाने के लिए ही पहनते है, घर में तो हम नंगे ही रहते है। अब मम्मी भी पापा से एक ही बात कहती है की जल्दी से वापस ऐसा ही कोई और बाहर घूमने का इंतज़ाम करो हम सभी दोबारा वो मज़ा लेना चाहते है ।।

धन्यवाद …

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