मरीज के लंड से चुदी

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प्रेषक : नीलम …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम नीलम है, में 25 साल की बड़ी ही सुंदर लड़की हूँ, मेरे बड़े आकार के बूब्स और पतली कमर किसी को भी पागल कर देने के लिए बहुत है। दोस्तों मैंने एम.बी.बी.एस किया है और पिछले कुछ समय से मेरी पोस्टिंग असम के एक छोटे से कस्बे के सरकारी अस्पताल में हुई है और में यहाँ के ओर्थोपेडिक वॉर्ड में काम कर रही हूँ। दोस्तों शुरू से ही मेरे ऊपर मेरी सुंदरता को देखकर मरने वालों की कोई कमी नहीं रही है, कॉलेज के दिनों में भी मेरे पीछे बहुत लड़के पड़े थे और अब यहाँ के अस्पताल के भी कई डॉक्टर भी मुझ पर मरते है, लेकिन मेरी पसंद कुछ अलग किस्म की है। दोस्तों में उन परिंदों पर अपना रस न्योछावर करने में विश्वास नहीं करती, जिनका काम ही हमेशा फूलों का रस पीकर उड़ जाना होता है। अब तक मुझे मेरी पसंद का मुझे कोई भी लड़का नहीं मिला, पता नहीं क्यों मुझे कोई भी पसंद ही नहीं आता है? मेरे घरवाले भी मुझसे हमेशा बड़ा ही परेशान थे, वो कई लड़को की तस्वीरें भी भेज चुके थे, लेकिन मैंने उनको हमेशा ना कर दिया। फिर एक बार एक डॉक्टर अंधेरी जगह पर मुझे पकड़कर जबरदस्ती करने लगा, वो मेरे बूब्स को कसकर मसलने लगा था।

फिर में उसको धक्का मारकर उसकी गिरफ़्त से निकल गयी और फिर उसके बाद तो मैंने उसकी वो ठुकाई कि उसने मेरी तरफ देखना भी छोड़ दिया, लेकिन इतनी मगरूर लड़की आख़िर किसी के प्रेम में पड़ गयी और उस पर अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। फिर हुआ यह कि एक दिन में राउंड पर निकली थी, उस समय शाम के 6 बज रहे थे। अब मेरे साथ एक नर्स भी थी, हम दोनों एक-एक मरीज के पास जाकर उसको देख रहे थे। अब एक बड़ा सा हॉल था और कोने की तरफ हल्का सा अंधेरा था काम करते-करते में जब कोने की तरफ बढ़ी, तभी अचानक से किसी काम से मेरे साथ वाली वो नर्स वापस लौट गयी, जिसकी वजह से अब में अकेली ही थी और मेरे सामने बस एक आखरी मरीज ही था। दोस्तों उसके पैर में डिसलोकेशन था और फिर में उसके पास पहुँचकर मुआयना करने लगी थी। फिर चार्ट को देखते हुए मैंने उसकी तरफ देखा, वो करीब 30-32 साल का एक तंदुरुस्त नौजवान था और वो उस समय बिस्तर पर अपनी पीठ के बल लेटा हुआ था और उसने चादर को अपनी छाती तक ओढ़ रखा था। फिर उसकी रिपोर्ट देखते-देखते मेरी नजर उसकी कमर पर पड़ी, उसकी कमर के नीचे के हिस्से में चादर टेंट की तरह उठी हुई थी और उसके हाथ अपने लंड पर चल रहे थे।

फिर में कुछ पल तक एकटक उसके लंड की हलचल को देखती रही, अब वो मेरी तरफ दिखाता हुआ अपने लंड पर लगातार अपना एक हाथ चला रहा था। अब में एकदम घबरा गयी थी और भागती हुई उस कमरे से बाहर निकल गयी, मेरा बदन पसीने से पूरा भीग चुका था। दोस्तों में वहीं पास के एक क्वॉर्टर में रहती थी और सीधी घर जाकर ठंडे पानी से नहाई, पता नहीं क्यों मेरे मन में एक गुदगुदी सी होने लगी थी? और अब बार-बार मेरा मन मुझे वहीं पर खींचकर ले जा रहा था। फिर किसी तरह से मैंने अपने जज्बातों पर अंकुश लगाया, लेकिन जैसे-जैसे रात बढ़ती गयी, मेरा अपने ऊपर से काबू हटने लगा था और फिर आख़िर में तड़पकर वापस अस्पताल की तरफ बढ़ चली। दोस्तों उस समय रात के करीब 11 बज रहे थे, देर रात की वजह से चहल पहल बहुत कम हो चुकी थी। फिर में स्टाफ की नजरों से बचती हुई ओर्थोपेडिक वॉर्ड में घुस गई। फिर मैंने देखा कि ज़्यादातर मरीज उस समय सो गये थे, में इधर उधर देखती हुई आखरी पलंग पर पहुँच गई और मेडिकल कार्ड देखने लगी, मैंने देखा कि उस पर सूरज नाम लिखा था। फिर मैंने उसकी तरफ देखा, वो अब भी वापस उसी हालत में था, उसका लंड खड़ा था और वो उस पर अपना हाथ चला रहा था।

फिर में धीरे-धीरे आगे सरकती हुई उसके पास पहुँच गई तभी अचानक से उसने चादर के नीचे से अपना एक हाथ निकला और उसने मेरी कलाई को सख्ती से पकड़ लिया। अब मैंने अपना हाथ छुड़ाने की बहुत कोशिश कि, लेकिन उसके हाथ ने तो लोहे की तरह मेरी कलाई को जकड़ा हुआ था। फिर मैंने अपनी नजर को आसपास डाला, सब या तो सो रहे थे या सोने की कोशिश कर रहे थे। अब किसी को भी कोई खबर नहीं थी कि कमरे के एक कोने में क्या ज़ोर मशक्कत हो रही थी? फिर उसने मेरे हाथ को चादर के अंदर खींच लिया, तभी मेरा एक हाथ उसके तने हुए लंड से टकरा गया। अब मेरे पूरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ने लगी थी और उसने जबरदस्ती मेरे हाथ को अपने लंड पर रख दिया था। फिर मैंने हिचकते हुए उसके लंड को अपनी मुट्ठी में ले लिया, वो मेरे हाथ को ऊपर नीचे चलाने लगा था। अब मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मैंने अपनी मुट्ठी में कोई गरम लोहा पकड़ लिया हो, उसका लंड बहुत मोटा था, उसकी लंबाई कम से कम आठ इंच होगी। अब में उसके लंड पर अपना हाथ चलाने लगी थी, उसने धीरे-धीरे मेरे हाथ को छोड़ दिया, लेकिन में उसी तरह उसके लंड को अपनी मुट्ठी में सख्ती से पकड़कर ऊपर नीचे अपना हाथ चला रही थी।

अब कुछ देर के बाद उसका शरीर तन गया था और फिर थोड़ी देर के बाद उसने मेरे हाथों पर ढेर सारा चिपचिपा वीर्य निकाल दिया। तभी मैंने झट से उसका लंड छोड़ दिया और उस चादर से अपना हाथ बाहर निकाल लिया और देखा कि उस समय मेरा पूरा हाथ गाढ़े सफेद रंग के वीर्य से सना हुआ था। फिर उसने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चादर से साफ कर दिया, उसके बाद में अपना हाथ छुड़ाकर भाग गयी और घर पहुँचकर ही मैंने राहत की सांस ली। अब मैंने महसूस किया कि मेरी जांघो के बीच मेरी पेंटी गीली हो चुकी थी। फिर मैंने अपने हाथ को नाक के पास ले जाकर सूँघा, तो उसके वीर्य की गंध अभी तक मेरे हाथों में बसी हुई थी। अब मैंने एक उंगली को अपनी जीभ से छुआ, मुझे उसके वीर्य का स्वाद अच्छा लगा और अब तो में अपनी सभी उंगलियाँ ही चाट गयी। फिर में रातभर करवटें बदलती रही और अब मुझे जब भी झपकी आती, तब मुझे उसका चेहरा मेरे सामने नजर आ जाता था और फिर  वो मेरे सपनो में मेरे शरीर को मसलता रहा। फिर रातभर बिना कुछ किए ही में कई बार गीली हो गयी, पता नहीं उसमें ऐसा क्या था? जो मेरा मन बेकाबू हो गया था, जिसे जीतने के लिए अच्छे-अच्छे लोग अपना सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार थे, वो खुद आज पागल हो गयी थी।

फिर जैसे तैसे सुबह हुई, मेरी आंखे नींद और खुमारी से भारी हो रही थी, में जल्दी से तैयार होकर अस्पताल गयी और अपने काम पर निकली। अब में उसके पलंग तक नहीं जा सकी और फिर मैंने स्टाफ को बुलाकर उसके बारे में पूछा, तब मुझे पता लगा कि वो एक गरीब इंसान है और शायद उसके घर में कोई नहीं है, क्योंकि उसको मिलने कभी कोई नहीं आता था। फिर मैंने उसको डीलक्स वॉर्ड में शिफ्ट करने के ऑर्डर दिए और उस वॉर्ड का खर्चा अपनी जेब से भर दिया। अब सभी लोगों के सामने उसके पास जाने में मुझे हिचक हो रही थी और में तबीयत खराब होने का झूठा बहाना करके घर चली गयी। फिर शाम को अस्पताल जाकर पता लगा कि उसको डीलक्स वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया है। फिर में लोगों की नजर बचाकर शाम आठ बजे के आसपास उसके वॉर्ड में पहुँच गई। अब मैंने वहाँ पर मौजूद नर्स को मैंने बाहर भेज दिया और उसको बोली कि तुम खाना खाकर आओ, तब तक में यहीं हूँ। फिर वो खुशी-खुशी चली गयी, मैंने देखा कि मुझे अपने सामने देखकर सूरज मुस्कुरा रहा था और फिर में भी उसकी तरफ मुस्कुराते हुए उसके पास पहुँच गई। फिर मैंने उसको पूछा कि कैसे हो? तब उसने कहा कि तुम्हें देख लिया बस मेरी तबीयत अच्छी हो गयी।

अब उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरा चेहरा शरम से लाल हो गया और फिर उसने मेरा एक हाथ पकड़कर मुझे अपनी तरफ खीच लिया। अब में भी जानबूझ कर उसकी छाती से जा लगी, तभी उसने मेरे होंठो को अपने होंठो से छू लिया था। अब मेरा पूरा बदन थरथर काँप रहा था, मैंने भी अपने होंठ उसके होंठो से सटा दिए और में उसके होंठो को अपने होंठो में दबाकर चूसने लगी थी। अब उसके हाथ मेरे बूब्स पर आ गये और तब मुझे ऐसा लगा जैसे इन्हीं हाथों का मुझे अब तक इंतज़ार था। फिर मैंने उसके हाथों पर अपने हाथ रखकर अपने बूब्स को दबा दिया और अब वो भी मेरे बूब्स को दबाने लगा था। अब मेरे हाथ चादर के अंदर उसकी पेंट की चैन से उलझे हुए थे और फिर मैंने उसकी चैन को खोलकर अपने एक हाथ को अंदर डाल दिया। अब उसका लंड मेरे हाथ के स्पर्श से फनफना उठा था, में उसको बाहर निकालकर सहलाने लगी थी और फिर अपने हाथों से मैंने सहला सहलाकर उसका रस निकाल दिया था। अब मेरे हाथ दोबारा से गीले हो गये थे, वो मेरे बूब्स से खेल रहा था और में अपना हाथ बाहर निकालकर उसके सामने ही अपनी जीभ से चाटने लगी थी और मेरे हाथ में लगे उसके सारे वीर्य को अपनी जीभ से चाटकर साफ कर दिया था।

अब पूरा आधा घंटा हो चुका था, मैंने जल्दी से अपने कपड़े सही किए और फिर में नर्स के आते ही वहाँ से घर भाग आई। फिर अगले दिन नर्स को खाने पर भेजकर मैंने अंदर से कुण्डी बंद कर ली और जैसे ही में सूरज के पास आई, तब उसने मेरे चेहरे को चूम चूमकर लाल कर दिया। अब में उसका लंड पेंट से बाहर निकाल चुकी थी, इस बार उसने मेरे सर को पकड़कर अपने लंड पर झुका दिया। फिर मैंने शरारत से अपने होंठ भीच लिए, वो अपने लंड को मेरे होंठो पर रगड़ने लगा था। अब मेरे होंठ उसके वीर्य से गीले हो चुके थे, मैंने अपने होंठ खोलकर उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और फिर पहले धीरे-धीरे और बाद में ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड को में चूसने लगी थी। फिर बहुत देर तक मुख मैथुन करने के बाद उसने मेरे सर को पकड़कर अपने लंड पर दबा दिया। अब उसका लंड मेरे मुँह से होता हुआ मेरे गले के अंदर प्रवेश कर गया था, उसका लंड मेरे मुहं में जाकर अंदर की गरमी को पाकर अपना आकार बदलने लगा था। अब में साँस लेने के लिए छटपटा रही थी, तभी कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा जैसे कि उसके लंड से गरम-गरम लावा निकलकर मेरे गले से होता हुआ मेरे पेट में प्रवेश कर रहा है।

फिर मैंने अपने सर को थोड़ा बाहर की तरफ खीचा और मेरा पूरा मुँह उसके वीर्य से भर गया था और मेरे होंठो के कोनो से उसका वीर्य बाहर निकल रहा था। फिर मैंने प्यार से उसकी तरफ देखते हुए उसका सारा वीर्य अंदर गटक लिया, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी, इसलिए मैंने दौड़कर बाथरूम में जाकर अपना मुँह धोया और बाल और अपने कपड़े सही करके लौटी। फिर मैंने उसको कहा कि मुझे तो लगता है तुम मुझे मार ही दोगे और उसको यह बात कहकर मैंने उसको अपने से चिपकाकर उसके होंठो को चूम लिया। फिर थोड़ी देर के बाद नर्स भी आ गयी और अब इस तरह हर दिन जब भी मौका मिलता तब में लोगों की नजरों से बचकर अपने महबूब से मिलती रही। अब हम दोनों एक दूसरे को चूमते, सहलाने लगे थे और वो मेरे बूब्स को मसलता था, मेरे निप्पल से खेलता। अब में हर दिन मुख मैथुन से उसका रस लंड से बाहर निकाल दिया करती थी और अब मुझे उसका वीर्य बहुत अच्छा लगने लगा था, लेकिन उससे ज़्यादा हम वहाँ कुछ कर नहीं सकते थे, क्योंकि हमारे पकड़े जाने और बदनामी का डर भी था। फिर एक सप्ताह के बाद एक दिन में वहाँ पहुँची, तब मैंने देखा कि वो कमरा खाली था और तब पूछने पर मुझे पता लगा कि उसको डिसचार्ज कर दिया गया है।

फिर मैंने कमरे में उसकी हिस्ट्री शीट में सब जगह उसका पता जानने की कोशिश कि, लेकिन कुछ पता नहीं लगा। अब मेरी हालत पागलों जैसी हो गयी थी, जिससे मन लगाया वही आज मेरी बेवकूफी की वजह से मुझसे दूर हो गया था। फिर मैंने उसको हर जगह ढूँढा, लेकिन वो तो ऐसे गायब हुआ जैसे सुबह धुंध गायब हो जाती है। दोस्तों में अपने जीवन में पहली बार किसी लड़के के लिए रोई थी और मेरी सहेली रचना जो मेरे साथ उस एक ही क्वॉर्टर में रहती थी, उसने भी मुझसे बहुत बार पूछने की कोशिश कि, लेकिन मैंने किसी को भी कुछ नहीं बताया था। दोस्तों मैंने अपने जीवन में पहली बार किसी से प्यार किया था, वो लड़का ग़रीब था, लेकिन उसमे कुछ बात थी, जो उसको सबसे अलग करती थी। दोस्तों कुछ हो ना हो में तो अब उसको अंदर ही अंदर प्यार करने लगी थी और मेरे घरवाले भी मुझे अब शादी के लिए परेशान कर रहे थे, लेकिन मेरे घरवाले बड़े आज़ाद विचारों के थे और इसलिए उन्होंने मुझसे कह दिया था कि में जिसको चाहूँ अपनी पसंद से में उसके साथ शादी कर लूँ। अब में कभी-कभी सोचती थी कि क्या वो भी मुझे चाहता होगा? अगर हाँ तो फिर वो कभी मुझसे मिला क्यों नहीं? फिर धीरे-धीरे उस मुलाकात को 6 महीने गुजर गये और फिर अचानक से ही वो एक बार दोबारा मुझे मिला और दिन मुझे दीये तले अंधेरा वाली बात याद आई।

एक दिन में अस्पताल के लिए निकली तो अचानक से मुझे एक जाना पहचान चेहरा अस्पताल के सामने के बगीचे में काम करता हुआ नजर आया। तब मैंने उसको कहा कि सुनो माली और अब उसके घूमते ही में एकदम चकित रह गयी थी, क्योंकि अब मेरे सामने सूरज खड़ा था, मेरा पहला सच्चा प्यार, मेरा चैन। अब में एकटक बस उसको देख रही थी और तब उसने कहा कि मेडम और फिर सूरज ने मुझे सोते से जगाया और बोला कि में यहाँ माली का काम करता हूँ, आप अपने आपको संभालो, नहीं तो कोई भी आदमी इसका गलत मतलब निकाल सकता है। अब मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ और फिर मैंने उसको कहा कि तुम मुझे आज शाम को 6 बजे मेरे घर पर मिलना, मुझे तुमसे एक बहुत ज़रूरी काम है, क्यों आओगे ना? तुम्हें मेरी कसम है जरुर आना और फिर यह बात उसको कहकर में अपने आपको संभालती हुई तेज़ी से अस्पताल में चली गयी। अब मुझे पता था कि अगर मैंने पीछे मुड़कर देख लिया तो में अपनी रुलाई को नहीं रोक सकूँगी। फिर मेरा अस्पताल में मन नहीं लगा और में तबीयत खराब का बहाना बनाकर वहाँ से भाग निकली। अब आज मेरा किसी काम में मन नहीं लग रहा था, क्योंकि मुझसे मिलने शाम को सूरज आने वाला था और मुझे उसकी तैयारी भी पूरी करनी थी, वापसी में मुझे सूरज वहाँ नजर नहीं आया।

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फिर में बाज़ार जाकर कुछ सामान खरीदकर ले आई सामान में एक पतला सा रेशमी गाउन और खाने पीने का सामान और एक बोतल बियर की थी। दोस्तों एक लड़की के लिए बियर खरीदना कितना मुश्किल काम है आज मुझे पहली बार पता लगा था। फिर मैंने बड़ी मुश्किल से किसी को पैसे देकर एक बोतल बियर मंगाई थी, आज में उसका पूरी तरह से स्वागत करना चाहती थी। फिर में शाम चार बजे से ही अपने सच्चे प्यार के लिए तैयार होकर बैठ गयी और फिर मैंने हल्का सा श्रंगार करके पर्फ्यूम लगाया और फिर एक पारदर्शी ब्रा-पेंटी के ऊपर नया रेशमी गाउन पहन लिया, उस गुलाबी पतले गाउन को पहनना और नहीं पहनना बराबर था। अब बाहर से मेरा एक-एक अंग साफ नजर आ रहा था और बिस्तर पर सफेद रेशमी चादर बिछा दिया और पूरे कमरे में स्प्रे चारों तरफ कर दिया और कुछ रजनीगंधा की अगरबत्ती को पलंग के सिरहाने पर रख दिया। फिर करीब छे बजे तक तो में एकदम बेताब पागल हो चुकी थी और बार-बार घड़ी को देखती हुई में चहलकदमी कर रही थी। फिर छे बजकर दस मिनट पर दरवाजे की घंटी बजी, तब में दौड़कर दरवाजे पर चली गयी। अब में चाबी के छेद से देखकर ही दरवाजा खोलना चाहती थी, क्योंकि कोई और हुआ तो मुझे इस रूप में देखकर पता नहीं वो क्या सोचे? अब उसको देखकर मैंने दरवाजा खोलकर तुरंत उसका एक हाथ पकड़कर उसको अंदर खींच लिया।

अब में झट से दरवाज़ा बंद करके उसके साथ अच्छे से लिपट गयी थी और उसको चूमते हुए मैंने उसका पूरा मुँह भर दिया था और उसको बोली कि कहाँ चले गये थे? क्या तुम्हे मेरी एक बार भी याद नहीं आई? तब उसने कहा कि में यहीं था, लेकिन में जानबूझ कर ही आपसे मिलना नहीं चाहता था, कहाँ आप और कहाँ में? चाँद और सियार की जोड़ी कभी अच्छी नहीं लगती। तभी मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया और उसको बोली कि खबरदार जो मुझसे दूर जाने की भी बात तुमने सोची, अगर जाना ही था तो मेरे जीवन में तुम आए ही क्यों? हलचल पैदा करके भागने की सोच रहे थे और अब मुझे यह आप-आप कहना छोड़ो, तुम्हारे मुँह से तुम और तू अच्छा लगेगा। अब उसने कहा, लेकिन मेरी बात तो सुनिए, तब मैंने उसको कहा कि बैठ जाओ और यह बात कहकर मैंने उसको धक्का देकर सोफे पर बैठा दिया। अब मैंने मन ही मन निर्णय कर लिया था कि इतना सब होने के बाद अब में सूरज से कोई शरम नहीं करूँगी और में निर्लज होकर अपनी बात मनवा लूँगी। फिर में उठी और मैंने फ्रिज से बियर की बोतल को निकालकर उसका ढक्कन खोल लिया और फिर एक काँच के गिलास में निकालकर उसके पास आ गई। दोस्तों उस गिलास में उफनता हुआ झाग मेरे जज्बातों का उदाहरण पेश कर रहा था।

अब में उसको सटकर बैठ गयी और गिलास को मैंने उसके होंठो से लगा दिया, तब उसने मेरी तरफ देखते हुए मेरे हाथों से एक घूँट पी लिया। अब में उस गिलास को उसके हाथों में पकड़ाकर खड़ी हो गयी और उसको बोली कि तुम्हें मेरे यह बहुत अच्छे लगते थे ना? और मैंने अपने बूब्स की तरफ इशारा किया और उसके होंठो के बिल्कुल पास आकर पूछा कि खोलकर नहीं देखना चाहोगे? अब इससे पहले कि वो कुछ कहे मैंने खड़े होकर एक झटके में अपने गाउन को शरीर से अलग कर दिया। अब वो एकटक मेरे बूब्स की तरफ देख रहा था, में उसके पास आकर अपने दोनों पैरों को फैलाकर उसकी गोद में बैठ गयी और उसके सर को पकड़कर मैंने अपने एक बूब्स पर दबा दिया था। फिर मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा कि ब्रा भी खोल दो, लेकिन उसको कोई हरकत करता नहीं देखकर मैंने खुद ही अपनी ब्रा को अपने शरीर से अलग कर दिया था। अब में आज इतनी उत्तेजित थी की जरूरत पड़ने पर सूरज का रेप भी करने को तैयार थी। फिर मैंने उसको कहा कि देखो ये तुम्हारे होंठो के लिए कितने बेताब है और यह कहकर मैंने उसके होंठो से अपने निप्पल सटा दिए। अब पहले तो वो थोड़ा सा झिझक गया और फिर धीरे से उसके होंठ खुले और अब मेरा एक निप्पल उसके मुँह में प्रवेश कर गया।

अब वो अपनी जीभ से मेरे निप्पल के आगे के हिस्से को अपनी जीभ से गुदगुदाने लगा था। अब उसके यह सब करने की वजह से मेरे मुँह से आहह्ह्ह ऊह्ह्ह्हह प्लीज जैसी आवाजे निकलने लगी थी। फिर में उसी समय जोश में आकर उसके बालों में अपना हाथ फैरते हुए बड़बड़ाने लगी थी और में अब उसके दूसरे हाथ को अपने दूसरे बूब्स पर रखकर बूब्स को दबाने भी लगी थी। फिर कुछ देर के बाद उसने मेरे दूसरे निप्पल को अपने मुहं में भरकर उसको चूसना शुरू कर दिया। अब उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर लगातार घूम रहे थे और उसका वो स्पर्श इतना हल्का था मानो शरीर पर कोई रुई फैर रहा हो। फिर कुछ देर के बाद उसने अपना मुँह उठाते हुए कहा कि मेडम अब भी सम्भल जाइए, अब भी वक्त है, मुझमे और आपमे जमीन-आसमान का फर्क है। अब में उसके मुहं से यह बात सुनकर तुरंत ही एक झटके से उठी और अपने शरीर से मैंने आखरी कपड़ा भी उतार दिया और में उसको कहने लगी कि देखो इसकी एक झलक पाने के लिए कई लोग बैचेन रहते है और आज में खुद तुम्हारे सामने बिल्कुल बेशरम होकर नंगी खड़ी हूँ और तुम मुझसे दूर भागे जा रहे हो। फिर मैंने उसका एक हाथ पकड़कर उसको उठा दिया और खीचते हुए अपने बेडरूम में ले गयी। अब में उसको पलंग के पास खड़ा करके उसके कपड़ों पर टूट पड़ी थी, कुछ ही देर में वो भी मेरी ही हालत में आ गया था।

फिर में उसको धीरे से धक्का देकर बिस्तर पर लेटाकर उसके ऊपर चढ़कर बैठ गयी। अब में उसके शरीर के एक-एक अंग को चूमने, चाटने लगी थी और मैंने उसके निप्पल को अपने दाँतों से हल्के से काट भी दिया था। अब मैंने उसके होंठो से अपने होंठ रगड़ते हुए अपनी जीभ को उसके मुँह में डाल दिया और वो भी मेरी जीभ को चूसने लगा था। अब मेरे हाथ उसके लंड पर घूम रहे थे, मैंने अपना पूरा ध्यान उसके लंड की तरफ कर दिया था और फिर सबसे पहले मैंने उसके लंड को चूमा और फिर उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी। अब उसके लंड का आकार पहले से ज्यादा बढ़कर लंबा और मोटा हो गया था। उसका आकार देखकर एक बार तो में सिहर गयी थी कि यह दानव तो आज मेरी चूत को फाड़कर ही रख देगा और यह बहुत ही शैतान है, क्योंकि इसने मुझे ऐसा रोग लगाया है कि अब यह मेरा नशा बन गया है। फिर बहुत देर तक हम दोनों एक दूसरे के बदन से खेलते रहे, में उसकी तरफ देखकर बोली कि आज में अपना कौमार्या तुम्हें भेंट कर रही हूँ, मेरे पास इससे महँगी चीज कोई नहीं है, प्लीज़ आज मुझे एक लड़की से पूरी औरत बना दो।

फिर मैंने उसको सीधा लेटाकर उसका खड़ा लंड अपनी चूत के मुँह पर रखकर थोड़ा सा ज़ोर लगाया, लेकिन अनाड़ी होने की वजह से और मेरी चूत का आकार छोटा होने की वजह से उसका लंड अंदर नहीं जा सका था। अब मैंने दोबारा से अपनी कमर को उठाकर उसके लंड को अपने हाथों से पकड़कर अपनी चूत के खुले मुहं पर सेट किया और अपने शरीर को ज़ोर से नीचे किया, लेकिन दोबारा से उसका लंड फिसल गया। अब मैंने झुंझलाकर उसकी तरफ देखा और बोली कि कैसे आदमी हो? तब से में कोशिश कर रही हूँ और तुम चुपचाप पड़े हुए हो, क्या हो गया है तुम्हें? अब आख़िर उसने अपनी झिझक को ख़त्म करके मुझे बिस्तर पर पटक दिया था और फिर मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करके उसने सबसे पहले मेरी चूत को चूम लिया। फिर मैंने खुश होकर उसको कहा कि हाँ यह हुआ ना मेरे शेर, मसल दो आज तुम मुझे मेरी पूरी गरमी को निकाल दो। फिर बड़ी देर तक मेरी गीली चूत पर अपनी जीभ को फैरने अच्छी तरह से चूत को चूसने चाटने के बाद वो उठ गया। दोस्तों में तो उसकी जीभ से ही एक बार झड़ चुकी थी, उसने उसी समय मेरे दोनों पैरों को उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और अपने लंड को मेरी टपकती रसभरी चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया।

दोस्तों अब तो मेरे मुँह से उस दर्द की वजह से आह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊईईईई माँ की बड़ी तेज आवाज निकल गयी और में दर्द की वजह से छटपटाने लगी थी। अब उसका लंड अपना अंदर जाने का रास्ता बनाते हुए आगे बढ़कर मेरी चूत के आखरी हिस्से पर जाकर रुक गया था। फिर उसने बिना देर किए एक और ज़ोरदार धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से उसका पूरा लंड मेरी चूत के अंदर चूत को फाड़ता हुआ समा गया। अब मेरे मुँह से निकल गया ऊऊफ्फ्फ्फ़ क्या तुम आज मुझे मार ही डालोगे? ऊईईई माँ में मर गयी। अब में बुरी तरह से दर्द की वजह से तड़पने लगी थी, वो अपने लंड को पूरा अंदर डालकर कुछ देर वैसे ही रुक गया और फिर धीरे-धीरे मेरा दर्द गायब हो गया। फिर उसने अपने लंड को थोड़ा बाहर निकालकर वापस से अंदर डाल दिया और फिर तो उसने बहुत ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाए। अब में भी पूरे ज़ोर से नीचे से अपने कूल्हों को उठाकर उसका पूरा साथ देने लगी थी। अब उसका लंड अंदर बाहर, अंदर बाहर जबरदस्त धक्कों के साथ मेरी चूत में आने जाने लगा था। फिर करीब बीस मिनट के बाद उसने मेरी चूत के अंदर अपना ढेर सारा वीर्य निकाल दिया।

दोस्तों में तो अब तक तीन बार अपना पानी निकाल चुकी थी, वो उसी समय थककर मेरे बदन पर लेट गया और में तो उसकी मर्दानगी की कायल हो चुकी थी। फिर वो कुछ देर बाद मेरे पास में लेट गया और में उस हालत में उसकी छाती के ऊपर अपना सर रखकर उसकी छाती के बालों से खेलने लगी थी और अब वो भी मेरे सर के बालों से खेल रहा था। फिर मैंने उसको कहा कि तुम्हारा बहुत बहुत धन्यवाद में आज बहुत खुश हूँ, मुझे चोदने वाला एक जबरदस्त लंड है जिसके धक्के खाकर तो मेरी हालत पतली हो गयी, लेकिन खुश मत होना में आज सारी रात तुम्हारी बराबरी करूँगी। अब वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था, मैंने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा कि अब बोलो क्या तुम मुझसे प्यार करते हो? देखो यह चादर हम दोनों के मिलन की गवाह है, मैंने चादर पर लगे खून के धब्बों की तरफ इशारा किया था। फिर उसने अपना सर हाँ में हिलाया और फिर मैंने उसको पूछा क्या तुम मुझसे शादी करोगे? धत में भी कैसी पगली हूँ? आज तक मैंने तो तुमसे पूछा भी नहीं कि तुम शादीशुदा हो कि नहीं और अपना सब कुछ मैंने तुम्हें दे दिया।

फिर उसने अपने होंठो पर एक कातिल मुस्कान लाते हुए पूछा कहा कि अगर में कहूँ कि में शादीशुदा हूँ तो? तब मैंने उसको कहा कि तो क्या? वो मेरी किस्मत है, अब तो तुम ही मेरे सब कुछ हो, चाहे जिस रूप में मुझे स्वीकार करो मुझे उस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। अब उसको यह सभी बातें कहते हुए मेरी आंखे नम हो चुकी थी। फिर उसने हंसते हुए कहा कि जब तुमने सब कुछ सोच ही लिया तो फिर तुम जब चाहो फैरो का बंदोबस्त कर लो, में अपने घर भी खबर कर देता हूँ। अब मैंने खुश होकर उसको कहा कि हाँ जरुर और फिर मैंने अपने दोनों हाथ हवा में ऊँचे कर दिए और फिर उस पर में किसी भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी थी। अब इस बार उसने भी मुझे अपने ऊपर खीच लिया था और दोबारा से हमारे बीच एक और जोरदार चुदाई का दौर शुरू हो गया। दोस्तों इस बार में उसके ऊपर चढ़कर उसके लंड पर चढ़ाई कर रही थी, क्योंकि अब शरम किस लिए? वो तो अब मेरा होने वाला पति था। फिर कुछ देर तक मज़े करने के बाद वो मुझे घोड़ी बनाकर पीछे से अपना लंड डालकर धक्के मारने लगा था। अब मेरी नजर अचानक से सिरहाने की तरफ ड्रेसिंग टेबल पर लगे कांच पर गयी और मैंने देखा कि उस समय हमारी बड़ी ही शानदार जोड़ी लग रही थी।

अब वो खुश होकर पीछे से लगातार धक्के लगा रहा था और उन तेज धक्कों की वजह से मेरे बड़े आकार के बूब्स लगातार आगे पीछे होकर उछल रहे थे। फिर में कुछ देर बाद आसन को बदलकर कांच के सामने आ गयी थी और मैंने देखा कि उसका मोटा काला लंड मेरी चूत में जाता हुआ बहुत मस्त लग रहा था। अब में एक के बाद एक कई बार लगातार अपना पानी छोड़ रही थी, उसके बाद भी वो बहुत देर तक मेरी चुदाई करता रहा। फिर थोड़ी देर के बाद उसने अपना ढेर सारा वीर्य मेरी चूत में डाल दिया और उसका वीर्य मेरी चूत से उफनकर बिस्तर पर गिर रहा था। अब वो थककर मेरे ऊपर गिर पड़ा था और हम दोनों ही पसीने से लथपथ हो चुके थे, हमारी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी। फिर कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे को चूमते हुए ऐसे ही लेटे रहे, मैंने उसको पूछा कि तुम खुश तो हो ना? तब सूरज ने कहा कि तुम जैसा साथी पाकर कौन खुश नहीं होगा? हर बच्चा परी के सपने देखता है, लेकिन मुझे तो आज सच में परी मिल गयी है। फिर हम दोनों साथ-साथ नहाए और तैयार होकर फिर मैंने खाना बनाकर उसको अपने हाथों से खिलाया और उसने भी मुझे खिलाया।

फिर हम वापस बेडरूम में आ गये और फिर रातभर हमारा प्यार वैसे ही चलता रहा और सुबह होने तक तो उसने मेरा बड़ा बुरा हाल कर दिया था। अब मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मुझे चक्की में डालकर पीस दिया हो और मेरी चूत का हाल तो बहुत ही बुरा था, पहले ही मिलन में इतनी घिसाई तो उसकी हिम्मत तोड़ने के लिए बहुत थी। अब मेरी चूत लगातार उस ताबड़तोड़ चुदाई की वजह से लाल होकर सूज गयी थी और अब मुझे वहाँ पर फोड़े की तरह बड़ा तेज दर्द हो रहा था। फिर सुबह तक तो मेरे शरीर में उठकर खड़े होने की ताकत भी नहीं बची थी और सुबह के करीब छे बजे वो उठा और तैयार होकर मेरे घर से बाहर निकल गया, लेकिन जाने से पहले उसने मेरे होंठो पर एक चुंबन देकर मुझे उठाया था। फिर उस समय मैंने उसके सामने विनती करते हुए कहा कि अब तुम मुझे अकेला छोड़कर मत जाओ और तब उसने मुझसे कहा कि पागल लड़की है, पहले हमारी एक बार शादी हो जाने दे उसके बाद तू मुझे हमेशा के लिए बाँध लेना। फिर मैंने कहा कि अच्छा ठीक है, लेकिन अभी तुम मुझे सहारा देकर उठा तो सकते हो और तब उसने मुझे सहारा देकर उठाया।

फिर उसके जाने के बाद में सोफे पर ढेर हो गयी और बस उसी के साथ बिताई पूरी रात हर एक पल के बारे में सोचती रही, मेरी आँखों के सामने से उसका चेहरा जाने को तैयार ही नहीं था। फिर सुबह मुझसे मिलने मेरी एकमात्र सहेली रचना आ गई और उसने मेरी हालत को देखकर बड़े ही शरारती अंदाज में मुझसे पूछा कि क्या हुआ मेरी बन्नो रानी? तब मैंने सब सच सच उसको अपना पूरा हाल वो सभी बातें बताना शुरू किया और वो भी उन बातों को सुनकर बहुत खुश हुई। फिर एक ही महीनेभर के बाद हम दोनों ने एक सादे समारोह में एक मंदिर में जाकर शादी कर ली और तब मेरे घरवालों ने मुझे समझाने की बहुत कोशिश कि, लेकिन वो मेरा निश्चय देखकर शांत हो गये थे। फिर मैंने अपने तबादले के लिए भी बात चलाई जो कि बड़ी ही जल्दी मंजूर भी हो गया था। फिर नई जगह पहुंच जाने के बाद मैंने अपनी शादी की बात को सभी को बता दिया, लेकिन तब तक में पहले से ही तीन महीने की गर्भवती थी। फिर मेरी पक्की सहेली रचना ने भी मेरे साथ ही उसी जगह के लिए तबादला ले लिए जो कि मंजूर भी हो गया था। अब सूरज ने एक छोटी मोटी सी नर्सरी खोल ली है और अब हम दोनों अपने इस जीवन में बहुत खुश है।

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दोस्तों यह था मेरे जीवन का पूरा सच प्यार से शादी होने तक का एक एक हिस्सा जिसको आज मैंने आप सभी की सेवा में हाजिर किया है और अब में उम्मीद करता हूँ कि यह सभी पढ़ने वालों को जरुर पसंद आएगा।

धन्यवाद …

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