साली की मदद से लिया भांजी का मज़ा

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प्रेषक : अनुज कुमार

हाय फ्रेंड्स मेरा नाम अनुज है मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ और दिल्ली मैं ही एक अच्छी पोस्ट पर नौकरी करता हूँ। इससे पहले मैं आपको अपनी कहानी “जयपुर वाली साली बनी घरवाली” बता चुका हूँ कि कैसे मैंने कंचन को और उसके पति सतीश ने शिप्रा से खुलकर मज़े किए। अब मैं आपको अपनी एक और कहानी बताता हूँ जो कि कुछ दिनो पहले की ही है।

तो दोस्तों मेरी बीवी शिप्रा पेट से थी और उसकी डिलवरी की तारीख को 3-4 दिन ही बाकी थे तो शिप्रा ने कहा कि घर से किसी को बुला लो तो मैंने कहा ठीक है शिप्रा ने कानपुर फोन किया और अगले ही दिन उसकी माँ और प्रिया दिल्ली आ गये.

प्रिया को देखकर मेरे चेहरे पर चमक आ गयी थी क्योंकि शिप्रा के प्रेग्नेंट होने के कारण मुझे बिना सेक्स किए 3-4 महीने बीत गये थे और प्रिया तो ऐसी मस्त चीज़ थी कि कोई भी आदमी कितना भी सेक्स करने के बाद भी उसकी 1 बार तो फिर भी ले लेता बहुत मस्त है वो जिस दिन वो आई उसी रात को मैंने प्रिया को जमकर चोदा तो प्रिया बोली कितने दिनों से प्यासे हो? मैंने कहा जान 3-4 महीने हो गये सेक्स किए हुए प्रिया बोली क्यों दीदी नाराज़ हैं क्या? मैंने कहा नहीं पगली प्रेग्नेन्सी मैं सेक्स नहीं करते है। वो बोली ठीक है अभी तो मैं कुछ दिन रहूंगी खूब मजे करेंगे,  मगर ध्यान से माँ भी यहाँ हैं। मैं बोला ठीक है जान।

3 दिन बाद शिप्रा ने एक लड़के को जन्म दिया और डॉक्टर ने शिप्रा को 15 दिन का फुल रेस्ट करने को बोला जिसके कारण वह बेड से उठ नहीं सकती थी। हमसे मिलने के लिए 5 दिन बाद जयपुर से शिप्रा की बड़ी बहन कंचन उसका पति सतीश और उनकी बेटी आकांशा दिल्ली आये लेकिन शिप्रा की माँ का दिल दिल्ली मैं नहीं लग रहा था और शिप्रा की डिलवरी भी नॉर्मल हुई थी तो उन्होने बोला कि अब हम लोग कानपुर चले जाते हैं और ऐसे भी सतीश और कंचन तो कुछ दिन यहाँ है। इस पर शिप्रा बोली माँ आपकी मर्ज़ी है लेकिन आप प्रिया को यहीं छोड़ दीजिये इसके स्कूल की भी छुट्टियाँ हैं और मुझे भी थोड़ी हेल्प मिल जायेगी। हम 15-20 दिन बाद तो कानपुर आयेंगे ही हमारे साथ आ जायेगी.. माँ बोली ठीक है और अगले दिन माँ अकेली ही कानपुर चली गयी। प्रिया और आकांशा की अच्छी पटती थी.. वैसे तो रीलेशन मैं प्रिया आकांशा की मौसी लगती थी लेकिन वो उसको नाम लेकर या दीदी कहकर ही पुकारती थी। दोनों ही एक साथ खाना खाती, थी और दिनभर एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ती थी। 3 दिन बाद सतीश और कंचन वापस जयपुर जाने के लिए कपड़ों की पैकिंग कर रहे थे तो प्रिया सतीश से बोली जीजू आकांशा को यहीं छोड़ दीजिये ना.. इस पर सतीश बोला मैं यहाँ छोड़ दूँगा तो ये अकेली कैसे वापस आयेगी जयपुर? इस पर प्रिया चुप हो गयी क्योंकि उसके पास इसका कोई जवाब नहीं था लेकिन जब कंचन ने देखा की उसकी बेटी आकांशा उदास सी है ओर यहाँ रुकना चाहती है तो वो सतीश से बोली ठीक है सतीश आकांशा का भी दिल रुकने का है तो इसको हम यहीं छोड़ देते है।

जब अनुज और शिप्रा 15-20 दिन बाद कानपुर जायेंगे तो हम लोगों को भी अगले महीने कानपुर जाना ही है हम वहीँ से आकांशा को ले चलेंगे.. ये सुनते ही प्रिया और आकांशा अपने मुँह से ज़ोर से बोलती हुई एक दूसरे के गले मिलने लगी.. वो दोनों 2-3 दिन मैं कुछ ज़्यादा ही घुल मिल गयी थी। कंचन और सतीश भी उसी दिन चले गये अब मुझे प्रिया को चोदने मैं परेशानी होने लगी क्योंकि आकांशा उसका साथ ही नहीं छोड़ती थी.. रात मैं भी दोनों साथ साथ सोती थी एक दिन दोपहर मैं जब सभी सो रहे थे और मैं और प्रिया छत वाले रूम मैं दरवाजा बंद करके अपने सेक्स मैं लगे हुए थे तभी आकांशा छत पर आ गयी और दरवाजा नॉक किया हमें कपड़े पहनने मैं थोड़ी देर लग गयी और जब दरवाजा खोला तो आकांशा हम दोनों को देखकर बोली आप दोनों यहाँ क्या कर रहे हो।

प्रिया बोली मैं जीजू से कंप्यूटर सीख रही थी और दरवाजा इसलिये बंद किया था क्योंकि हवा तेज चल रही थी.. प्रिया बात को टालते हुए बोली चलो नीचे चलते हैं और दोनों ही नीचे चली गयी शाम को प्रिया ने मुझे बताया कि आकांशा को शक सा हो गया है और वो काफ़ी सवाल पूछ रही थी। मैंने पूछा क्या पूछ रही थी? प्रिया बोली पूछ रही थी कि लाईट नहीं आ रही थी और हवा भी नहीं चल रही थी। इसलिए मैं गर्मी के कारण उपर गयी थी और आप बोल रही हो कि कंप्यूटर सीख रही थी हवा चल रही थी इसलिये गेट बंद किया था। ठीक ठीक बताओ प्रिया मौसी आप लोग क्या कर रहे थे। मैंने उससे कह दिया कुछ नहीं.. मैंने उसको बड़ी मुश्किल से मनाया है।

मैंने बोला यार हम लोगों को अकेले रहते 3 दिन हो गये लेकिन अभी तक सिर्फ़ 2 बार ही मज़ा ले पाए हैं और अब तो आकांशा को भी शक हो गया है वो तुम्हारा पीछा ही नहीं छोड़ेगी.. क्यों  ना उसको भी अपने साथ कर लें। प्रिया बोली मतलब? मैंने कहा उसको भी मज़ा दे देते हैं और अपने गेम मैं शामिल कर लेते हैं। प्रिया बोली बहुत बदतमीज़ हो तुम, अब लगता है कि उसे भी तुम खराब करना चाहते हो। मैंने कहा थोड़ी स्लिम है लेकिन फिगर अच्छा है 32-27-34 है बस बूब्स ही तो छोटे हैं उनको हम बड़ा कर देंगे। वो पूरा का पूरा लंड अंदर ले जायेगी। प्रिया बोली तुम लड़के ऐसे ही होते हो नयी लड़की देखी बस लार टपकाना शुरू, बहुत बदतमीज़ हो तुम। मैंने कहा जो भी हो आकांशा को बहला फुसला कर तुम ही मना सकती हो। वो बोली मुझे नहीं मालूम, मैं ऐसा नहीं कर सकती।

मैंने बोला ठीक है तो मैं ही उसको बता दूँगा कि हम लोग रूम मैं क्या कर रहे थे और वो रिकॉर्डिंग भी उसको दिखा दूँगा जो मैंने तुम्हारे साथ कानपुर मैं बनाई थी प्रिया गुस्से मैं आँखे निकालती हुई बोली कि तुम वास्तव मैं बहुत बदतमीज़ हो उस भोली लड़की को भी नहीं छोड़ना चाहते, चलो ठीक है मैं कोशिश करती हूँ। लेकिन जरुरी नहीं है कि वो मान जाये। मैंने बोला तुम उसकी बेस्ट फ्रेंड हो और बेस्ट फ्रेंड के समझाने से वो सब समझ जायेगी और मान जायेगी।

फिर उस रात जब दोनों ही एक साथ एक ही रूम मैं सोई तो क्या क्या हुआ इसके बारे मैं मुझे प्रिया ने बताया तो मुझे मालूम हुआ कि प्रिया वास्तव मैं बहुत होशियार है मुझे प्रिया ने रात के बारे में जो बताया वो उसकी ज़ुबानी ही लिखता हूँ – मैंने आकांशा को बात करते करते उसके बूब्स पर हाथ रख दिया और आश्चर्य से बोली यार तेरे बूब्स तो बहुत छोटे हैं वो बोली हाँ दीदी मुझे भी लगता है छोटे हैं। मैंने आकांशा से पूछा तेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है क्या? तो वो बोली नहीं दीदी मगर उससे क्या होगा? फिर मैं बोली कि लड़कों को इन्हें ठीक तरह से बड़ा करना आता है लेकिन मैं भी तेरी हेल्प कर सकती हूँ और इनको बड़ा कर सकती हूँ लेकिन थोड़ा टाईम लगेगा। तो वो बोली कैसे? मैं बोली कि उतार अपने कपड़े वो बहुत भोली है मेरे कहते ही उसने अपने कपड़े उतार लिए और मैं उसके बूब्स को थोड़ी देर ऐसे ही मालिश करती रही और फिर उसके दोनों बूब्स को चूस कर उसको मज़ा देती रही और मैंने उससे पूछा कि कुछ अंतर लग रहा है क्या? तो वो बोली हाँ दीदी कुछ कुछ अब मैंने भी अपना टॉप और ब्रा उतार दी और उससे बोली – अब तू मेरे कर ना। वो बोली आपके तो पहले से ही बड़े हैं आप क्यों करवा रही हैं। मैंने कहा यार बड़ा मज़ा आता है तुमको नहीं आया क्या? वो बोली हाँ दीदी आया।

मैं बोली और मज़ा लेगी वो बोली कैसे? तो मैं उसके ऊपर चड गयी और दोबारा से उसके बूब्स चूसने लगी थोड़ी देर बाद मैंने दोनों हाथ से उसकी स्कर्ट उतार दी और उसकी पेंटी को भी उतारने लगी तो वो बोली : दीदी ये आप क्या कर रही हो.. तो मैं बोली देखती जा आज दोनों मज़ा लेंगे और मैंने उसकी चूत को जीभ और उंगली से काफ़ी मज़ा दिया.. वो उछल उछल कर मुँह से सिसकारियां भर रही थी। मैंने उससे पूछा कैसा लगा तो वो बोली बहुत मज़ा आया दीदी इसके बाद हम दोनों सो गये। ये किस्सा मुझे खुद प्रिया ने बताया.. उसने कहा कि मैं उसको कुछ दिन मैं तैयार कर लूँगी बस 2-4 दिन रुक जाओ.. तो मैं बोला जान कुछ दिन मैं तुम चली जाओगी और वो तुम्हारा साथ छोड़ती नहीं है। प्रिया बोली ज़्यादा उतावलापन मत दिखाओ.. मुझे पता है तुमको मुझसे ज़्यादा उसकी चूत का इंतजार है.. तो मैंने बोला नेकी और पूछ पूछ वो बोली ठीक है मैं आज ही कोशिश करती हूँ।

फिर थोड़ी देर बाद वो नहाने के लिए कपड़े निकाल कर लाई तो मुझसे बोली हम दोनों छत वाले बाथरूम मैं नहाने जा रहे हैं मैं नहाते नहाते उसको गर्म कर दूँगी बाथरूम खुला रहेगा तुम थोड़ी देर बाद आ जाना और ऐसा लगना चाहिये जैसे तुमको कुछ पता ना हो और फिर आगे का काम तुम्हारा है मैंने बोला ठीक है जान और वो थोड़ी देर बाद आकांशा को लेकर छत वाले बाथरूम मैं नहाने चली गयी.. 10 मिनिट बाद मैं भी छत वाले रूम मैं गया और धीरे से दरवाजा खोला तो देखा कि आकांशा और प्रिया दोनों ही 69 पोज़िशन मैं बाथरूम मैं लेटी हैं और एक दूसरे की चूत को मुँह से मज़ा दे रही हैं मुझे देखकर दोनों ही खड़ी हो गयी और सिर नीचे झुका लिया  दोनों पानी से भीगी हुई थी और उनके बालों से पानी बूँद बूँद करके टपक रहा था। प्रिया तो सिर्फ़ एक्टिंग कर रही थी जैसे कुछ जानती नहीं हो लेकिन बेचारी आकांशा तो शर्म के मारे ज़मीन में घुसी जा रही थी.. उसके चेहरे की रोनक उड़ी हुई थी बेचारी को नहीं पता था कि आज उसकी बेस्ट फ्रेंड ही उसको धोखा दे रही है।

मैंने कहा अच्छा तो तुम लोग ये सब करती हो, बहुत बिगड़ गयी हो तुम दोनों। मैं अभी तुम दोनों के घर फोन करके बताता हूँ कि तुम लोग आजकल क्या क्या कर रही हो। प्रिया एक्टिंग करते हुए मेरे पास आई और बोली : जीजू हमें माफ़ कर दो आगे से नहीं होगा.. उसको देखते हुए आकांशा भी मेरे पास आ गयी और रोने जैसी सूरत लेते हुए बोली : प्लीज आप हमें माफ़ कर दीजिए हम लोगों से ग़लती हो गयी है आगे से हम लोग ऐसा नहीं करेंगी।

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वो दोनों 3-4 बार प्लीज प्लीज बोलती रही लेकिन मैं नहीं माना और फिर बोला ठीक है मेरी एक शर्त है तुम दोनों को मेरे साथ ऐसे ही नहाना होगा.. प्रिया झट से बोल पड़ी ठीक है जीजू हम तैयार हैं। वो तो चाहती ही यही थी कि आकांशा कुछ बोले उससे पहले ही हाँ कर दूँ। मैंने बाथरूम की कुण्डी लगाई और अपने कपड़े उतारते हुए बोला ठीक है प्रिया तुम मेरे उपर पानी डालना और आकांशा मेरे ऊपर साबुन लगायेगी। प्रिया तो खुश थी लेकिन आकांशा काफ़ी डरी हुई थी। मैं अब सिर्फ़ अंडरवेयर मैं था और बाथरूम मैं बैठ गया प्रिया पानी डालने लगी और आकांशा ने साबुन हाथ मैं ले लिया जब प्रिया ने पानी डालना बंद किया तो मैं बोला आकांशा साबुन लगाओ आकांशा मेरी पीठ की तरफ खड़ी होकर पीछे की तरफ साबुन लगाने लगी और पीछे से ही हाथ आगे बढा कर आगे भी साबुन लगाने लगी।

मैंने कहा आकांशा आगे आ जाओ और आगे से साबुन लगाओ वो काफ़ी दूर से खड़े खड़े ही आगे से साबुन लगाने लगी मैंने कहा तुम साबुन भी ठीक से नहीं लगा सकती हो क्या? आकांशा चलो एक काम करो मेरी जांघों पर बैठ कर आराम से साबुन लगाओ। इतने मैं प्रिया बोली आकाँशा जीजू की जांघों पर बैठ जा ना और ठीक तरह से साबुन लगा.. क्यों जीजू को नाराज़ कर रही है.. जीजू जैसे तैसे तो माने है। आकांशा बोली जी लगाती हूँ और मेरी जांघों पर अपनी चूत के दर्शन कराते हुए बैठ गयी.. उसकी चूत का कलर अभी उसके कलर जैसा गोरा ही था और उसकी चूत पर अभी एक भी बाल नहीं उगा था। वो मेरी जांघों पर बैठ गयी और मेरी छाती पर साबुन लगाने लगी जब वो मेरी जांघों पर बैठी तो मुझे ज़्यादा वजन नहीं लगा.. वो बहुत हल्की थी मुश्किल से 45 किलोग्राम वजन होगा। वो काफ़ी पतली थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब उसकी छोटी छोटी गोलियां बिल्कुल मेरे सामने थी और साबुन लगाते समय ऊपर नीचे हो रही थी। मैंने ऐसे ही झूठे से गुस्सा करते हुए आकांशा के हाथ से साबुन लेते हुए बोला :  तुम्हे साबुन लगाना भी सिखाना पड़ेगा और प्रिया को बोला तुम आकांशा के ऊपर थोड़ा पानी डालो.. मैं इसको साबुन लगाना सिखाता हूँ प्रिया तुरंत बोली : ठीक है जीजू डालती हूँ और बिना देरी किए उसके उपर 5-6 मग पानी डाल दिया। मैंने जल्दी से पहले उसके गले पर और फिर सीधे उसके बूब्स पर साबुन लगाने लगा। उसके बाद मैंने उसकी पीठ पर अपना हाथ लगाकर थोड़ा सा अपनी ओर खींचकर उसके सीने को अपने सीने से चिपका लिया जैसे कोई माँ अपने छोटे बच्चे को सीने से लगाकर नहला रही हो और पीठ पर भी साबुन लगाने लगा।

पीठ पर साबुन लगाते लगाते मैं अपने सीने से उसके सीने को रगड़ता ही रहा। अब मैंने साबुन को नीचे रख दिया और फिर उसके छोटे छोटे बोबों को हथेली से ही मलने लगा तो वो सिसकियाँ भरने लगी। मैं काफ़ी देर तक उनको बड़ी बेरूख़ी से मसलता रहा और वो आआअहह की आवाज़ें करती रही। मैं अपना एक हाथ उसके चूतड़ पर और एक हाथ से उसकी चूत पर साबुन के झाग को लगाने लगा। मैंने उसकी चूत को भी हाथ से काफ़ी रगड़ा वो काफी गीली हो चुकी थी। आकांशा को डर भी लग रहा था लेकिन मज़ा भी आ रहा था तभी तो उसकी चूत गीली हो गई थी। मैंने उसके हाथ मैं साबुन देते हुए कहा लो अब सीख गयी हो तो मेरे ऊपर लगाओ और उसने अपने हाथ में साबुन ले लिया और फिर से मेरे सीने पर साबुन लगाने लगी। मैंने कहा नीचे कौन लगायेगा? इस पर आकांशा बोली जी लगाती हूँ और मैंने पैर लंबे कर दिए और अपना अंडरवियर नीचे सरका दिया और लंड दिखाते हुए बोला इस पर भी लगाओ।

अब मेरा लंड ठीक उसकी नज़रों के सामने था उसने हाथ नीचे की तरफ़ लाना शुरू किया और मेरे लंड को एक हाथ से पकड़ लिया और एक हाथ से साबुन लगाने लगी उसके हाथ लंड पर साबुन लगाने मैं काँप रहे थे मैंने उससे कहा अब साबुन बहुत हो चुका अब इस साबुन को मलो तो सही उसने साबुन रख दिया और मेरे शरीर को अपने हाथो से छाती पर मलने लगी मैंने कहा नीचे भी मलो तो वो अपने दोनों हाथो से मेरे लंड की भी मालिश करने लगी मेरा लंड बिल्कुल कड़क हो रहा था ऐंठ सा गया था मेरा लंड मैंने प्रिया से कहा की पानी डालो और प्रिया ने मेरे उपर पानी डालना शुरू कर दिया मैंने कहा आकांशा के उपर भी डालो प्रिया ने आकांशा के उपर पानी डालना शुरू किया तो मैं उसके अंगों के उपर लगे साबुन को साफ करने लगा।

मैंने उसको अपने से फिर से सटा लिया और उसकी पीठ से साबुन धोने लगा इस दौरान मेरा लंड उसकी चूत को टच कर रहा था और मैं जानबूझ कर लंड को उसकी चूत पर रगड़ने की कोशिश कर रहा था। मैंने अपना मुँह नीचे की तरफ किया और बोला एक बात बताओ आकांशा तुम्हारे बूब्स तो छोटे हैं क्या इनको बड़ा नहीं करना है तभी प्रिया बोल पड़ी जीजू मैं इसकी हेल्प करती हूँ रात को इसके बूब्स बड़े करने में। मैंने आकांशा से मुस्कुराते हुए पूछा क्यों आकाँशा ऐसा ही है क्या? वो भी पहली बार शरमाते हुए मुस्कुरा कर बोली जी जीजू। मैंने आकांशा से बोला हाँ ऐसे मुस्कुरा कर बात करो ना कितनी अच्छी लगती हो। अच्छा प्रिया बताओ तुम इसके बूब्स बड़े करने में कैसे हेल्प करती हो तो प्रिया हमारे पास आकर साइड मैं बैठ गयी और उसका एक बूब्स अपने मुँह में लेकर जैसे ही चूसना शुरू किया तो मैंने भी अपना मुँह उसके दूसरे वाले बूब्स पर लगा दिया और चूसने लगा आकांशा को मज़ा आने लगा और वो आँखें बंद करके मुँह से सिसकियाँ भरने लगी। मैंने प्रिया को इशारा किया और आकांशा को वहीँ ज़मीन पर लेटा दिया अब एक तरफ से मैं और दूसरी तरफ प्रिया आकांशा की बगल मैं बैठकर उसके बूब्स को चूसने लगे। प्रिया ने मुझे उसके नीचे की तरफ जाने का इशारा किया तो मैं नीचे चला गया और उसकी बिना बालों वाली चूत को देखकर पागल सा हो गया। उसकी चूत से चिकना चिकना सा रस निकल रहा था। जैसे ही मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रखा तो वो ऊपर उठने की कोशिश करने लगी लेकिन प्रिया ने उसको उठने नहीं दिया और उसके बूब्स को चूसती रही। अब उसको डबल मज़ा मिल रहा था। ऊपर से प्रिया और नीचे से मैं.. वो अपने चूतड़ ऊपर उठाने लगी।

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प्रिया ने उससे पूछा कैसा लग रहा है आकांशा तो वो बोली दीदी बहुत अच्छा लग रहा है अब सहन नहीं हो रहा है दीदी। तभी प्रिया ने अपने एक हाथ से मेरे सर को उसकी चूत से हटाया और मुझे जल्दी से आकांशा के ऊपर आने का इशारा किया और मैं आकांशा के उपर आ गया और उसके मुँह को अपने मुँह में भर लिया और उसको चूसने लगा। अब वो भी मेरा साथ देने लगी और मुझे चूमने लगी। मैंने देर ना करते हुए अपना लंड उसकी चूत पर रखा तो वो बोलने लगी नहीं ये बहुत लंबा है अंदर नहीं जायेगा इससे मेरी चूत फट जायेगी। मैंने उससे कहा कि कुछ नहीं होगा थोड़ा सा दर्द होगा और उसकी चूत पर एक ज़ोर का झटका दिया लेकिन लंड फिसल गया और अब वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी तो मैंने प्रिया को इशारा किया और प्रिया ने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और उससे बोली आकांशा थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद में खूब मज़ा आयेगा तू एक बार इसका मज़ा लेकर देख तो सही।

वो बोली दीदी आप इनसे कहो कि आराम से करें अभी बहुत ज़ोर से झटका मारा था। प्रिया मुझसे आँख मारते हुए बोली अनुज जीजू धीरे से करो अभी इसकी चूत छोटी है बेचारी के लग जायेगी मैंने कहा ठीक है और प्रिया से आँख मारते हुए कहा आओ तुम थोड़ी मदद करो और प्रिया उसके हाथो को छोड़कर मेरे पास आकर बैठ गयी और अपने हाथ मैं मेरा लंड पकड़ लिया और आकांशा की चूत के मुँह पर रख दिया और बोली करो जीजू मैंने सोच लिया कि इस बार लंड फिसलना नहीं चाहिये वरना काम बिगड़ जायेगा ओर मैंने आकांशा के दोनों हाथो को पकड़ लिया। फिर से ज़ोर का झटका दिया। उसकी चूत काफ़ी गीली थी ओर झटका भी मैंने काफ़ी ज़ोर का लगाया था इसलिये पूरा लंड उसकी चूत मैं घुस गया। आकांशा बहुत ज़ोर से चिल्लाई और छूटने की कोशिश करने लगी  लेकिन मैंने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया और उसकी आवाज़ बाथरूम मैं ही रह गयी। आकांशा रो रही थी उसके पैरों में कंपन हो रहा था और वो बोल रही थी इसको बाहर निकालो मुझे दर्द हो रहा है लेकिन मैंने उसको जकड़ लिया था और उसको 3-4 मिनिट तक हिलने भी नहीं दिया और हिलती भी कैसे मैं 75 किलोग्राम वजन का 6 फीट लंबा उसके उपर था और वो 5.3” और 40-45 किलोग्राम वजन की बहुत ही नाज़ुक लड़की थी वो छूटने की नाकाम कोशिश करती रही लेकिन उसका मुझ पर कोई असर नहीं पड़ा तभी प्रिया बोली आकांशा बस 5 मिनिट रुक जा तेरा दर्द ख़त्म हो जायेगा लेकिन वो बोली दीदी मुझे बहुत दर्द हो रहा है आप इनसे कहो इसको निकालें।

अब मैंने आकांशा का ध्यान दर्द से हटाने के लिए उसके मुँह पर अपना मुँह रख दिया और एक हाथ से उसके बूब्स को मसलने लगा और धीरे धीरे लंड को चलाता रहा ऐसा मैंने 10 मिनिट तक किया और 10 मिनिट में वो नॉर्मल हो गयी तो मैंने उससे पूछा क्या अब भी दर्द हो रहा है तो वो बोली जी अब तो दर्द नहीं हो रहा है। मैंने प्रिया को डाँटते हुए कहा तुम बहुत गंदी हो अपनी बेस्ट फ्रेंड की बिल्कुल हेल्प नहीं करती.. उसके बूब्स बड़े नहीं करने क्या? आकांशा बोली आप ठीक कह रहे हैं ये मेरी बिल्कुल हेल्प नहीं करती अपने तो काफ़ी बड़े बड़े हैं ना इसलिये। प्रिया उसके पास आकर बैठ गयी और उसके बूब्स को चूसने लगी और मैं अपनी स्पीड बढाता गया।

थोड़ी देर बाद दोनों को मज़ा आ गया और जब हम लोग अलग हुए तो देखा बाथरूम मैं काफ़ी खून हो गया था। इसके बाद हम सब एक साथ मिलकर नहाये। नहाते हुये मैंने आकांशा और प्रिया दोनों से ही अपने लंड को बारी बारी से मुँह मैं डालने को कहा और थोड़ी देर बाद में बाथरूम में लेट गया और आकांशा को अपने उपर बैठाकर प्रिया की हेल्प से चोदा फिर शाम को मैंने आकांशा के सामने प्रिया को घोड़ी बनाकर चोदा 3-4 दिन बाद जब मेरी बीवी ठीक हो गयी और बिस्तर से उठकर थोड़ा बहुत काम करना शुरू किया तो आकांशा और प्रिया में से कोई एक उसके साथ रहकर उसको व्यस्त रखती और कोई एक मेरे साथ मज़े करती। ये चुदाई का सिलसिला तब तक जारी रहा जब तक दोनों को हम लोग कानपुर छोड़ कर आये ।।

धन्यवाद …

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