निम्मी आंटी की चुदाई

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प्रेषक : दीनू …

हैल्लो प्यारे दोस्तों, में एक सरकारी दफ्तर में ऑडिटिंग ऑफिसर हूँ और हमारे दफ्तर की शाखा पूरे भारत में है और अक्सर मुझे अपने काम की वजह से हर कभी दूसरे शहर की शाखा में दो, तीन महीनो के लिए जाना पड़ता है। एक बार मुझे अपने काम की वजह से नासिक जाना पड़ा, वहाँ पर मैंने एक दोस्त के अंकल के घर पर रहने का इंतजाम किया था। दोस्तों वो अंकल करीब 48 साल के थे और उनकी पत्नी निम्मी आंटी करीब 40 साल के करीब थी, वो बहुत सुंदर ना ज्यादा मोटी और ना ज्यादा पतली शरीर से बड़ी ही सेक्स महिला थी।

निम्मी आंटी के बूब्स कुल्हे नाक नयन बहुत आकर्षक थे, वो एक प्राइवेट बेंक में काम करती थी, वो बहुत ही अच्छे खुले विचार और खुले मन वाली सेक्सी महिला थी और उनका लड़का भी अभी कुछ समय पहले कहीं बाहर नौकरी करने लगा था। फिर जब में वहाँ पर पहुँचा तो उन दोनों लोगो ने मिलकर मेरी बहुत अच्छी तरह से खातिरदारी कि उस वक़्त अंकल अपनी कंपनी से एक महीने की छुट्टी लेकर अपने घर पर आए हुए थे और उनको अभी आए हुए करीब 10-15 दिन ही हुए थे। अब मेरी अंकल से बहुत अच्छी बनने लगी वो बहुत व्यहवारिक आदमी थे। दोस्तों वो दोनों अंकल और आंटी मेरा बहुत ध्यान रखते थे और मैंने महसूस किया कि आंटी बहुत ही ज्यादा खुले विचारों वाली महिला थी और इसलिए वो हमेशा मुझसे हंसकर बातें मजाक किया करती। फिर कभी कभी में उनसे दो मतलब वाली बातें भी करता, लेकिन वो उन बातों का मतलब समझकर भी मुझसे कुछ भी नहीं कहती और ना वो मुझसे नाराज होती और इसलिए में भी उनके साथ बड़ा ही खुश था। दोस्तों कुछ दिन हमारे साथ रहकर अंकल के वापस चले जाने से एक दिन पहले हम तीनो ने एक साथ बैठकर मिलकर शराब के मज़े लिए थे। फिर मैंने अंकल से डर संकोच की वजह से उस दिन सिर्फ दो पेग ही पिए थे, जबकी अंकल और निम्मी आंटी जी ने मिलकर उन दोनों ने करीब तीन तीन पेग ले लिए थे और फिर दूसरे दिन अंकल वापस अपनी नौकरी पर चले गये।

अब उस वजह से घर पर में और निम्मी आंटी ही रह गये और फिर हम दोनों हर दिन खाना खाने के बाद करीब 11:30 बजे रात तक इधर उधर की बातें किया करते थे, जिसकी वजह से अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बहुत ही खुल चुके थे। दोस्तों वैसे तो निम्मी आंटी भी बहुत पढ़ी लिखी साथ में खुले विचारों वाली महिला थी और बहुत सेक्सी भी थी, वो कभी कभी बातों बातों में मुझे सेक्सी चुटकुले भी सुना देती थी और फिर में भी कभी कभी उनके साथ दो मतलब की बातें कर लेता था, लेकिन वो इन सभी का कभी बुरा नहीं मानती थी। दोस्तों रात में वो कभी मेक्सी या छोटी स्कर्ट और टीशर्ट में होती थी। फिर जब वो मिनी स्कर्ट और टीशर्ट में होती थी, तब कभी कभी वो मनमोहक पर्फ्यूम लगाती थी, उस पर्फ्यूम की महक मुझे इतनी भाती थी कि मेरा जी करता था में उनको अपनी बाहों में लेकर चूमते हुए उनके पूरे शरीर की महक लेता रहूं। एक बार हम दोनों को दो दिन की छुट्टियाँ थी हमारा वो दिन तो बड़े आराम से गुजर गया, लेकिन उसी शाम को मेरा पीने का मुड हुआ और मैंने इस बारे में निम्मी आंटी से कहा कि आंटी जी में बाजार जा रहा हूँ और आप बुरा ना माने तो क्या में आज दारू पी सकता हूँ? तब वो बोली कि हाँ ठीक है आज मेरा भी मुड कुछ पीने का है इसलिए में भी तुम्हारे साथ बैठकर पीना चाहती हूँ।

फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है आंटी जी में बाजार से विस्की या रम की बोतल लेकर अभी आता हूँ और साथ ही साथ होटल से हमारे खाने का ऑर्डर भी कर देता हूँ। अब वो मुझसे बोली कि दिनु तुम दारू मत लाना क्योंकि रम की एक बोतल पहले से ही घर में है, तुम ऐसा करना कि होटल में खाने का ऑर्डर जरुर दे देना। फिर मैंने हाँ कहकर बाजार जाकर हमारे लिए खाने का ऑर्डर दे दिया और मैंने उस होटल वाले से कहा कि तुम ठीक 8:30 बजे खाना घर पर पहुंचा देना और फिर उसको इतना कहकर रास्ते में एक दुकान से गरमा गरम समोसे लेकर में वापस आ गया और जब में अपने घर पर पहुँचा तब मैंने देखा कि निम्मी आंटी उस समय नहाकर काले रंग की मिनी स्कर्ट और पीले रंग की टीशर्ट पहने हुई थी और उन्होंने हल्का सा मेकअप भी किया हुआ था। दोस्तों आज उन्होंने बहुत ही अच्छी खुशबु वाला पर्फ्यूम लगाया हुआ था, जिसकी महक पूरे घर में फैलकर मेरे मन में कुछ अलग सी उमंग, तरंग पैदा करने लगी थी। फिर वो रसोई में जाकर रम की बोतल और दो गिलास लेकर आ गई, उसके बाद उन्होंने हम दोनों के लिए पेग बनाए और उस समय वो मेरे ठीक सामने बैठी हुई थी। अब हम दोनों अपने अपने गिलास उठाकर पीने लगे, तभी दारू को पीते पीते मैंने उनको कहा कि निम्मी आंटी क्या बात है? आज आप बहुत ही सुंदर दिख रही हो।

अब वो कहने लगी कि ऐसा कुछ भी खास नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो, मेरा बस ऐसे ही मन हुआ तो में थोड़ा सा तैयार हो गई। फिर मैंने उनको कहा क्यों आज आपने पर्फ्यूम भी बहुत उत्तेजित करने वाला लगाया हुआ है? तब वो मेरी उस बात को सुनकर केवल मुस्कुराकर रह गयी, लेकिन उन्होंने मुझसे कुछ भी नहीं कहा और तब मैंने उनसे कहा कि निम्मी आंटी जी आज आप अपने इस चेहरे पर थोड़ा सा काजल लगा लीजिए कहीं आपको मेरी नज़र ना लग जाए। अब वो यह बात सुनकर मुस्कुराते हुए कहने लगी अरे तुम यह कौन सी दुनिया में हो इस जमाने में नज़र वैगेराह नहीं लगती है, वैसे भी अपनों से क्या शरम? अब वो मुस्कुराते हुए उसी समय अपने दोनों पैरों को पहले से ज्यादा फैलाकर इस तरह से बैठ गयी कि मुझे उसकी उस स्कर्ट से सफेद रंग की पेंटी अब साफ साफ दिखाई देने लगी थी। फिर बातें करते करते हम दोनों दो दो पेग पूरे पी चुके थे, इतने में दरवाजे पर लगी घंटी बजी और उसकी आवाज को सुनकर में झट से उठकर दरवाजा खोलने चला गया। अब मैंने देखा कि वो एक होटल का लड़का था जो हमारे लिए खाना लेकर आया था। फिर मैंने जब उसके हाथ से खाना लेकर दरवाजा बंद करके में वापस कमरे में आया तब मैंने देखा कि निम्मी आंटी अपनी उस जगह पर नहीं थी, वो पता नहीं कब कहाँ उठकर चली गई?

मैंने रसोई में जाकर खाना रखा तब देखा कि रसोई में भी निम्मी आंटी नहीं थी और अब मैंने सोचा कि वो शायद टॉयलेट में गयी है? फिर यह बात सोचकर में वापस आकर उसी सोफे पर बैठ गया। फिर कुछ देर के बाद वो भी आकर मेरे सामने बैठने की बजाए वो अब मेरे पास में बैठ गई, उस समय में टीशर्ट और बरमुडा पहने हुए था। अब बातें करते करते हम लोगो ने करीब दो और भारी उसके बाद एक हल्का पेग लगा लिया था और हम दोनों पेग पीते पीते जब बातें कर रहे थे, तब उनकी एक हाथ की हथेली मेरे पैर की जाँघो पर थी। फिर जब हम किसी चुटकुले पर हंसते तो वो अपने हथेली से मेरी जांघो को दबा भी देती थी और कभी कभार तो उसका एक बूब्स मेरे कंधों को भी स्पर्श हो जाता था। फिर जब हम दोनों को दारू का नशा चढने लगा, तब हम दोनों ने उठकर सबसे पहले खाना खाया और फिर मैंने उसके बाद अपने कमरे में जाकर अपने बरमुडे से अपनी अंडरवियर को निकालकर मैंने दोबारा वापस अपना वो बरमुडा पहन लिया। दोस्तों ऐसा मैंने इसलिए किया क्योंकि रात में सोते समय हमेशा में अंडरवियर को उतारकर ही सोता था और अब मुझे नींद ना आने की वजह से में अब टीवी को चालू करके उस पर फिल्म देखने लगा। अब इतने में निम्मी आंटी भी मेरे कमरे में आकर मेरे पास में बैठकर टीवी देखने लगी और वो मुझसे बोली कि पता नहीं आज मुझे नींद क्यों नहीं आ रही है?

दोस्तों मैंने देखा कि उसने अभी तक अपने कपड़े नहीं बदले थे, वो अब भी अपनी छोटी स्कर्ट और उसी टीशर्ट में थी। दोस्तों वो फिल्म इतनी अच्छी और सेक्सी थी कि में फिल्म को देखने में बहुत व्यस्त था कि तभी उसी समय मुझे मेरी जांघ पर सहलाते हुए किसी की हथेली महसूस हुई और मेरा ध्यान उस फिल्म से तुरंत भटक गया। अब मैंने अपनी तिरछी नजर से देखा कि निम्मी आंटी मेरी जांघो पर अपनी हथेली को घुमा रही थी, लेकिन में उसी तरह से बैठा रहा जैसे में फिल्म को देखने में बहुत मगन हूँ। फिर कुछ देर के बाद मैंने भी थोड़ी सी हिम्मत करके उसके घुटनो पर अपनी एक हथेली को रख दिया, लेकिन उसने तब भी मुझसे कुछ नहीं कहा और वो मेरी जांघो को सहलाते हुए अब कभी कभी मेरे लंड को बरमुडे के ऊपर से सहलाने लगी थी। फिर उसकी इस हरकत से मेरा लंड अब बरमुडे के अंदर ही तंबू की तरह तन चुका था और इधर अब भी उसकी वो हरकत जारी थी और उधर में फिल्म को बहुत मगन होकर ध्यान से देखने का नाटक करने लगा। फिर करीब 12:30 बजे अचानक वो फिल्म बंद हो गयी और कुछ पलों में दूसरी फिल्म चालू हो गयी, तब हमे लगा कि शायद केबल वाले कोई फिल्म का ट्रेलर दिखा रहे होंगे, लेकिन कुछ उसी पलों में सेक्सी द्रश्य आने लगे और चुदाई के द्रश्य देखकर हम दोनों ने एक दूसरे से नज़र मिलाई।

अब निम्मी आंटी मेरी तरफ मुस्कुराकर बोली कि हर रात्रि में यह कुछ सेक्सी फिल्म दिखाते है और फिर वो मुझसे बोली कि तुम शरमाओ मत तुम कोई छोटे बच्चे थोड़ी हो देख लो और फिर हम दोनों उस फिल्म देखने लगे और उस फिल्म को देखते देखते हम दोनों अब पूरी तरह से गरम हो चुके थे। दोस्तों जिसकी वजह से अब उसकी हथेली मेरे बरमुडे के ऊपर से मेरे तनकर खड़े लंड को सहला रही थी। फिर में भी अब हिम्मत करके उसकी भरी हुई गोरी गोरी जांघो को सहलाने लगा और करीब दस मिनट के बाद केबल वाले की बिजली चली गई होगी और इसलिए केबल बंद हो गया। अब मैंने उठकर टीवी को बंद किया और जब में वापस अपनी जगह पर आने लगा उसी समय मैंने देखा कि वो अब अपने दोनों बूब्स को दबा रही थी। फिर उसके पास जाकर बैठकर मैंने पहले तो उसकी टीशर्ट को उतारा और फिर मैंने ब्रा को भी उतारकर उसको कमर के ऊपर तक पूरा नंगा कर दिया और में खुद भी अपनी कमर के ऊपर से नंगा होकर कभी उसके होंठो को चूसने लगता था तो कभी उसके बूब्स को। फिर साथ ही साथ मैंने उसकी मिनी स्कर्ट को ऊपर करके उसकी सफेद रंग की पेंटी को एक तरफ करके में अपने एक हाथ से उसकी चूत के दाने और फांको को सहलाना शुरू किया।

अब अपनी बीच की उंगली को मैंने उसकी चूत के अंदर डालकर में अपनी उंगली से चुदाई करने लगा और इधर वो आहें भरते हुए मेरे लंड को सहलाने लगी। दोस्तों यह काम हम लोगो ने करीब 10-15 मिनट तक किया और फिर उसने जोश में आकर मेरा बरमुडा खोलकर मुझे पूरा नंगा कर दिया और मैंने उसकी स्कर्ट और पेंटी को उतारकर उसको नंगा कर दिया। अब में सोफे से उठकर ज़मीन पर बैठकर उसके दोनों पैरों को फैलाते हुए उसकी चूत के दाने को बहुत ज़ोर से रगड़ रगड़कर चाट रहा था और अपने दूसरे हाथ से में उसके एक बूब्स को दबा भी रहा था। फिर में उसके बीच बीच में उसकी चूत की फांको के चारों तरफ से अपनी जीभ को भी घूमा रहा था। फिर जब में अपने होंठो के बीच उसकी चूत के दाने को दबाकर खींचता तो वो बहुत उत्तेजित होकर मेरे सर को अपनी चूत की तरफ दबाते हुए सिसकियाँ भरने लगी ऊफफफ्फ़ वाह बहुत अच्छे मेरे दिनु राजा मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, आईईईईईई आज तक किसी ने मेरी चूत को इस तरह से नहीं चूसा। अब वो मेरे सर को अपनी चूत पर दबाव डालते हुए बोली और ज़ोर से चूसो में पागल हो रही हूँ, मार दिया दिनु तूने आज तो तुम तो बहुत अच्छे चूत चटाई करते हो उफफफ्फ़ आईईईईई और इधर उसकी सिसकियाँ लगातार चल रही थी और उधर मेरी जीभ उसकी चूत की बड़ी बड़ी फांको को चूस और चाट रही थी।

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फिर मैंने करीब दस मिनट तक उसकी चूत चटाई कि इस बीच उसकी चूत ने अब सिकुड़न पैदा करते हुए, अपनी चूत रस को मेरे मुहं में डाल दिया। दोस्तों उसका रस गाड़ा और बड़ा ही चिपचिपा सा था, में उठकर खड़ा हो गया और वो भी सोफे से उठकर ज़मीन पर अपने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को अपने एक हाथ से सहलाते हुए, लंड के टोपे के ऊपर की चमड़ी को अब आगे पीछे करते हुए टोपे को घुंघट के अंदर से बाहर करते हुए बोली, वाह जानू तुम्हारा लंड बहुत मोटा और लंबा है वाह आज तो मुझे बहुत मज़ा आ जाएगा इसके साथ अपनी चुदाई करवाने में। फिर वो मेरे लंड को करीब पांच मिनट तक सहलाती रही और फिर लंड के टोपे को नंगा करके अपने मुहं में लेकर धीरे धीरे चूसने लगी ऊफफफ्फ़ वाह क्या कमाल की मुख चुदाई कर रही थी मुझे उसकी वजह से बड़ा ही मस्त मज़ा आ रहा था जिसकी वजह से में बहुत जोश में था। अब मैंने उसके सर को पकड़कर उसके मुहं में अपना पूरा लंड डालना चाहता था, लेकिन वो अपने मुहं में पूरा लंड नहीं ले सकी। फिर कुछ देर बाद मैंने उसके दोनों बूब्स के बीच में लंड को रख दिया। अब उसने अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स को एक दूसरे से दबाकर मेरे लंड को अपने बड़े आकार के बूब्स के अंदर छुपा लिया और में अब बूब्स के बीच अपने लंड को डालकर उनके बूब्स की चुदाई करने लगा।

फिर कुछ देर बाद में सोफे पर बैठ गया और वो उठकर मेरे दोनों पैरों के बीच में आकर मेरे लंड के टोपे को अपनी चूत के मुहं पर रखकर धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी। दोस्तों शुरुआत में उसको लंड को अपनी चूत में लेते हुए थोड़ी सी तकलीफ़ महसूस हो रही थी, लेकिन फिर वो मज़े लेते हुए सिसकियाँ भरते हुए अपनी गांड को ऊपर नीचे करते हुए लंड को फचा फक चूत मे लिए जा रही थी। अब तक उसकी चूत ने इतना पानी छोड़ दिया था कि पूरे कमरे में उस समय चुदाई ही चुदाई की आवाज़े गूँज रही थी और इधर वो अपनी गांड को उठा उठाकर मेरे लंड को घपाघप अपनी चूत में लिए जा रही थी और उधर में उसकी गांड में अपने एक हाथ की बीच की उंगली को उसकी गांड में डाले हुए था और में अपने दूसरे हाथ से उसके एक बूब्स को दबा रहा था। अब मेरी उंगली उसकी गांड में करीब दो इंच तक अंदर जा चुकी थी, जिसकी वजह से वो आहें भरते हुए कह रही थी ऊऊईईईई ऊफफ्फ़ मुझे बहुत मज़ा आ रहा है आह्ह्ह वाह क्या मस्त लंड है तुम्हारा में मरी। फिर वो हाफते हुए अपनी चूत को सिकोड़ते हुए झड़ने लगी थी और उसकी चूत की दीवारे मेरे लंड को मजबूती से जकड़े हुए फूल और पिचक रही थी।

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फिर कुछ देर तक तो वो मेरे लंड को चूत में लिए हाफते हुए पड़ी रही, जब वो थोड़ा शांत हुई तब वो सोफे पर जाकर बैठ गयी। अब में उठकर ज़मीन पर खड़ा हो गया और मैंने उसको कुतिया की तरह इस तरह से खड़ा किया कि उसके एक हाथ की कोहनी सोफे पर थी और एक पैर के घुटनों को सोफे पर रखा था और उसका दूसरा पैर अब ज़मीन पर था। अब इस तरह वो कुतिया मुद्रा में हो गयी और मैंने भी उसके पीछे जाकर अपना एक पैर सोफे पर और अपना दूसरा पैर ज़मीन पर रखकर में पीछे से उसकी कमर को पकड़कर उसकी चूत में अपना लंड डालकर घुड़ चुदाई या आप कह सकते है कि में उनको कुत्तो के आसन में धक्के देकर चोदने लगा। फिर थोड़ी देर बाद वो दोबारा से गरम हो गयी थी और मेरे हर एक धक्को से वो करहाते हुए बोले जा रही थी ऊऊह्ह्ह ओह्ह्ह क्या मस्त मज़ा आ रहा है? ऊऊफफफफ्फ़ हाँ बस ऐसे ही लगातार चोदो मेरी जान जमकर चोदो आज मेरी शादी को इतने साल हो गए है, ऐसे इतने मज़े देकर मुझे किसी ने नहीं चोदा तुम वाकई में बहुत बड़े चुदक्कड़ हो, तुम्हे देखते ही मेरी नज़रों ने पहली बार में ही भाँप लिया था कि तुम बड़े मस्त तरीके से चुदाई करते हो, ऊऊहह हाँ और ज़ोर ज़ोर से चोदो मेरे राजा ऊफफफ्फ़।

अब में भी पूरे जोश में आकर लगातार जोरदार धक्के देकर उसकी चूत को चोदे जा रहा था, वो कुछ ही देर में एक बार फिर से झड़ गयी और वो अब हाफने लगी, मैंने उसकी चूत से अपने लंड को बाहर निकालकर एक बार फिर से उसकी चूत रस से साना हुआ लंड उसके मुहं में डाल दिया। अब वो दोबारा से मेरे लंड को चूस चूसकर अपना चूत रस पी गयी, कुछ देर बाद मैंने उसको सोफे के किनारे पर बैठा दिया, वो किनारे का सहारा लेकर दोनों पैरों को फैलाकर बैठ गयी। फिर में भी उसके सामने बैठ गया, मेरा एक पैर और गांड सोफे पर थी और मेरा दूसरा पैर घुटनों के बल मोड़कर ज़मीन पर रख दिया। अब निम्मी आंटी को थोड़ा आगे सरकाकर उसके दोनों पैरों को फैलाकर जाँघो के ऊपर रखकर उसकी चूत में अपने लंड को मैंने डाल दिया और चुदाई करने लगा। दोस्तों इधर में अपनी गांड को उठा उठाकर उसकी चूत में अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था और उधर वो भी अपनी कमर को हिला हिलाकर मेरा साथ देते हुए बड़े मज़े से मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर ले रही थी। फिर उस समय हम दोनों ने अपने अपने दोनों हाथों से सोफे का सहारा लिया हुआ था, में लगातार धक्के देकर उसकी चुदाई करने लगा और कुछ देर बाद मैंने चुदाई की मुद्रा बदली।

अब में सोफे पर अपने शरीर के एक हिस्से के बल लेट गया और उसको मैंने अपने आगे लेटाकर उसके एक पैर को ऊपर उठाकर उसकी चूत में लंड डालकर धक्के देकर चोदने लगा, कुछ ही मिनट में वो एक बार फिर से गरम हो गयी और ऊफफफ्फ़ ऊऊहहह्ह्ह कहते हुए वो करहाने लगी और साथ ही साथ अपने एक हाथ से अपनी चूत के दाने को सहलाते हुए वो मुझसे कहने लगी, हाँ और ज़ोर से चोदो मुझे और ज़ोर से ऊफफ्फ़ बड़ा जालिम और दमदार लंड है दिनु तुम्हारा, तुम्हारे लंड को पाकर तुम्हारी पत्नी हमेशा बड़ी खुश रहेगी उफफफ्फ़ ऊहह काश मेरी शादी तुमसे हुई होती ओह्ह्हह मेरी तो किस्मत ही खुल जाती। फिर में हर समय तुमसे अपनी चुदाई के मज़े लेती हम दोनों मिलकर मस्त मज़े करते। अब में बोली कि निम्मी डार्लिंग तुम अब इस बात की बिल्कुल भी चिंता मत करो क्योंकि अब में जब तक यहाँ पर रहूँगा तब तक में हमेशा तुम्हारी ऐसे ही जमकर चुदाई करता रहूँगा और में उसके साथ बातें करते हुए भी कस कसकर मेरे लंड को उसकी चूत में फका फक अंदर बाहर करने लगा पूरा कमरा चुदाई की आवाज़ से गूँज उठा था। फिर कुछ ही देर में हम दोनों झड़ गए और थोड़ी देर तक में उसकी चूत में अपने लंड को डाले ही उसी मुद्रा में पड़ा रहा और हम दोनों उस समय पसीने से लथपथ हो चुके थे और हम हाफते हुए लंबी लंबी साँसे ले रहे थे।

अब थोड़ी देर के बाद जब हम दोनों शांत हुए तब मैंने अपना आधा मुरझाया हुआ लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया, उसकी चूत फड़फड़ाते हुए लंड रस और चूत रस का मिश्रण बाहर फेकने लगी और वो मिश्रण बहता हुआ उसकी गांड की दरारों की और बहने लगा, ऊफफ्फ़ वाह क्या मस्त मनमोहक द्रश्य था। फिर वो उठकर बाथरूम में जाकर पेशाब करने चली गयी और में भी उसके पीछे जाकर पेशाब करने लगा और उसने वहां पर जाते ही सबसे पहले अपनी चूत और गांड को पानी से बहुत अच्छी तरह से साफ किया और फिर वो उसके बाद अब मेरे लंड को भी पानी डालकर अच्छे से साफ करने लगी। फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों उसके कमरे में जाकर नंगे ही एक दूसरे से लिपटकर सोने की तैयारी करने लगे, वो तो आज मेरा विशाल दमदार लंड पाकर निहाल हो चुकी थी और में भी उस जैसी चुदक्कड़ औरत का साथ पाकर बड़ा खुश था। अब वो मुझसे बोली कि दिनु राजा आज तक मैंने अपने पति के अलावा किसी से नहीं चुदवाया था, पता नहीं मुझे तुम्हारे अंदर ऐसा क्या महसूस हुआ? जिसकी वजह से में तुम्हारी तरफ आकर्षित होने लगी और फिर तुमसे अपनी चूत की चुदाई करने की इच्छा भी मेरे मन में होने लगी थी और वो आज पूरी हो चुकी है, तुम वाकई में बहुत अच्छे अनुभवी ठीक तरह से चुदाई करते हो तुम्हारी चुदाई से मुझे बहुत मज़ा आया।

अब मैंने कहा कि निम्मी रानी तुमने भी तो मेरा गजब का साथ दिया, जिसकी वजह से मुझे भी मज़ा आ गया और थोड़ी देर उसके शरीर की गरमी को पाकर मेरा लंड एक बार फिर से तनतनाने लगा, उस बात को वो अच्छी तरह से भाँप चुकी थी कि में उसकी और भी चुदाई करना चाहता हूँ। अब इसलिए वो मुझसे कहने लगी कि दिनु जान मेरी चूत अब बहुत थक चुकी है हम अब कल सुबह चुदाई करें तो ठीक रहेगा। फिर में उसको बोला कि निम्मी मेरी जानू मुझे तुम एक बात बताओ कि प्यास तो मुझे अभी लगी है और तुम मुझे पानी कल सुबह पिलाओगी तो कैसे काम चलेगा? अब वो मुझसे बोली कि सही में डार्लीग मेरी चूत में अब तुम्हारे लंड को सहने की इतनी ताकत नहीं है। अब में उसको बोला कि इसका भी मेरे पास एक उपाय है जिसकी वजह से तुम्हारी चूत को भी बड़ा आराम मिलेगा और साथ ही साथ मेरी प्यास भी बुझ जाएगी। अब वो मुझसे पूछने लगी कि वो कैसे मेरे राजा? तब में उसको बोला कि तुम्हारी गांड मारकर, वो मेरी यह बात सुनकर एकदम से डर गयी और कहने लगी कि दिनु मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई और एक बार मेरे पति ने इस काम को करने की कोशिश जरुर की थी, लेकिन उनका थोड़ा सा लंड मेरी गांड में घुसते ही मुझे बड़ा तेज दर्द हुआ था।

फिर में उसके बाद करीब तीन-चार दिन तक ठीक तरह से ना चल पा रही थी और ना ही में पोट्टी कर सकी। अब मैंने उसको कहा कि तुम बिल्कुल भी मत डरो क्योंकि में बड़े धीरे धीरे से तुम्हारी गांड मारूँगा जिसकी वजह से तुम्हे भी बड़ा मज़ा आएगा और उसके बाद से फिर तुम हमेशा मुझसे अपनी गांड मरवाना चाहोगी, लेकिन वो अब भी घबराते हुए बोली कि हाँ ठीक है, लेकिन धीरे धीरे करना। फिर में अब उठकर पास में रही एक टेबल से बालों में लगाने वाले तेल की बोतल को लेकर आया और मैंने उसको पेट के बल लेटाकर बहुत सारा तेल उसकी गांड के छेद पर लगाकर अपनी एक उंगली को धीरे धीरे गांड में डालकर उसकी गांड को चौड़ा किया, जिसकी वजह से उसको थोड़ा बहुत दर्द हुआ, लेकिन वो कुछ नहीं बोली। अब मैंने उसको पूछा क्यों मेरी रानी दर्द हो रहा है? तब वो कहने लगी नहीं मेरे राजा और फिर मैंने उसकी गांड के छेद को फैलाकर थोड़ा सा और भी तेल उसकी गांड में डालकर उसकी गांड को पूरा चिकना करके अपने लंड को भी तेल लगाकर बहुत चिकना करके उसके दोनों पैरों के बीच में आकर। अब मैंने उसको कहा रानी तुम अपने दोनों हाथों से अपनी गांड को पकड़कर फैला दो और फिर उसने भी ठीक वैसे ही किया, तब मैंने 5-6 बार अपने लंड के टोपे को उसकी गांड के छेद पर रगड़कर टोपे को गांड के छेद में रखकर थोड़ा दबाव दिया।

अब फक से मेरा टोपा अंदर घुस गया और टोपा घुसते ही उसने अपनी गांड को सिकोड़ लिया जिसकी वजह से मेरा टोपा झट से उसकी गांड से बाहर आ गया, मैंने उसको पूछा क्यों क्या हुआ? वो बोली कि थोड़ा सा दर्द हुआ राजा। फिर मैंने उसको कहा कि बस इतना सा ही दर्द होगा ज़रा तुम इसको सहन करो और फिर मैंने अपने टोपे पर उसकी गांड पर दोबारा से तेल लगाकर टोपे को गांड के छेद पर रखकर हल्का सा दबाव डाला। अब फक से टोपा अंदर घुस गया, मैंने बिना देर किए और दबाव डाला तो आधा लंड उसकी गांड में घुस गया, वो दर्द की वजह से चिल्लाते हुए बोली आह्ह्ह्ह् माँ मार दिया रे लगता है आज मेरी गांड फट गयी और किसी ने गरम गरमा लोहा मेरी गांड में डाल दिया हो प्लीज़ बाहर निकालो। अब मैंने उसको कहा कि रानी घबराव मत अभी थोड़ी देर में दर्द खत्म हो जाएगा और फिर तुम्हे उसके बाद बड़ा मस्त मज़ा आएगा, थोड़ी देर ऐसे ही में उसकी गांड में लंड डाले पड़ा रहा और फिर जब उसका दर्द कम हुआ तब मैंने जोश में आकर एक ज़ोरदार कसकर धक्का मारा। अब मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी गांड में घुस गया और मेरे आंड उसकी चूत से जा लगे।

अब वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी उसकी आँखों से आँसू भी निकल आए थे, वो बोली कि मादरचोद मैंने पहले ही कहा था कि गांड मत मार यह फट जाएगी, लेकिन तुम भोसड़ी की गांड फाड़कर ही दम निकाल लिया, बहनचोद पहले तो मेरी चूत को अच्छे से ठोक दिया और अब गांडू चुतिया मदरचोद भोसड़ी के बहनचोद मेरी गांड भी फाड़ डाली। अब में तेरी रंडी बन गई हूँ जो मैंने इस गांडू को अपनी गांड को मरवाने दिया तुम्हारी इसमे कोई गलती नहीं है सब मेरी ही गलती थी, क्योंकि मेरी ही गांड में खुजली थी जो इस जालिम लंड को लेने के लिए मचल रही थी। फिर यह सब कहते हुए वो थोड़ी देर बाद शांत हो गई, उसका दर्द धीरे धीरे खत्म हो रहा था और उसकी गालियों के बदले मैंने कोई प्रतिक्रिया ना करके ऐसा ही पूरा लंड उसकी गांड में डाले पड़े रहने दिया। फिर थोड़ी देर बाद में धीरे धीरे गांड से आधा लंड निकालकर एक बार फिर से उसकी गांड में डाल देता, मेरी इस क्रिया पर उसको अब मज़ा आने लगा था। फिर वो कहने लगी गांडू अब क्यों धीरे धीरे डाल रहा है? जब धीरे धीरे डालने का समय था तब बहनचोद ज़ोर से धक्का मारकर इस बेशरम रंडी की गांड में डाल दिया और अब इस गांड को जब तेरे लंड की ज़रूरत है, तब धीरे धीरे डाल रहा है, मादरचोद ज़ोर ज़ोर से गांड मार।

फिर में अब धनाधन अपनी कमर को उठा उठाकर धक्के मारकर उसकी गांड को धक्के मारने लगा, जिसकी वजह से उसको भी मज़ा आ गया और थोड़ी देर बाद मैंने उसकी गांड में अपना लंड रस डाल दिया और जब लंड को गांड से बाहर निकाला तब आवाज़ करता हुआ गांड से लंड बाहर निकल गया, जैसे किसी बोतल के मुहं में फंसी उंगली बाहर आ जाती है और वो पूछ पुच की आवाज़ करती है। अब उसकी गांड से लंड रस और थोड़ा सा खून का मिश्रण बाहर निकलता हुआ चूत में सामने आने लगा। फिर हम दोनों ऐसे ही लेट गये में उसकी अब तीन-चार महीनो तक हर रोज चार-पांच चुदाई करता उसकी चुदाई के मस्त मज़े लेता और हर बार उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया। दोस्तों यह थी मेरी वो सच्ची मस्त मज़ेदार चुदाई की घटना मुझे उम्मीद है कि सभी पढ़ने वालो को यह जरुर पसंद आई होगी ।।

धन्यवाद …

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