ऋतु चाची बनी कोठे की सस्ती रंडी 2

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प्रेषक : राजेश

“ऋतु चाची बनी कोठे की सस्ती रंडी 1” से आगे की कहानी …… दोस्तों ऐसा भयानक सीन मैने कभी नहीं देखा था अनवर भाई ने ऋतु चाची को अपना गुलाम बना लिया था वो चाची को बिस्तर पर छोड़ के खड़े हो गये और बोले अनवर भाई चल रंडी खड़ी हो अभी बहुत काम बाकी है तेरे को ठंडा करने नहीं आया हूँ मैं तू आई है मेरे को ठंडा करने खड़ी हो कर चूस मेरे लंड को ऋतु चाची : थोड़ी देर रुक जाओ ना प्लीज़ मेरे से और नहीं होता अनवर भाई : तेरे लिये रुकुंगा मैं चल खड़ी हो नहीं तो वापस मारूंगा तेरे को रंडी ऋतु चाची   जी डरी हुई अनवर भाई का लंड मुँह में ले कर चूसने लगी मगर अपना पहला मजा लेने के कारण उनमे अब दम ना था और जिस तरह से वो अनवर भाई का लंड चूस रही थी उससे अनवर भाई ने गुस्सा हो कर चाची जी को एक और थप्पड़ मारा और बोला तू समझी कल से तू मेरे से ही नहीं यहाँ के बाकी ग्राहको से भी चुदेगी ज़्यादा आवाज की तो मार दूँगा तेरे को समझी साली कुत्तिया तेरे जिस्म से बहुत पैसे कमाऊंगा में और तेरे वीडियो पर तो पूरी दुनिया मूठ मारेगी चल अब खड़ी हो ऋतु चाची जी रोते हुये अपने आप को संभाल के खड़ी हुई और अनवर भाई से माफी माँगने लगी ऋतु चाची : मुझको माफ़ कर दो मैं भूल गयी थी की अब मैं एक रंडी हूँ सिर्फ़ एक रंडी जो आप बोलोगे वैसा ही होगा आज से यह जिस्म मैं आपके हवाले करती हूँ माफ़ कर दो मेरे को अनवर भाई ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे और अपना लंड हिलाते हुये बोले अनवर भाई : बहुत जल्दी समझ गयी तेरी चाची राजेश साली कुत्तिया पहले समझ जाती तो इतनी मार नही खाती.

मे : अनवर भाई थोड़ा रहम करो ना चाची जी पर आप इनको भले जब चाहो चोदो मगर ऋतु चाची से धन्धा तो मत करवायो ना यह रंडी हमको दे दो हम संभाल लेंगे इसको अनवर भाई : (गुस्से में) साले भडवे औकात में रहा कर अपनी तेरा इस गली में आना बन्ध करवा दूँगा समझा मेरे को मत सिखा क्या करना है मे : सॉरी अनवर भाई माफ़ करना आप जैसा बोलोगे वैसा ही होगा अनवर भाई : आजा ऋतु रानी अब तेरे को आगे की सैर करवाता हूँ साला पूरा मूड खराब कर दिया तुम सबने ऋतु चाची : हमारी नादानी को माफ़ कीजियेगा.

ऋतु चाची जी अनवर भाई का लंड पकड़ के उसको अब चूसने लगी अपने हाथों से अनवर भाई के आंड और थैली को मसलते हुये वो उनका लंड का सूपड़ा अपने मूँह में डाल के चूसने लगी अनवर भाई भी धक्के लगाने लगे और चाची जी के मूँह को चोदने लगे उनके मूँह से आहहह निकलने लगी चाची जी ने अनवर मियाँ को खुश करने के लिये अपनी एक उंगली उनकी गांड  में घुसा दी अनवर भाई जैसे पागल हो गये और चाची जी के बालों को पकड़ के खीचने लगे और ज़ोर से अपने लंड को धकेलने लगे चाची जी की साँस फूलने लगी थी मैं और अर्पित शांति से डर के कारण वीडियो बनाते रहे अनवर भाई : अब जा कर बनी ना तू रंडी और चूस साली छिनाल… हाआंन्न… और ज़ोर से…अनवर भाई पूरी मस्ती में आने के बाद चाची जी को उनकी कमर के बल पटक दिया और उनकी दोनो टाँगों को उपर करके उनकी चूत पर अपना मूँह वापस रख कर चाटने लगे चाची की चीख निकलने लगी थी वो जिस तरह से चाची जी की चूत चाट रहे थे और गांड में अपनी उंगली डाल रहे थे.

उससे चाची जी की हालत वापस खराब होने लगी थी अपने हाथ को ऋतु चाची की गांड के छेद से निकाल के वो ऋतु चाची के मूँह में डालने लगे चाची जी उनकी उंगलियों को चाटने लगी और आहे भरने लगी अब चाची जी से और नहीं रहा जा रहा था ऋतु चाची : अनवर मियाँ चोद दो मुझे अपने लंड से मार दो मेरी चूत को कर दो मेरी चूत को फाड़ दो अपने लंड से और मत तडपाओं मैं मर जाउंगी अब नहीं रहा जाता अल्लाह के लिये बुझा दो मेरी आग आज फाड़ दो मेरी चूत को अनवर भाई : देख कैसे तड़प रही है तू मेरे लंड के लिये हाह्हआआअ ऐसी ही रखैल अच्छी लगती है मेरे को जिसको अपनी ओकात मालूम हो चाहिये ना मेरा लंड तेरे को हाँ चाहिये ना बोल ना  मेरे को बोल ना साली बोल…

ऋतु चाची : हाँ चाहिये मेरे को आपका लंड चाहिये मैं आपकी रखैल हूँ दे दो मेरे को अपना लंड दे दो भगवान के लिये बुझा दो मेरी आग अनवर भाई ने चाची जी की चूत को चाटना बंद किया और चाची जी के बाल पकड़ के खीच के उनको कुत्तिया बना दिया अपना लम्बे चोड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ कर धीरे धीरे से वो ऋतु चाची जी की चूत पर उसको रगड़ने लगे चाची जी तड़पने लगी और कराहें भरने लगी लंड रगड़ते रगड़ते अनवर भाई ने एक ही झटके में पूरे ज़ोर से अपना लंड ऋतु चाची जी की चूत के अंदर डाल दिया ऋतु चाची जी ज़ोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर भाई ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे.

इतना मोटा लम्बा लंड चाची जी की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुये जैसे ही अंदर घूसा चाची जी की जान निकल गयी अपने नामर्द पति के छोटे से नपुंसक लंड से चुदने के कारण उनकी चूत अब भी बहुत टाइट थी अनवर भाई ऋतु चाची के बाल को और ज़ोर से खीचते हुये अपना लंड अंदर बाहर करने लगे और दूसरे हाथ से कभी चाची जी की गांड को मारते और कभी उनकी चूचियों को नोचते चाची जी रो रही थी और दर्द के कारण चिल्ला रही थी उनकी चिकनी चूत से खून निकल रहा था अनवर भाई : ले रंडी ले मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को ऋतु चाची : आआहह धीरे मेरी चूत फट जायेगी आआअहह…..

अनवर भाई : साली छिनाल तेरी चूत फाड़कर ही यह मेरा लंड शांत होगा आज देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कन्डोम के चोद रहा हूँ यही औकात है तेरी और तेरी चूत की मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नाजायज़ भड़वे की रांड़ माँ बनेगी शायद मेरे बच्चे के कारण ही तेरे खानदान मैं कोई मर्द पैदा होगा ऋतु चाची : आआहह बहुत दर्द हो रहा है…. हाइईइ ऐसा ना करो अनवर भाई मैं एक शादीशुदा औरत हूँ मेरे बारें में कुछ तो सोचो अनवर भाई ज़ोर ज़ोर के झटके लगाते हुये  बोले : अनवर भाई : साली तू मेरी रखैल है तू पालेगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के समझी अब तेरा घर यह कोठा है और तू मेंरी रखैल है भूल जा अपने पति को अनवर भाई ने ऋतु चाची जी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े हो गये उन्होने चाची जी को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया.

अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहें थे अपने होंठ ऋतु चाची जी के होंठो पर रख कर वो चाची जी की चूत में खड़े खड़े अपना लंड डालने लगे उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कमरा गर्म हो गया था उन दोनो का बदन पसीने से भीग गया था और वो चाची जी को चूमते और पेलते जा रहें थे चाची जी की चूत भी अब मस्त हो गयी थी पहली बार एक मस्त लंड को अपनी चूत में पाकर वो अब मस्त हो गयी थी वो भी अनवर भाई के बालों को पकड़ के आहें भरने लगी थी ऋतु चाची : हाइईइ…. क्या लंड है आपका अनवर भाई…. मत रूको डालते जाओ अपना लंड मेरी चूत के अंदर बहुत मज़ा आ रहा है मत रूको मेरे राजा… हाइईइ… आहहहहहह…. आआहहाः अनवर भाई : साली  मज़ा तो मुझे भी बहुत आ रहा है तेरे नरम बदन से खेलने में और तेरी टाइट चूत मारने में  क्या ग़ज़ब माल है तू आआहहहः यह ले साली रंडी यह ले ऋतु चाची : हाईईईईईई मारी जाऊं में तेरे लंड पर आज तक जिंदगी में ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था हाईईइ… मस्त कर दिया है मेरे को तेरे लंड ने क्या फौलाद है…. आआहहह हाइईईई.

मैं आज से सिर्फ़ और सिर्फ़ तेरी रंडी हूँ तेरे लंड की गुलाम आआहह….और ज़ोर से…. आअहह…. अनवर भाई ने अपनी रफ़्तार बडाते हुये और ज़ोर से पेलना शुरू कर दिया था चाची जी की बाते सुनकर उनका जोश और बड़ गया और वो और बेरहमी से ऋतु चाची को चोदने लगे चाची जी को बिस्तर पर लेटा कर अब वो उनके उपर चड गये और ऋतु चाची के मूँह को चूमते चाटते वो उनके पूरे चेहरे को चूमने लगे एक हाथ से चूचियाँ मसलते हुये वो अपने लंड को आगे पीछे कर रहे थे चाची जी का बदन सिकुड़ने लगा और चाची जी ने अपनी चूत को टाइट करते हुये अनवर भाई का लंड जकड़ लिया ऋतु चाची जी अनवर भाई के मजबूत बाहों में पिघलने लगी और दूसरी बार अपना पानी छोड़ के अधमरी हो गयी मगर अनवर भाई तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे अपनी स्टाइल बदलते हुये अब उन्होने चाची जी को उपर कर दिया और खुद लेट गये.

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चाची जी उनके फौलादी लंड के उपर बैठ के उपर नीचे होने लगी अनवर भाई अब सीधा उनके क्लाइटॉरिस और बच्चे दानी को चोद रहे थे कुछ ही देर में चाची वापस मस्त हो गई और ज़ोर ज़ोर से कूदने लगी और साथ में अनवर भाई भी चाची जी की चूचियो को कस के निचोड़ते हुये तेज़ी से अपना लंड पेलने लगे दोनो ही अपने जिस्म की आग और प्यास को बुझाने के लिये पागल हो रहे थे जैसे जैसे अनवर भाई अपना सारा माल छोड़ने के करीब आने लगे वो उतनी ही तेज़ी से पेलने लगे चाची जी भी मस्त होकर आखें बंद करके और बस मस्त हो कर अपनी काम ज्वाला शान्त करने में लगी थी अनवर भाई : हाँ रानी….आअहह बहुत मजा आ रहा है आअहह साली मस्त कर दिया है आज तूने मुझको ऋतु चाची : आअहह अनवर भाई आअहह.

अब अनवर भाई अचानक से लंड पेलते पेलते चाची जी से लिपट गये चाची जी भी पागलों की तरह उनको अपनी बाहों में भरने लगी दोनो ज़ोर ज़ोर से आहें भरने लगे और अनवर भाई ने एक आखरी ज़ोर के झटके के साथ अपना सारा माल उनकी चूत में गिरा दिया चाची जी ने भी अपना पानी छोड़ दिया और अनवर भाई के उपर गिर गयी और उनको चुमने लगी अनवर भाई धीरे धीरे अपना लंड पेले जा रहे थे और फिर उनकी चूत से अपना लंड निकाल लिया ऋतु चाची जी की चूत फ़ुल गयी थी सूजन के कारण ऋतु चाची के झाटों पर अनवर भाई का माल गिरा हुआ था उनकी पूरी चूत माल से भर गयी थी वो दोनो पूरी तरह संतुष्ट हो कर बिस्तर पर लेटे हुये थे ऋतु चाची अनवर भाई के लंड को हाथों से पकड़ के सहला रही थी और अनवर भाई उनके बोबो को सहला रहें थे.

अनवर भाई : मज़ा आया या नहीं तेरे को मेरी रानी. ऋतु चाची : हाइईइ बहुत मज़ा आया आज अब जाकर में पूरी औरत बनी हूँ आपके लंड का पानी पाकर मेरी चूत की आग शांत हुई है अनवर भाई : साली तेरे जैसी कातिल रंडी पाकर मेरा लंड भी बहुत दिनो बाद शांत हुआ है तेरी कातिल जवानी ने मेरे लंड को पागल कर दिया है यह कह कर अनवर भाई ऋतु चाची को चूमने लगे और अपनी बाहों में भरने लगे थोड़ी देर बाद वो उठे और दारू के पेक बना के चाची को पिलाने लगे वो दोनो दारू पी के नशे मे एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे कभी चाची जी उनके लंड को सहलाती कभी चूमती अनवर भाई ऋतु चाची की चूत में उंगली करते और बोबो को दबाते हुये चूम रहे थे तभी अनवर भाई बोले : सुन भडवे राजेश. मे बोला : बोलीये अनवर भाई अनवर भाई : बड़ा मस्त माल लाया है आज तू अब मेरा काम कर अपने चाचा को फोन करके बोल की तेरी चाची आज अपनी सहेली का यहाँ गयी है और वहीं रुकेगी और तुम दोनो कोई काम में बिज़ी हो जाओ साला मेरे को कोई परेशानी नहीं माँगता है.

मे : जैसा आप बोलो अनवर भाई. अनवर भाई : आज रात तेरी चाची मेरा बिस्तर गर्म करेगी और तू और तेरा दोस्त जाकर किसी और रांड़ को बजाओं समझे. मे : ठीक है अनवर भाई जैसा आप बोलो ऋतु चाची जी अनवर भाई की बाहों में लेटी हुई उनको चूम रही थी और हम दोनो अनवर भाई के कमरे से निकल के बाहर जा रहे थे हमने अनवर भाई के कहने पर केमरे को चालू ही रख दिया था मगर अंदर का नज़ारा हम मिस नहीं करना चाह रहे थे और अनवर भाई की रंडियों में हमें आज पहली बार कोई इन्टरेस्ट नहीं था हम दोनो गेट के बाहर खड़े हो कर अंदर का नज़ारा देख रहे थे ऋतु चाची : क्यों नहीं जाने दिया मेरे को अब क्या इरादा है आपका आज.

अनवर भाई : हा हाहह… आज तो तू रात भर मेरे बिस्तर को गर्म करेगी रानी कहीं नहीं जाने दूँगा तेरे को सुन आज से तू ऋतु होगी अपने घर पर इस कोठे पर तेरा नाम होगा रेशमा अनवर     की रखैल रेशमा रानी ऋतु चाची : और तुम होगे मेरे चुदक्कड भडवे अनवर मियाँ मेरे मालिक मेरे लंड दाता अनवर भाई : साली छिनाल बहुत जल्दी ही रंडियों जैसी बात करना सीख गयी है तू बहुत जल्दी बहुत आगे जायेगी तू ऐसे ही मस्त बातें करते और एक दूसरे की बॉडी से खेलते हुये अनवर भाई का लंड वापस तैयार हो रहा था वो लंड खड़ा हो रहा था और अनवर भाई अपनी प्यारी रांड़ रेशमा रानी को चूमते जा रहे थे.

चाची जी भी गर्म होने लगी थी अनवर भाई ने अचानक चाची जी की गांड में उंगली डाल दी और चाची जी ने एक सेक्सी सी आवाज निकाली… आअहह उसके बाद तो जो हुआ वो देख कर मैं पागल ही हो गया था अनवर भाई ने ऋतु चाची को दूसरी तरफ मोड़ दिया और उनकी गांड में अपनी नाक को घुसा दिया और सूंघने लगे थोड़ी देर बाद उन्होने अपनी जीभ से चाची जी की गांड को चाटना शुरू कर दिया चाची जी मस्त हो गयी थी वो अनवर भाई के लंड को अपनी पकड़ में कसने लगी अनवर भाई उठे और ऋतु चाची की गांड को फैला दिया और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर पोज़िशन करने लगे.

इससे पहले की ऋतु चाची कुछ समझती और बोलती अनवर भाई ने एक ज़ोर का झटका लगाया और अपना सख़्त लंड ऋतु चाची की गांड में डाल दिया ऋतु चाची बहुत ज़ोर से चिल्लाई और शोर करने लगी अनवर भाई ने अपने हाथ से ऋतु चाची का मुँह पकड़ के बन्ध किया और एक और झटके में अपना पूरा लंड चाची जी की गांड के अंदर घुसा दिया थोड़ी देर हल्के हल्के झटके मारने के बाद ऋतु चाची का दर्द थोड़ा बहुत कम हुआ और वो कुछ शांत हुई तो अनवर भाई चाची जी के बोबो को दबाते हुये उनकी गांड में लंड आगे पीछे करते रहें ऋतु चाची तो बस आँखें बन्ध करके सिसकियाँ भरती हुई मज़े ले रही थी अब दर्द काबू में होता देख कर अनवर भाई ने वही अपना जानवर वाला रूप दिखा दिया और बेरहमी से ज़ोर ज़ोर से अपना लंड ऋतु चाची की गांड में आगे पीछे करने लगे उन्होने ऋतु चाची को ऐसा चोदा की ऋतु चाची की 7 पीढ़िया भी इस चुदाई को भूला ना पायेगी दर्द से बेहाल चाची जी रो रही थी और मस्ती भी ले रही थी.

अनवर भाई ने अपनी पूरी हवस चाची की गांड पर निकाल दी हवसी दरिंदे की तरह उन्होने ऋतु चाची को अपनी रखैल रेशमा बना डाला गांड मारते मारते अनवर भाई ने अपनी दो ऊँगलियां चाची जी की चूत में घुसा दी चाची जी को तो अपनी वासना की आग में कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वो सिर्फ़ गर्म गर्म सिसकियाँ भर रही थी अब जब अनवर भाई झड़ने वाले थे तो उन्होने झटके से अपना लंड निकाला और ऋतु चाची को पलटकर उनके मूँह में अपना लंड डाल दिया ऋतु चाची लोली पोप की तरह उनके दानव लंड को चूस रही थी उसके बाद अनवर भाई ने अपना लंड निकाला और ऋतु चाची के मूँह के सामने उसको ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगे फिर वो अचानक ज़ोर से चीखीं और अपना सारा माल ऋतु चाची के चेहरे, आँखों और होठ पर गिरा दिया बचा हुआ माल उनकी चूचियों पर भी डाल दिया.

ऋतु चाची इस समय एक बहुत ही सस्ती सी रंडी लग रही थी उनका वीडियो मार्केट में धूम मचाने वाला था अब उन्हे लंड का स्वाद लग चुका था अब यह आग सिर्फ़ लंड के पानी से ही बुझ सकती है अनवर भाई का काम अब भी पूरा नहीं हुआ था वो ऋतु चाची को पूरी रांड़ बना कर ही हार मानने वाले थे उन्होने ऋतु चाची जी के चेहरे और बोबो पर पड़े माल को चम्मच से उठा उठा कर एक ग्लास में भरा और चाची जी को अपना चेहरा चाटने को बोला उसके बाद उन्होने वो माल का ग्लास ऋतु चाची जी को पिला दिया और एक ब्रश से अपने दाँत को अपने माल से ब्रश करने को बोला.

ऋतु चाची जी के पास कोई और रास्ता नही था धीरे धीरे वो भी इस गंदी सी हरकत को इन्जॉय करने लगी और अनवर भाई के माल से ब्रश करते हुये उससे खेलने लगी कुछ देर खेलने के बाद उन्होने वो सारा माल एक झटके में पी लिया यह सब होने के बाद अनवर        भाई खड़े हुये और ऋतु चाची अधमरी हालात में पड़ी हुई कराह रही थी तभी अनवर भाई चिलाये अनवर भाई : अबे बहन के लोड़ो बाहर से देखना बन्द करो और अंदर आओ.

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मुझे को पता था की तुम दोनो भडवे कहीं नहीं जाओगे बहुत मस्त माल है तेरी चाची इसका जिस्म बेच के जो भी कमाई होगी वो आधी आधी बाटेंगे ठीक है अब बुझा लो अपनी हवस इसके साथ चोदो और चोदो साली छिनाल को हम दोनो एक दूसरे का मूँह देखने लगे और एक मिनिट में कपड़े उतार के ऋतु चाची जी पर चढ़ गये हम दोनो ने रात भर चाची जी को चोदा  और थोड़ी देर बाद तो लगा की मर गयी है रंडी की बच्ची मगर हमें तो अपनी हवस शांत करने से मतलब था और हम रात भर चाची जी को चोदते रहें आगे की कहानी अगली बार बताऊंगा आशा है की आप सभी लोगों को मेरी पहली कहानी पसंद आई होगी . .

धन्यवाद …

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