इसकी मम्मी उसके साथ – 2

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प्रेषक : रानी

“इसकी मम्मी उसके साथ – 1” से आगे की कहानी …

तो दोस्तों में आज एक बार फिर से आपके लिये फिर वही कहानी लेकर आई हूँ जो में पहले अधूरी छोड़ गई थी। दोस्तों मेरी पहली कहानी आप सभी को बहुत अच्छी लगी और में फिर से उससे आगे की अपनी कहानी शुरू करती हूँ। जैसा कि आप सभी को मालूम नहीं है कि मुझे मम्मी ने उस दिन देख लिया था लेकिन वो देखने के बाद भी अनदेखा करके चली गई लेकिन घर पर पहुँच कर फिर से मम्मी ने मुझसे पूछा कि में वहाँ पर क्या कर रही थी? तभी मैंने कहा कि में अपने एक दोस्त के घर जा रही थी लेकिन आप वहाँ पर कैसे? तभी मम्मी बोली कि उनकी मम्मी जी मुझसे खाना बनाना सीख रही थी।

तभी मैंने मम्मी से पूछा कि आपकी चिन पर ये क्या लगा है? (मम्मी के मुहं पर वीर्य की मूंछ बनी हुई थी और उनकी गर्दन से काटने के निशान साफ साफ दिख रहे थे और उनकी माँग में भी सिंदूर के साथ साथ वीर्य से बनी लंबी लाईन थी) तभी मम्मी अपनी साड़ी के पल्लू से साफ करती हुई बोली कि उनके यहाँ मलाई कुलफी खाई थी तभी चिन पर लग गई होगी। अब वो मुझसे आँखें चुरा रही थी। तभी मैंने मम्मी से पूछा कि उनके कौन? फिर मम्मी बोली कि राजेश जी ओह, मेरा मतलब है कि उनकी मम्मी जी और फिर मम्मी दूसरे कमरे में चली गयी। फिर में अपने दोस्त के घर जाने लगी राजेश तब तक अंदर चला गया था।

अपने कमरे में आंटी (राजेश की मम्मी) दरवाज़ा बंद कर ही रही थी कि लिफ्ट से कॉलोनी का ही एक लड़का अविनाश वहाँ आ गया। फिर उसने आंटी से पूछा कि क्या राजेश घर पर है? तभी आंटी ने कहा कि वो अपने कमरे में है। फिर आंटी बोली कि हमेशा राजेश से ही मिलने आते हो इतने दिन कहाँ थे? आज देख रही हूँ कि तुम कितने बड़े हो गये हो, बॉडी भी बहुत अच्छी है तुम्हारी। तभी अविनाश बोला कि आंटी जी में रोज़ बास्केट बॉल खेलता हूँ आंटी बोली कि तुम तो महाराष्ट्र से हो ना, तुम्हारे यहाँ तो बहुत मोटे केले होते हैं। तभी वो बोला जी आंटी जी हमारे भी केले के कई फार्म हैं। फिर आंटी ने कहा कि तुम्हारा केला भी बहुत मोटा लगता है। तभी वो बोला कि आंटी जी हमारे यहाँ बहुत मोटे केले होते हैं। फिर आंटी ने कहा कि तो चलो मेरे कमरे में चलते हैं आज में तुम्हारा केला चूसकर देखती हूँ की कितना मोटा है। में तुम्हें अपने आम चूसने दूंगी बहुत दिनों से भूखी हूँ और में सारी क्रीम चूस चूसकर निकाल दूँगी। आंटी हाथों से चाबियों के छल्ले को घुमा रही थी और शरमाते हुए हंस रही थी।

तभी वो बोला लेकिन आंटी जी में तो केले लाया ही नहीं हाँ लेकिन मुझे आम बहुत पसंद हैं। फिर आंटी बोली बहुत भोले हो तुम क्या कोई पोज़ आता भी है तुम्हें? वो बोला किस का पोज़ आंटी जी। आंटी ने पूछा पिक्चर नहीं देखते क्या? तभी उसने कहा कि पिछले सप्ताह ही देखी थी प्लाज़ा में आंटी ने कहा कि आज कल के लड़के तो ना जाने कैसी कैसी पोज़िशन में खड़ा करके बैठाकर करते हैं और तुम हो कि औरत के इशारे नहीं समझ रहे हो बिल्कुल अनाड़ी हो। अच्छा देखो और बताओ मेरा गजरा ठीक से लगा है या नहीं? फिर आंटी घूमकर थोड़ा पीछे हो गयी अविनाश ने गजरा देखा और बोला हाँ आंटी जी ठीक से लगा है। फिर आंटी ने कहा कि और पास आकर देखो वो और पास आ गया आंटी ने कहा सूंघकर बताओ कैसी महक आती है इसमें?

तभी अविनाश ने बिना आगे हुए गर्दन आगे करके सूँघा और कहा कि आंटी जी बहुत खुशबूदार है। फिर आंटी पीछे को हो गयी और उसके साथ चिपक गयी और बोली अब बताओ कैसा है मेरा गजरा? फिर जान बूझकर हाथ में पकड़ी हुई चाबियाँ गिरा दी। फिर आंटी चाबियाँ उठाने के बहाने झुकी और अपने चूतड़ो को अविनाश के लंड पर ज़ोर से दबाने लगी। आंटी झुकी हुई थी और अविनाश के लंड से चिपकी हुई थी। फिर आंटी ने अपने चूतड़ अविनाश के लंड पर रगड़े उसके लंड पर अपने चूतड़ गोल गोल घुमाए। फिर झुके हुए ही पीछे देखते हुए हँसने लगी और बोली कि बहुत लंबा और मोटा है तुम्हारा केला थोड़ी सी औरत की गर्मी मिलते ही एकदम टाईट हो गया है। बोलो तुम्हें गजरे वाली पसंद हैं? तभी अविनाश बोला हाँ आंटी आपके इन मुलायम गोल चूतड़ो की कसम मुझे गजरे वाली बहुत पसंद हैं।

फिर आंटी ने कहा तो बताओ अपनी इस गजरे वाली के साथ क्या करोगे? तभी अविनाश बोला कि कमरे में तो चलो और आंटी की कमर पकड़ कर पीछे से अपनी कमर को हिलाकर लंड से उनके चूतड़ो पर झटके मारे। फिर उसने आंटी के बूब्स को पकड़ कर मसला और उनका ब्लाउज खोल दिया अंदर ब्रा नहीं थी, उनके बूब्स मीडियम साईज़ के थे और बेहद सॉफ्ट थे। फिर उसने उनके बूब्स को बुरी तरह मसलना शुरू किया और फिर चूसने लगा वो एक भूखे कुत्ते की तरह आंटी को दीवार से लगाकर ज़ोर ज़ोर से उनके बूब्स चूस रहा था और चूसते वक़्त पच, पच की आवाज़ें आ रही थी। फिर आंटी भी आँखें बंद करके उम्म्मह्ह्ह उम्मह्ह्ह की आवाज़ें निकाल रही थी। फिर उसने अपना लंड ज़िप खोलकर बाहर निकाल लिया। उसका लंड काले कलर का था जो करीब 8 इंच लंबा था और उसका आगे वाला हिस्सा पिंक कलर का था जो कि एक गुब्बारे की तरह फूला हुआ था। इस वजह से उसकी स्किन पीछे खींचकर आगे से आधा निकला हुआ था।

फिर आंटी मुहं खोलकर और बड़ी बड़ी आँखें करके उसके लंड को देखने लगी उनकी आँखों में चमक थी। फिर आंटी ने अविनाश के लंड को हाथ में लिया और उसकी स्किन को पीछे खींचा उसके लंड की टोपी पूरी पीछे खिंच गयी और एकदम मोटा फूला हुआ आगे का पिंक हिस्सा बाहर निकला। तभी अविनाश धीरे से शह्ह्ह बोला.. फिर आंटी ने धीरे धीरे उसकी स्किन को आगे पीछे करके सहलाना शुरू किया और अविनाश से कहने लगी कि उई माँ तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है आज बहुत मज़ा आएगा। तभी अविनाश ये सुनकर और गरम हो रहा था कि उसको आज एक मज़ेदार साउथ वाली औरत मिली है वो बुरी तरह से आंटी को चूम और चाट रहा था।

तभी आंटी उसको और तड़पाने के लिए अपना मुहं दूसरी तरफ फेर लेती थी। फिर आंटी नीचे घुटनों पर झुक गयी और उसके लंड पर किस किया फिर मुहं में लेने की कोशिश की लेकिन सिर्फ़ आगे का हिस्सा ही घुस पाया। फिर आंटी ने उसके लंड पर थूका और हाथ से उसकी स्किन हो आगे पीछे हिलाते हुए कहा कि बहुत मोटा है तुम्हारा केला। तभी आंटी ने फिर से मुहं में लेने की कोशिश की लेकिन आंटी के छोटे से मुहं के लिए अविनाश का मोटा लंड बहुत बड़ा साबित हो रहा था। वो आंटी के बूब्स दबाता हुआ बोला कि आंटी चलिए रूम में चलकर ट्राई करते हैं। इस बार में घुसाने की कोशिश करता हूँ। तभी आंटी उसको बोली कि मुझे आंटी नहीं बैजन्ती बुलाओ बेटा तभी अविनाश बोला नहीं में आपको राजेश की मम्मी कहकर बुलाऊँगा। आज बैजन्ती नहीं राजेश की मम्मी चुदेगी।

फिर वो बैजन्ती आंटी से कहने लगा कि बबलू उसको बता रहा था कि जब मेरी मम्मी शाम को ऑफीस से आती है तो वो डेली मेरी मम्मी के साथ बस में आता है और उनके पीछे से उनके चूतड़ में अपना लंड घुसा कर खड़ा होता है और आगे हाथ डालकर उनके बूब्स को टच भी करता है लेकिन जब आंटी गुस्से से पीछे देखती है तो डरकर हाथ हटा लेता है लेकिन लंड पीछे ही घुसाए रहता है। राजेश के साथ बबलू भी इस सवारी के मजे लेता था।

वो रोज़ दोनो अविनाश की मम्मी के पीछे बस में आते हैं और बारी बारी से उनके पीछे अपना खड़ा हुआ लंड उनकी गांड के पीछे घुसाकर खड़े होते हैं जब भी में और वो बैठकर पॉर्न फिल्म देखते हैं तो उसमें चुदी हुई रंडी को देखकर कहता है यार ये बिल्कुल तेरी मम्मी जैसी दिखती है। फिर मुझको कहता है कि यार तेरे पापा हमेशा बाहर रहते हैं तेरी मम्मी बिल्कुल अकेली है मुझसे देखा नहीं जाता और उस दिन तो हद ही हो गयी मेरे साथ आराम से नीचे बैठा सिगरेट पी रहा था, जैसे ही मेरी मम्मी कॉलोनी में घुसी तो इसकी नज़रें उन्ही पर टिक गयी जैसे ही मम्मी लिफ्ट के पास पहुँची ये मुझे बोला कि में अभी आया और झटसे उठकर मम्मी के साथ लिफ्ट में चढ़ गया।

फिर मैंने देखा कि लिफ्ट में घुसते वक़्त ये जान बूझकर मम्मी के साथ एन्टर हुआ और मम्मी के पीछे गांड पर हाथ रखकर ऊँगली अंदर डाली। तभी मम्मी ने इसे गुस्से से देखा तो इसने हाथ हटा लिया। में अकेले 15 मिनट तक बैठा रहा फिर में उठकर घर गया। घर के पास पहुँच कर सुना किसी को डाँटने की आवाज़ आ रही थी मैंने छुपकर देखा कि मम्मी राजेश को बाल पकड़ती हुई घर से बाहर ला रही हैं। मम्मी के शरीर पर सिर्फ पेंटी थी जो कि थोड़ा नीचे तक उतरी थी और राजेश बिलकुल नंगा था उसने अपनी गांड को ज़ोर से ऐसे पकड़ा हुआ था कि लगता था जैसे मम्मी ने उसकी गांड पर ज़ोर से मारा हो।

मम्मी के फेस, बूब्स और गर्दन पर राजेश के दांतों के निशान थे। उनके बूब्स एकदम लाल हो गये थे उनके बाल एकदम बिखरे हुए थे। होंठों पर लिपस्टिक नहीं थी और उनकी बिंदी राजेश के गालों के साईड पर चिपकी हुई थी। वो सॉरी आंटी जी सॉरी आंटी जी बोले जा रहा था और मम्मी उसको बालों से पकड़ कर घर से बाहर ला रही थी। फिर मम्मी ने उसके बालों को छोड़कर उंगली दिखाकर डराते हुए कहा कि अगली बार सीधा तेरी मम्मी के पास जाऊंगी। तभी ये हरामी फिर से अचानक उनके बूब्स पर झपटा और उनके बूब्स दबाते हुए उनको घर के अंदर को धकेलने लगा और कहने लगा कि बस थोड़ा टाईम प्लीज़ सिर्फ़ एक बार करने दो अब क्या बचा है अंदर तो चला ही गया था ना। कम से कम 25-30 झटके भी दिए मैंने, अब कैसी दूरी है, आइए ना प्लीज़ बस थोड़ा टाईम और हिलाने दीजिए बहुत मज़ा आ रहा था। एकदम गरम गरम और टाईट लग रहा था। आपके छेद मे मुझे अपने प्यार के बीज तो डालने दीजिए आपके इस मज़ेदार छेद में और एक उंगली उसने चूत में डाल दी। तब मैंने ध्यान से देखा कि मम्मी की चूत की चमड़ी से उसका लंड ढका हुआ था। फिर उसने ज़बरदस्ती मम्मी को वहीं ज़मीन पर गिरा दिया और उनकी आधी उतरी हुई पेंटी को खींचकर पूरा उतारा और दूर फैंक दिया।

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फिर उसने मम्मी को अपने नीचे दबोच लिया उनके ऊपर ज़बरदस्ती लेट गया और चूमने लगा। फिर मम्मी बार बार अपना मुहं दूसरी तरफ घुमा लेती थी लेकिन वो भूखे कुत्ते की तरह उन्हे किस करने की कोशिश कर रहा था। अपने दोनो हाथों से मम्मी के बूब्स को नोंच रहा था। फिर वो एक हाथ नीचे की तरफ ले गया और अपना लंड सेट करके मम्मी की चूत के अंदर डाल दिया और हिलाने लगा। फिर उसने 10-15 शॉट ही लगाए थे की मम्मी ने उसके कंधों को पकड़ कर नीचे की तरफ धक्का दिया। तभी इस वजह से उसका लंड मम्मी की चूत से बाहर निकल आया लेकिन उसने जल्दी से फिर मम्मी को दबोच लिया और उनके दोनो हाथों को अपने हाथों से कसकर पकड़ लिया। फिर उसने बिना हाथ लगाए केवल अपनी कमर को सेट करते हुए अपने लंड को चूत के मुहं पर रखने की कोशिश की और जैसे ही उसको जगह मिली उसने एक शॉट में पूरा लंड अंदर डाल दिया। फिर वो ज़ोर ज़ोर के झटके देने लगा। फिर उसने मम्मी के हाथों को ज़ोर से पकड़ा था और मम्मी छोड़ मुझे कुत्ते छोड़ कहे जा रही थी लेकिन वो उनके हाथ पकड़ कर ज़ोर के धक्के लगाते हुए जिस भी साईड मम्मी मुहं मोड़ती थी उस साईड अपना मुहं ले जाकर उनके लिप पर अपने लिप चिपका देता था।

फिर इसने कसकर उनके हाथ पकड़े थे लेकिन इतने ज़ोरदार धक्के लगा रहा था कि मम्मी इसके हर धक्के के साथ हिल रही थी। फिर उसका लंड जो पूरी तरह से चूत की चमड़ी से ढका हुआ था। फिर ऐसे ही 20-25 ज़ोरदार शॉट्स में ही मम्मी ने उसको धक्का देकर साईड में गिरा दिया और खड़ी होकर घर के अंदर भागने लगी तो राजेश भी जल्दी से उठकर पीछे से उनके बूब्स दबाता हुआ उनसे चिपक गया और ज़बरदस्ती मम्मी को घर के अंदर ले जाकर दरवाज़ा बंद करने लगा लेकिन मम्मी ने ज़ोर लगाकर उसको घर के बाहर धक्का लगाया और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर लिया। फिर वो बिल्कुल नंगा हमारे घर के सामने खड़ा था।

फिर वो सीढ़ियों से उतर कर भागा और में भी उसके पीछे जाने लगा ताकि साले का लंड काट डालूं लेकिन मैंने देखा कि जैसे ही वो हमारे नीचे के फ्लोर पर पहुँचा तो बबलू की मम्मी तैयार होकर घर के बाहर निकल रही थी। फिर उन्होने उसको एकदम नंगा देखा और चौंक गयी वो एकदम से बबलू की मम्मी की तरफ लपका आंटी ने जल्दी से अंदर जाकर दरवाज़ा बंद करने की कोशिश की लेकिन उसने उनको दबोच लिया और घर के अंदर ले गया। फिर उसने जल्दी से दरवाज़ा बंद कर लिया। फिर अंदर से आंटी की ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें आ रही थी छोड़ दो मुझे तुम्हे एक थप्पड़ लगा दूंगी छोड़ो मुझे बिल्कुल बेशरम हो क्या हम अभी तुम्हारी मम्मी को फोन लगाती हूँ। छोड़ मुझे जाओ यहाँ से हाथ हटाओ आहह छोड़ो दूर हटो ये क्या कर रहे हो कुछ शर्म लिहाज़ है या नहीं। हटो छोड़ो मुझे आह्ह्ह नहीं हाथ हटाओ नहीं नहीं.. हम तुम्हारी माँ जैसे हैं। पल्लू छोड़ो हमारा छोड़ो साड़ी छोड़ो हम अभी फोन करते हैं तुम्हारी मम्मी को.. छोड़ो हमे नहीं हम तुम्हारी माँ जैसे हैं ऐसा मत करो हमारे साथ, हमे छोड़ दो प्लीज़ हम शादीशुदा हैं तीन बच्चों की माँ हैं। हमारे तुम्हारे जितने बड़े बच्चे हैं ये मत करो ये सही नहीं है तुम हमारे बच्चे जैसे हो छोड़ दो, हम एक पतिव्रता स्त्री हैं।

राजेश बस बोले जा रहा था कि बस एक बार कुछ नहीं होगा किसी को पता नहीं चलेगा बस एक बार आओ ना में तुम्हें बहुत चाहता हूँ बाँहों में आ जाओ बस एक बार फिर परेशान नहीं करूँगा। देखो तुम्हारा पति भी यहाँ नहीं है तुम्हें भी मर्द की ज़रूरत है आओ ना प्लीज़ बस एक बार आंटी की चूड़ियाँ बहुत आवाज़ कर रही थी। फिर थोड़ी ज़बरदस्ती की और कुछ कपड़े फटने की आवाज़ आई और फिर आंटी की आवाज़ बंद हो गयी लगता था उनको वो कमरे में ले गया फिर मैंने सोचा कि अगर में राजेश की पिटाई करूँगा तो मेरी मम्मी की बदनामी होगी और ये भी अच्छा हुआ की बबलू की मम्मी के चक्कर से मेरी मम्मी बच गयी अब ये साला बबलू के यहाँ बिज़ी रहेगा में वापस घर आया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर में सोचने लगी कि अविनाश उस ही मनहूस दिन की बात कर रहा है जिस दिन मैंने घर में से राजेश को निकलते देखा था। फिर मुझे मम्मी का फटा ब्लाउज और बिस्तर का हाल याद आने लगा मुझे याद आया की वो मम्मी की टूटी चूड़ियाँ और मम्मी की हालत राजेश के साथ हुई ज़बरदस्ती का सबूत थी।

तभी अविनाश बोला कि उस ही दिन मैंने सोच लिया था कि में राजेश से बदला तो लूँगा ही और उसकी माँ को में कुतिया बनाकर चोदूंगा और जिस फटी चूत से वो निकला है वहाँ पर अपनी मुहर जरुर लगाऊंगा।

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तभी आंटी ने कहा लेकिन सुनो मेरे पीरियड्स चालू हैं कंडोम से करना प्लीज़ वो बोला बैजन्ती तुम्हारे और मेरे प्यार के बीच कंडोम का क्या काम। में तुम्हें अपने इस मिलन की निशानी देना चाहता हूँ। फिर उसने उनकी साड़ी ऊपर खींची और पेंटी उतार के साईड में फैंक दी पहले वो नीचे बैठकर उनकी चूत को ध्यान से देखने लग़ा। फिर उसने उनकी चूत पर हाथ फैरते हुए बोला शह्ह्ह्ह। यहाँ से निकला था राजेश बड़ी ही मुलायम जगह है। आज ज़रा में भी देख लूँ राजेश को बनाने में कितना मज़ा आया था।

फिर वो आंटी की चूत को सूंघने लगा और बोला कि इसमें से तो राजेश जैसी स्मेल आ रही है। तभी आंटी मुहं दूसरी तरफ फैरकर हँसने लगी। फिर उसने उनकी बिना बालों की चूत को जीभ से रगड़ना शुरू किया आंटी ने आँखें बंद कर ली और अविनाश ने चूत चाटते हुए आंटी की चूत में एक उगली अंदर बाहर करनी शुरू कर दी। अब वो पागल कुत्ते की तरह हो गया था उसको ये होश नहीं रहा की वो बाहर है और वो और आंटी दोनो आधे नंगे हैं। फिर वो झटसे नीचे लेट गया और आंटी को नीचे खींचने लगा आंटी मना करने लगी। फिर वो अविनाश से कहने लगी कि नहीं इधर नहीं इधर कोई देखेगा.. तो अय्यो ना, कमरा में चलो उधर तुम कितना भी करो प्राब्लम नहीं ना, अय्यो बैजन्ती।

अंदर आओ इधर कोई देखेगा नहीं, आंटी ना ना करती रही लेकिन उसने आंटी को अपने लंड पर ज़बरदस्ती बैठा लिया वो ऐसे लेटा था कि वो आधा घर के अंदर था और आधा बाहर आंटी बिल्कुल चौखट पर उसके लंड पर बैठी थी उसके लंड के अंदर जाते ही आंटी के मुहं से ऑश निकल गई उसका लंड एकदम मोटा था और सिर्फ़ थोड़ा ही अंदर गया था फिर आंटी चार पांच बार ऊपर नीचे हुई तो उसका लंड पूरा उनकी चूत में समा गया। तभी उसने आंटी को अपनी तरफ खींचा और उनके खुले हुए ब्लाउज में से निकले बूब्स चूसने लगा। फिर आंटी बोली लगता है बहुत भूखे हो तुम और वो बिना कोई जवाब दिए बूब्स चूसता रहा आंटी ने ऊपर नीचे हिलना शुरू किया। फिर थोड़ी देर में आंटी अविनाश के लंड पर उछल रही थी और अविनाश एक भूखे कुत्ते की तरह आंटी के बूब्स को दबाते हुए चूस और काट रहा था। अब वो एकदम पागल हो गया था शायद वो ज़िंदगी में पहली बार चुदाई का मज़ा लूट रहा था। फिर उसने उनकी कमर के दोनो तरफ अपनी बाहें डालकर उनको जकड़ लिया और नीचे से कमर उठाकर चोदना शुरू किया। फिर वो शुरू से ही टॉप गियर में आ गया आंटी की चूत ने उसके लंड को एकदम कसकर पकड़ रखा था और वो फुल स्पीड में उनकी चुदाई कर रहा था और आंटी ऑश ह हुउऊउउ अय्यो हुउः उम्म्म डियर उफफफफ्फ़ किए जा रही थी।

उसने एक हाथ से आंटी को अपनी बाँहों में कसकर जकड़ रखा था और दूसरे हाथ से उसने उनके बाल पकड़ लिए आंटी का गजरा और उनके बाल अब अविनाश के हाथ में थे। फिर उसने आंटी को बालों से पकड़ते हुए बिल्कुल अपने से चिपका लिया और आंटी को किस करने लगा। फिर पोज़िशन कुछ ऐसी थी कि अविनाश के ऊपर बैजन्ती आंटी बैठी थी और अविनाश ने उनको कसकर अपने से चिपका रखा था। फिर आंटी के बूब्स उसकी छाती के साथ दब गये थे और वो एक हाथ से ज़ोर से आंटी के बालों को खींच रहा था। फिर आंटी को बालों से खींचते हुए उसने उनके होठों को बिल्कुल अपने होठों से जोड़ लिया था और दोनो के लिप एक दूसरे के साथ दबकर चपटे हो गये थे।

फिर उसने आंटी के होठों को अपने होठों से इतनी बुरी तरह चिपका रखा था की दोनो की नाक तक दब रहा थी। नीचे से वो बहुत तेज़ झटके दे रहा था। उसके बालों पर ज़ोरदार पकड़ की वजह से आंटी का सर भी उसके झटकों के साथ हिल रहा था। फिर उनके गजरे के फूल ज़मीन पर बिखरने लगे। उसने 20-25 मिनट में ज़बरदस्त चुदाई के बाद उनकी चूत में अपना वीर्य डाल दिया। फिर वो उनको चूमने लगा आंटी बोली अब तो कमरे में चलो कोई देख लेगा। फिर दोनो खड़े हुए आंटी की चूत में से अविनाश का एकदम गाढ़ा सफ़ेद कलर का वीर्य ज़मीन पर गिरा।

तभी आंटी अविनाश को लंड से पकड़ कर घर के अंदर ले जाने लगी। अविनाश फिर से आंटी के बाल ज़ोर से पकड़ कर खींचने लगा और दूसरे हाथ से बूब्स मसलने लगा। फिर इस पोज़िशन में वो आंटी को गालों पर और शोल्डर्स पर काटने लगा वो आंटी के बाल खींचता हुआ उन्हें घर के अंदर ले जाने लगा। तभी आंटी का ब्लाउज आगे से खुला था एक हाथ से अविनाश दोनो बूब्स दबा रहा था। फिर उनकी साड़ी का पल्लू पीछे पीछे ज़मीन पर सरक रहा था और बालों से पकड़ते हुए वो आंटी को घर के अंदर ले गया और दरवाज़ा बंद कर लिया। फिर उनके दरवाज़े के बाहर गजरे के बिखरे हुए चमेली के फूलों के बीच में अविनाश के वीर्य की बूंदे फैली थी और पास ही आंटी की पेंटी भी पढ़ी थी।

फिर में अपनी दोस्त के घर गयी तो वो अपने घर पर नहीं थी में वापस जाने लगी। तभी मम्मी रास्ते में मिल गयी वो राजेश के घर की तरफ जा रही थी। फिर मैंने पूछा कि मम्मी आप कहाँ जा रही हो तो मम्मी बोली कि हम ज़रा राजेश जी के यहाँ होकर आते हैं वो हमारे साथ थोड़ी योगा का अभ्यास करना चाहते हैं। आज हम पहली बार उनकी मम्मी जी के लिए खाना बना रहे हैं। फिर मैंने मम्मी से पूछा कि मम्मी आज खाने में क्या बनाया है? तभी मम्मी मुझे धमकाने लगी कि हम पहले ही से इतने परेशान हैं आज हम पहली बार इनकी मम्मी जी के लिए खाना बना रहे हैं पता नहीं उनको पसंद आएगा या नहीं और ऊपर से हमे राजेश जी परेशान रखेंगे किचन में खाना बनाते हुए राजेश जी हमारे साथ योगा के पोज़ ट्राई करना चाहते हैं। हमे आज मम्मी जी का दिल भी जीतना है और राजेश जी की भी सभी फरमाईश पूरी करनी हैं और यहाँ तुम हमे अलग परेशान कर रही हो खुद खाना नहीं बना सकती क्या? अब तुम बच्ची नहीं हो अपने ससुराल में तुम्हे ही खाना बनाना होगा जाओ हम अभी मम्मी जी को खाना खिलाकर आते हैं।

तभी मैंने मम्मी को याद दिलाया की मम्मी आज आपकी शादी की सालगिरह है तो हर बार की तरह आप पापा को फोन कर लो। तो मम्मी बोली हम यहाँ राजेश जी की मनपसंद पोज़िशन में बैठेंगे या तुम्हारे पापा को फोन लगाएँगे.. पहले हम राजेश जी को पूरी तरह से संतुष्ट कर दें तब तुम्हारे पापा को फोन करेंगे अभी हमे परेशान ना करो, राजेश जी हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे, आज पहली बार हमारे रिश्ते को मम्मी जी का आशीर्वाद मिला है।

तभी मैंने पूछा कि आप किस रिश्ते की बात कर रही हैं तभी मम्मी बोली कि हमारा और राजेश जी का योगा का रिश्ता है। राजेश जी हमारे साथ अलग-अलग पोज़िशन ट्राई करते हैं। हम दोनो आज कल एक दूसरे को इतनी अच्छी तरह से जानने लगे हैं कि बिना राजेश जी के बोले ही हम समझ जाते।

दोस्तों यह थी मेरी मम्मी की कहानी मेरी मम्मी अब पूरी तरह से उस राजेश के प्यार में पागल हो चुकी है। छोड़ो यह सब बातें आप तो बस इतना करना कि अगर आपको ये कहानी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर करना बिलकुल भी नहीं भूलना। आप सभी को मेरी माँ की चुदाई में कितना मजा आया, क्योंकि किसी को आये या ना आये लेकिन मेरी माँ को तो बहुत आया होगा ।।

धन्यवाद …

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