रंडी माँ का खेत में ग्रुप सेक्स

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, मेरी मम्मी मेरे चाचा के साथ चुदाई का खेल शुरू करती है और मम्मी ने मेरे चाचा के साथ अपनी जमकर चुदाई के मज़े लिए। उन दोनों की चुदाई को देखकर मेरी आखें पहली बार तो फटी की फटी रह गई और मुझे बिल्कुल भी विश्वास नहीं था कि ऐसा भी कभी यह दोनों मिलकर कर सकते है, लेकिन उन दोनों ने तो सारी हदें पार कर दी और मुझे भी उनकी चुदाई देखकर बड़ा मस्त मज़ा आया और वो सब देखकर मेरी चूत ने जोश में आकर गीली होकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया। मुझे भी मेरी चूत में लंड लेकर अपनी प्यास को बुझाने की इच्छा होने लगी और मैंने अपनी चूत में वो सब देखकर ऊँगली करना शुरू कर दिया। मेरी चूत में आग लगने लगी थी और में अपनी चूत में लंड को लेकर वैसे ही दमदार धक्के खाने के लिए बड़ी ही बेचेन व्याकुल होने लगी थी। दोस्तों अब में आप लोगो को कहानी सुनाना शुरू करती हूँ और मुझे उम्मीद है कि मेरी यह कहानी सभी कामुकता डॉट कॉम के पढ़ने वालों को जरुर पसंद आएगी।

दोस्तों अब उस पहली बार की चुदाई के बाद से मेरी मम्मी हर दिन ही हमारे खेत में जाकर मेरे चाचा से अपनी जमकर चुदाई के मज़े लेकर अपनी तरसती हुई चूत की प्यास को बुझाकर मज़े करती, लेकिन उसके बाद भी वो अब इतनी हद तक जा पहुंची थी कि वो रात को भी हमारे घर में सही मौका देखकर सभी के सो जाने के बाद देर रात को उठकर मेरे चाचा के लंड से मज़े लेने उनके पास चली जाती और उन दोनों को अब चुदाई के सामने कुछ भी नजर नहीं आता, उनको तो बस चुदाई का भूत सवार हो चुका था और इस चुदाई के खेल को अब करीब 18 दिन हो चुके थे और मैंने हर रात को जल्दी सोने का नाटक करके मम्मी के चाचा के पास चले जाने के बाद चोरी छिपे उनकी चुदाई को देखकर मज़े लिए और उस रात को जब में छुपकर देख रही थी तब मैंने देखा कि चाचा ने मम्मी को हमेशा की तरह जमकर उनकी चुदाई करके उसकी चूत को ठंडा कर दिया और उसके बाद वो दोनों हंस हंसकर बातें कर रहे थे।

फिर तभी मेरे चाचा ने मेरी मम्मी से कहा कि भाभी मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है उसका नाम रवि है वो पास वाले गाँव में ही रहता है और वो कल हमारे यहाँ पर सुबह ही पहुंच जाएगा और पूरा दिन यहीं पर रुकने के बाद वो शाम को 6 बजे की ट्रेन से शहर चला जाएगा उसने मुझे कई बार अपनी पत्नी की चुदाई करने का अवसर दिया है और दो चार बार तो हम दोनों ने ही मिलकर उसकी पत्नी को उसके घर में एक साथ भी चोदा है और अब अगर तुम तैयार हो जाओ तो वो तुम्हारी चूत को एक बार चोदना चाहता है और मैंने उससे कहा है कि में यह बात तुमसे पूछकर उसको जवाब दूंगा, तुम्हारी तरफ से क्या जवाब है? मुझे बता दो तो में उसको आज बता दूंगा? तो मम्मी मेरे चाचा की वो बात सुनकर बिल्कुल चकित होकर मुझसे बोली कि तूने मुझे क्या रंडी समझ रखा जो में तेरे साथ भी चुदाई करवाऊँ और तेरे दोस्तों का भी में लंड लूँ? मेरी पूरे परिवार में बहुत इज्जत है, तू क्या मुझे रंडी बाजार में ले जाकर बैठाना चाहता है जो हर किसी को मेरी चुदाई का न्यौता देता इधर उधर फिर रहा है। फिर चाचा ने मेरी मम्मी की वो सभी बातें सुनकर डरते हुए घबराकर कहा कि नहीं भाभी ऐसा कुछ भी नहीं, लेकिन भैया के घर में ना होने के बाद अगर तुम चाहो तो दो लंड से एक साथ अपनी चुदाई का मस्त मज़ा ले सकती हो और उसमे कोई बुराई वाली बात नहीं है, हमारी यह चुदाई बस हम तीनों के बीच ही रहेगी और किसी को पता नहीं चलेगा, प्लीज एक बार करके तो देखो अगर मज़ा ना आए तो में फिर कभी दोबारा यह काम करने के लिए आपसे नहीं कहूँगा।

फिर मम्मी मेरे चाचा की वो पूरी बात उनका आग्रह सुनकर थोड़ा सा मुस्कुराते हुए कहने लगी कि चल ठीक है, जब तेरे साथ मैंने चुदाई का यह काम अब शुरू ही कर दिया है तो में तेरे कहने पर एक लंड और सही उसको भी में लेकर देख लेती हूँ। चल अब तू बुला ले, उसको भी में भी देखूं कि वो तेरा दोस्त मेरी चुदाई करके कौन सा तीर मारता है, उसके लंड के अंदर कितना दम है, तू उसकी इतनी तारीफ कर रहा है, में भी तो देखूं वो क्या और कैसे करता है साला, आने दे तू उसको, तू देखना में कैसे उसका पूरा जोश एक ही झटके में पूरा ठंडा कर दूंगी? लेकिन घर में तो हमारा यह चुदाई का कार्यक्रम पूरा होना बड़ा मुश्किल है, क्योंकि घर पर दिन में किसी के होने का या अचानक से आ जाने डर हमेशा हमे होगा और डरते हुए काम करने से वो मज़ा नहीं आता जो आना चाहिए। अब झट से मेरा चाचा बीच में बोल पड़ा और वो कहने लगा कि भाभी में एक काम करता हूँ। उसको रेलवे स्टेशन से सीधा अपने खेत पर ले जाता हूँ। वहीं पर हमारा यह काम बड़े आराम से बिना किसी रुकावट के पूरा हो जाएगा और तुम दोपहर को करीब 12 बजे तक खेत पर आ जाना और शाम तक चुदाई का खेल खत्म करके तुम वापस घर आ जाना और में अपने उस दोस्त को खेत से ही स्टेशन ले जाकर रेल में बैठाकर वापस घर आ जाऊंगा। तो मम्मी बोली कि हाँ यह बिल्कुल ठीक रहेगा और तुम उसको लेकर खेत पर पहुंच जाना। में भी तुम्हे वहीं मिल जाउंगी और फिर अगले दिन सुबह मम्मी ने हंसी ख़ुशी घर का सारा काम जल्दी से ख़त्म किया और वो करीब 11:30 बजे ही खेत की तरफ चल पड़ी। मुझे उनके चेहरे पर बड़ी ख़ुशी एक अजीब सी चमक नजर आ रही थी, जिसको देखकर में समझ चुकी थी कि मेरी रंडी माँ आज किसी दूसरे का भी लंड लेकर अपनी चुदाई करवाकर मज़े लेने जा रही है।

अब मैंने भी अब उनके चले जाने के तुरंत बाद ही उनका पीछा करना शुरू किया, जिसका उनको बिल्कुल भी पता नहीं था। में चोरी छिपे उनकी चुदाई वाली जगह पर पहुंच गई और फिर मैंने देखा कि मम्मी हमारे खेत पर मुझसे पहले ही पहुंच चुकी थी और अब वो वहां पर मेरे चाचा और उनके दोस्त रवि के आने का इंतजार करने लगी थी और मैंने वहीं खेत में अपनी छुपने की एक सुरक्षित जगह बना ली थी। फिर कुछ देर बाद मेरे चाचा अपने दोस्त को लेकर पहुंच गए और उन्होंने अपने दोस्त का मेरी मम्मी से परिचय करवाया। तब मेरी मम्मी को देखकर रवि मुस्कुराकर बोला वाह भाभी तेरी जवानी तो बड़ी ही मस्त लग रही है मुझे पता होता कि आज मेरी किस्मत में ऐसा कुछ अच्छा होना लिखा है तो में पहले ही यह सब कर लेता, मुझे क्या पता था कि मेरी किस्मत किसी दिन मुझे ऐसा मस्त माल मेरे सामने लाकर मुझे जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी मिलेगी आपका यह गोरा कामुक जिस्म देखकर मुझे नहीं लगता कि इस बदन को भगवान ने बनाकर इसमे कोई भी कमी छोड़ी होगी, आज में इसको पाकर अपने मन की वो इच्छा पूरी करूंगा जिसका सपना में कितने सालों से देखता आ रहा हूँ। ऐसा बदन आज में पहली बार देख रहा हूँ। आप तो बहुत सेक्सी हो और मेरी उम्मीद से भी ज्यादा सुंदर और मज़े देने वाली हो, इतनी उम्र में भी कोई आपको देखकर यह बात नहीं कह सकता कि आप पहले भी कभी चुद चुकी हो। यह जिस्म तो किसी कुंवारी चूत का जैसा नजर आ रहा है।

फिर मम्मी ने उससे कहा कि देवर जी अब आप यह सभी बातें करना बंद करो और मेरे इस बदन की तारीफ तो आप बाद में भी कर सकते हो, पहले वो काम करो जिसके लिए आपको यहाँ आना पड़ा एक बार हम हमारा वो खेल शुरू तो करें, उसके बाद आप मेरी पूरी इस जवानी का असली रूप देखना और मज़े लेना। फिर उसके बाद मुझे बताना और अब मम्मी ने रवि से यह बातें कहते हुए किसी अनुभवी चुदाई की प्यासी रंडी की तरह अपने कपड़े एक एक करके उतारने शुरू कर दिए, अपनी साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट को उतार देने के बाद वो अपने असली रूप में आकर खड़ी थी। उनके गोरे जिस्म पर काले रंग की ब्रा पेंटी को देखकर किसी की भी नियत खराब हो जाए। वो किसी अप्सरा की तरह नजर आ रही थी गोरे जिस्म पर काले रंग के छोटे कपड़े जो उनके बड़े आकार के बूब्स और उभरी हुई चूत को अपने पीछे छुपाने में भी पूरी तरह से समर्थ नहीं थे। वो उनमे बड़ी जंच रही थी। अब मेरी मम्मी को अपने सामने सिर्फ ब्रा पेंटी में देखकर तो रवि की हालत एकदम खराब होने लगी थी। उसका लंड पेंट में ही तनकर खड़ा हो चुका था, इसलिए उसने भी बिना देर किए तुरंत ही अपने सारे कपड़े खोल दिए और चाचा भी अब पूरा नंगा हो गया। फिर मैंने देखा कि कुछ सेकिंड में ही वो तीनों एक दूसरे के सामने पूरे नंगे खड़े हुए थे। वो बड़े ही खुश नजर आ रहे थे, जैसे उन तीनों को कोई खजाना मिल गया हो और अब रवि ने अपने एक हाथ को आगे बढ़ाकर मम्मी के बूब्स को उनकी ब्रा के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया और चाचा ने तुरंत मम्मी के पीछे जाकर खड़े होकर मम्मी की ब्रा को खोलकर दोनों बूब्स को पहले आजाद किया और उसके बाद उसने मम्मी की पेंटी को भी अपने दोनों हाथों से झटका देकर नीचे खींचते हुए उतार दिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर उसके बाद उन्होंने पीछे से ही मम्मी के मोटे मोटे कूल्हों को भींचना दबाना शुरू कर दिया। अब मम्मी भी अपने एक हाथ को पीछे ले जाकर और दूसरे हाथ से आगे खड़े रवि के लंड को अपनी मुठ्ठी में भर लिया। वो अब उन दोनों के लंड को अपने दोनों हाथों से सहला रही थी और कुछ ही देर में उन दोनों के लंड पूरी तरह से तनकर खड़े हो गये और मेरी मम्मी की चूत को सलामी देने लगे। दोस्तों में देखकर बड़ी चकित थी, क्योंकि रवि का लंड तो मेरे चाचा के लंड से भी ज्यादा मोटा और लंबा भी था। दिखने में वो किसी जानवर का लंड नजर आ रहा था जो एक बार किसी भी चूत में जाकर उसके सर से हमेशा के लिए चुदाई का भूत उतार दे और वो चूत दोबार कभी लंड ना मांगे। मैंने ऐसा लंड पहली बार देखा था जिसको देखकर मेरे होश पूरी तरह से उड़ चुके थे और में डर भी चुकी थी। मेरे मन में अब अपनी मम्मी को इसको अपने अंदर लेने की बात बार बार परेशान कर रही कि आज इस गधे जैसे लंड को अपनी चूत में लेकर उसका क्या होगा? क्या आज यह उनकी आखरी चुदाई तो नहीं है? ऐसे बहुत सारे सवाल मेरे मन में थे।

फिर जब लंड पूरी तरह से तनकर अपने असली रूप में आया तो उस लंड के आकार को देखकर मम्मी एकदम घबरा गई और उनके माथे से पसीना आने लगा था। वो कहने लगी कि यह जब इतना मोटा है कि मेरी मुठ्ठी में इसका आना ही मेरे लिए इतना दुखदाई है। फिर तो यह आज मेरी चूत में जाकर चूत को फाड़ ही देगा, में इसको कैसे अपने अंदर ले सकती हूँ। में तो इससे मर ही जाउंगी और पता नहीं यह अंदर जाकर मेरी चूत को कितनी जगह से जख्मी करेगा? इसको देखकर तो मुझे लगता है कि अगर तुमने तेज धक्का दिया तो यह मेरी चूत से होता हुआ मेरे मुहं में ना निकल जाए, ऐसा लंड मैंने आज पहली बार देखा है और तुम यह चुदाई रहने दो और ऊपर से ही अपना मन भर लो। फिर रवि मम्मी को समझाते हुए बड़े प्यार से कहने लगी कि भाभी क्यों तू इतना नखरा नाटक करती है, जैसे यह तेरी कुंवारी चूत हो और वैसे भी थोड़ा सा दिमाग लगाकर सोच जब तेरी चूत ने एक इतना बड़ा बच्चा बाहर निकाल दिया है तब तो यह नहीं फटी तो एक इतने छोटे लंड से यह कैसे फट जाएगी? में वैसे भी धीरे धीरे करूंगा, तू बस आराम से चुदाई के मज़े लूट और हमें भी अपनी चूत के मज़े लेने दे क्यों तू हम तीनों का समय खराब करती है अब तक तो हमारी एक चुदाई खत्म भी हो जाती।

फिर थोड़ी देर तक वो तीनों खड़े रहकर एक दूसरे के जिस्म को गरम करके जोश में लाते रहे और एक मेरी मम्मी के बूब्स को मुहं में लेकर चूस रहा था, बूब्स को सहला भी रहा था और दूसरा अपने हाथ को तीन उँगलियों को एक साथ चूत के अंदर डालकर लंड के जाने का रास्ता साफ कर रहा था और कुछ देर यह सब करने के बाद रवि ज़मीन पर एकदम सीधा लेट गया। फिर उसके बाद मम्मी उसका इशारा समझकर उसके ऊपर बैठ गई और फिर वो अपने एक हाथ से रवि के लंड को अपनी चूत के छेद पर रखकर धीरे धीरे अपने शरीर को नीचे करते हुए उसके लंड को अपनी चूत के अंदर लेने लगी और साथ ही मम्मी के मुहं से दर्द की वजह से चीख निकलने लगी, लेकिन फिर भी मम्मी रवि का पूरा लंड अपनी चूत के अंदर जाने के बाद ही रुकी और फिर पूरा लंड अंदर चले जाने के बाद थोड़ा आराम करके मम्मी अपनी चूत को उसके लंड पर रगड़ने लगी और वो आह्ह्हह्ह आह्ह्ह्ह की आवाज़े करने लगी। अब रवि ने मम्मी के दोनों कूल्हों को अपने दोनों हाथों से पकड़कर पूरा फैला दिया और उसने अपनी कमर को ऊपर उठाकर झटके देने शुरू कर दिए जिसकी वजह से वो लंड मुझे अपनी मम्मी की चूत में अंदर बाहर होता हुआ साफ साफ नजर आ रहा था और इधर मेरे चाचा ने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाकर उसको बिल्कुल चिकना कर लिया था और वो अपने लंड को एक हाथ में लेकर सहला रहे थे।

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अब चाचा मम्मी के ऊपर चड़ने लगे, तभी मम्मी को जो अब उनके साथ इसके बाद होने वाला था उसका शक हुआ और वो बहुत डरकर कहने लगी नहीं रमेश एक साथ नहीं इसकी वजह से मेरी चूत और गांड दोनों फट जाएगी, तुम ऐसा मत करो पहले एक का काम खत्म हो जाए उसके बाद दूसरा अपना काम शुरू करो, लेकिन चाचा तो मेरी मम्मी की वो सभी बातें सुनकर हंसने लगे और वो बोले कि भाभी शुरू में आपको थोड़ा सा दर्द तो पहली बार जब चुदी थी तब भी हुआ होगा, लेकिन अब तो आप रोज ही अपनी चुदाई करवाकर मज़े लूट रही हो तो आज एक बार में दो लंड से एक साथ चुदने का भी आप मज़ा ले लो और इस चुदाई के बाद तो आप गाँव के सारे मर्दो से ग्रुप में अपनी चुदाई करवाने के बारे में भी विचार बनाने लगोगी और तुम्हे हमारी यह चुदाई अपनी पूरी जिंदगी याद रहेगी। फिर चाचा ने मम्मी से इतना कहते हुए ही अपना तनकर खड़ा चमकता हुआ लंड मम्मी की गांड के छेद पर रख दिया। मुझे मम्मी के वो पहले से ही फैले हुए कुल्हे ठीक तरह से दिखाई दे रहे थे।

अब चाचा ने हल्का सा अपने लंड से गांड को झटका दे दिया, जिसकी वजह से लंड का चिकना टोपा फिसलकर गांड में चला गया और मम्मी दर्द की वजह से चीखने लगी और वो अब उनकी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगी और वो दर्द से बिन पानी की मछली की तरह छटपटा रही थी और अपनी गर्दन को बार बार इधर उधर घुमा रही थी, क्योंकि उन दोनों लंड ने एक साथ गांड, चूत में जाकर मम्मी के पूरे जिस्म में आग लगा दी और दोनों लंड एक साथ हल्के हल्के धक्के देकर अपना काम कर रहे थे, जो मम्मी के लिए बड़ा दुखदाई साबित हो रहा था। फिर नीचे से रवि ने मम्मी की उछलकूद देखकर उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया और ऊपर चाचा लेट गये, इसलिए मम्मी अब सिर्फ़ दर्द से छटपटा सकती थी और उनका उन दोनों के बीच से निकलना बड़ा मुश्किल था। अब चाचा ने एक ज़ोर का झटका दिया तो चाचा का लंड मम्मी की गांड को फाड़ता हुआ जड़ तक पूरा समा गया और मम्मी दर्द की वजह से रोने लगी, लेकिन उन दोनों पर कोई भी फ़र्क नहीं पड़ रहा था और अब उन दोनों ने धक्के देकर चोदना शुरू कर दिया। मुझे मेरी मम्मी की चूत और गांड में एक साथ उन दोनों के लंड चुदाई करते अंदर बाहर जाते हुए दिखाई दे रहे थे और उन धक्को से मम्मी की चीखे भी तेज हो रही थी और उसकी जगह अब मम्मी की आहें बढ़ रही थी और करीब पांच मिनट के बाद मम्मी भी अपने दर्द के कम हो जाने के बाद पूरे जोश में आकर उनके धक्को के साथ अपनी कमर को हिला रही थी। अब मम्मी अपने दोनों हाथों को पीछे लेकर गई और उन्होंने अपने दोनों कूल्हों को और भी फैलाकर पकड़ लिया, जिसकी वजह से चाचा का लंड अब और भी तेज़ी के साथ अंदर बाहर होने लगा और फिर चाचा ने कुछ देर धक्के देने के बाद ज़ोर की आवाज़ करते हुए अपना वीर्य मम्मी की गांड में निकाल दिया और फिर वो धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाकर शांत होने लगे।

फिर जब उनका लंड ठंडा होकर अपने छोटा हो गया तो वो अपने आप ही गांड से फिसलकर बाहर आ गया और मम्मी की गांड का छेद थोड़ी देर के लिए खुला ही रह गया और फिर मैंने देखा कि उसमें से चाचा के लंड का गरम वीर्य थोड़ा सा बाहर आ गया, जिसको मम्मी ने अपने हाथों से अपने कूल्हों पर फैलाकर लगा लिया और उधर अब रवि ने मम्मी की चूत को चोदना बंद कर दिया और वो उनके दोनों बूब्स को सहलाने दबाने लगा था। फिर मम्मी तुरंत समझ गई कि वो अब झड़ने वाला है इसलिए वो उससे बोली कि रवि मुझे तेरे लंड से निकला वीर्य पीना है, उसका स्वाद एक बार चखकर उसके भी मज़े लेने है। फिर रवि ने खुश होकर तुरंत ही मम्मी को अपने ऊपर से हटा दिया और वो अब खड़ा हो गया उसके बाद वो ज़ोर ज़ोर से अपने लंड को अपने एक हाथ में लेकर हिलाने लगा और उस समय मम्मी पहले से ही अपने दोनों घुटनों के बल उसके लंड के सामने आकर बैठ गयी। उन्होंने पहले से ही अपना पूरा मुहं खोल लिया था। फिर कुछ देर हिलाने के बाद रवि के लंड ने अपने वीर्य की धार फेंकी जो जाकर सीधे मम्मी के मुहं में जाकर गिर रही थी और वीर्य की कुछ बूंदे उनके गाल पर भी गिर गयी। फिर जब लंड ने अपना पूरा पानी निकाल दिया तो मम्मी ने अपना मुहं बंद करके वो सारा वीर्य पी लिया और गाल पर गिरी हुई बूंदे भी अपने हाथ में लेकर उन्होंने चाट लिया। रवि यह सब देखकर हंसने लगा और वो कहने लगा कि भाभी मुझे लगता है कि आप बहुत प्यासी हो जो पूरा पानी अपने पी लिया, लेकिन तब भी शायद आपकी प्यास नहीं बुझी। तो मम्मी ने हंसते हुए कहा कि देवर जी तुम्हारे इस लंड का पानी इतना स्वादिष्ट है कि मेरा दिल इससे भरता ही नहीं और फिर वो तीनों पास ही लगी ट्यूबवेल में जाकर नहाने लगे और उन दोनों ने मम्मी के शरीर पर बहुत सारा साबुन लगाकर धोने के बहाने से उनको बीच बीच में रगड़ा, जिसकी वजह से हर बार मम्मी के मुहं से आह्ह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ निकल रही थी। फिर करीब आधे घंटे पानी में एक साथ रहने के बाद वो तीनों बाहर आए और वैसे ही नंगे वो चारपाई पर आकर बैठ गये। उस समय मम्मी उन दोनों के बीच में बैठी हुई थी और वो उन दोनों के लंड को अपने दोनों हाथों से सहला रही थी और वो दोनों उसके बूब्स चूत पूरे नंगे बदन से खेल रहे थे।

फिर रवि कुछ देर बाद कहने लगा कि भाभी मेरा मन अब तुम्हे एक बार फिर से चोदने का हो रहा है और इस बार में तुम्हे कुतिया बनाकर सिर्फ़ में अकेला ही चोदना चाहता हूँ। फिर चाचा बोले कि भाई तेरी मर्ज़ी है, मैंने भी तो ना जाने कितनी बार तेरी बीवी को अकेले चोदा है और उन दोनों के मुहं से यह बात सुनकर मम्मी तुरंत उस चारपाई से नीचे उतारकर वहीं उनके सामने कुतिया की तरह बन गयी और वो हंसते हुए अपनी कमर को हिलाते हुए कहने लगी कि देवर जी तुम्हारी यह कुतिया अब चुदने के लिए तैयार है और फिर रवि भी तुरंत अपना लंड हाथ में लेकर मम्मी के पीछे कुत्ते की तरह चड़ गया और उसने अपने पूरे लंड को एक ही जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर डालकर तेज तेज धक्के देकर चुदाई करना शुरू कर दिया। उस समय मम्मी की दर्द की वजह से बड़ी बुरी हालत थी और उनका दर्द की वजह से रो रोकर बहुत बुरा हाल हो चुका था, क्योंकि इस बार रवि का लंड एक बार झड़ जाने के बाद पहले से ज्यादा जोश में था और उसने अपने दोनों हाथ से मम्मी की कमर को कसकर पकड़ा हुआ था। उनका उसकी पकड़ से छूट पाना बड़ा मुश्किल था और और उसके बाद करीब बीस मिनट में जाकर उसने अपना वीर्य मम्मी की चूत की गहराईयों में डालकर अपना पूरा जोश ठंडा हो जाने के बाद लंड को बाहर निकाल लिया और मम्मी उसी समय नीचे जमीन पर ही लेट गई और वो भी थककर उनके ऊपर लेटा रहा। अब मैंने देखा कि मम्मी की चूत से बहुत मात्रा में सफेद रंग का गाढ़ा वीर्य बहता हुआ बाहर आ रहा था। उन दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी। फिर थोड़ी देर आराम करने के बाद वो तीनों अपने कपड़े पहनकर अपने अपने रास्ते चल दिये। फिर घर आकर जब मैंने मम्मी को देखा तो वो बड़ी ही खुश लग रही थी। दोस्तों यह थी मेरी मम्मी मस्त चुदाई और आशा करती हूँ कि आप सभी को यह कहानी पसंद आई होगी ।।

धन्यवाद …

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