ट्रेन में बच्चों की माँ की चुदाई

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प्रेषक : रेहान …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रेहान है, में कामुकता डॉट कॉम की हर एक कहानी पढ़ता हूँ और मज़ा लेता हूँ। आज मैंने सोचा कि में भी अपनी एक रियल कहानी आप लोगों से शेयर करूँ, अब में आपका समय ज्यादा ख़राब नहीं करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ। में कोलकाता से हूँ और में वहाँ एक हॉस्पिटल में मैनेजर का काम करता हूँ, मेरे घर में सिर्फ़ हम 3 ही लोग है मम्मी, पापा और में। मम्मी पापा पटना में रहते है और में अकेला कोलकाता में पढ़ाई पूरी करने के बाद यहाँ ही जॉब करता हूँ।

अब काफ़ी दिन हो गये थे में मम्मी पापा से नहीं मिला था और मेरा उनसे मिलने का बहुत मन कर रहा था, तो मैंने सोचा कि अभी दिसम्बर का महीना है अगर छुट्टी मिल जाए अभी ठंडे मौसम में मम्मी पापा से मिलकर आ जाऊं। तो मैंने अपने बॉस से छुट्टी माँगी तो मुझे छुट्टी मिल गई और में खुश हो कर घर पर मम्मी के पास कॉल करके बोला कि में आ रहा हूँ, मुझे 10 दिन में लौटना था। मेरी सीट ए.सी IIIrd में थी, अब में ठीक टाईम से स्टेशन पहुँच गया था और ट्रेन का आने का इंतज़ार करने लगा। फिर थोड़ी देर बाद ट्रेन आ कर अपनी लाईन पर लग गई, वहाँ लोगों की ट्रेन में चढ़ने के लिए काफी भीड़ थी, अब में बिंदास अपनी सीट की तरफ चला जा रहा था।

तभी मैंने देखा कि एक महिला (जो पीले कलर की सलवार और कमीज पहने थी, रंग बिल्कुल साफ दूध के जैसा) और उसके साथ दो बच्चे जो एक उस महिला की गोद में था और एक बच्चे को उसने अपने हाथ से पकड़े हुए भागते हुए चली जा रही थी। उसके हाथ में एक सामान का सूटकेस भी था, जो शायद भारी था और वो औरत उसे भी संभालकर परेशान हो रही थी, शायद वो सूटकेस भारी था और उसने उसी हाथ से अपने लड़के को भी पकड़ रखा था और शायद इस वजह से वो औरत काफ़ी परेशान दिख रही थी। फिर मैंने उस भीड़ में ध्यान से देखा तो उस महिला की कमर काफ़ी बड़ी थी और जब वो ट्रेन की सीट और चढ़ने के लिए भागी जा रही थी, तो उसकी गांड पूरी तरह से ऊपर नीचे हो रही थी जैसे पूरा एक गांड का हिस्सा नीचे आता, तो एक गांड का हिस्सा ऊपर की और चला जाता। फिर मैंने जब ये देखा तो मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो गया और मैंने उसकी परेशानी को भी देखा तो मुझे अजीब लग रहा था। तभी में उसकी और गया और उसके सूटकेस को अपने हाथ से पकड़ते हुए बोला कि इसे आप मुझे दे दीजिए, में इसे संभालता हूँ और तभी मैंने ध्यान दिया कि उसकी चूचीयां भी काफ़ी बड़ी थी जिसे बूब्स भी बोलते है। फिर उसने मेरी और देखा और कहा कि ठीक है, फिर मैंने उससे उसका सीट का नंबर पूछा, तो उसने बताया और किस्मत से उसकी सीट के बगल में ही मेरी सीट भी थी।

अब गेट के पास भीड़ काफ़ी ज़्यादा थी और में अंदर जाने के लिए उसके पीछे खड़ा था। अब मेरी नजर जब-जब उसकी गांड की तरफ जा रही थी, तब-तब मेरा लंड खड़ा होता जा रहा था। इसी बीच जब काफ़ी लोग अंदर चले गये और गेट के पास थोड़ा खाली हुआ, तो वो औरत और उसके बच्चे अंदर जाने लगे। फिर मैंने भी जैसे ही अपना पैर आगे बढ़ाया तो मेरा खड़ा लंड उसकी गांड की दरार में जो ऊपर और नीचे हो रहा था, उसके ठीक बीच में चला गया। फिर मैंने अपना पैर जैसे ही आगे बढ़ाया, तो मेरा लंड उसकी गांड के अंदर दब गया और शायद उसे दर्द हुआ इसलिए वो जल्दी से आगे की और बढ़ गई और उसके मुँह से ज़ोर से हह्ह्ह की आवाज़ निकल पड़ी। तभी उसने पलटकर मेरी और देखा और फिर उसने नीचे मेरे लंड की तरफ देखा और फिर गुस्से से मुझे देखकर आगे जा कर अपनी सीट पर बैठ गई। फिर जब मैंने नीचे अपने लंड की तरफ देखा तो में देखता ही रह गया, अब मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो गया था और कॉटन की पैंट की वजह से पूरा साफ़-साफ़ दिख रहा था।

फिर मैंने उस औरत को उनका सामान दे दिया और सॉरी बोला, तो वो मेरी तरफ बिना देखे ही थैंक्स बोली शायद वो मुझसे बहुत नाराज़ थी इसलिए और अपना सामान लेकर सीट के अंदर रखने लगी। अब मेरी सीट बिल्कुल उसके करीब अगली वाली लोवर बर्थ थी, इस वजह से मेरे और उस औरत के बीच में ज़्यादा दूरी नहीं थी। अब में उस औरत की और देखे जा रहा था और उसके बूब्स को देखकर मेरा लंड बिल्कुल शांत नहीं हो रहा था। अब में चाहकर भी अपनी नज़र उससे हटा नहीं पा रहा था और इस वजह से वो शायद मेरी और नहीं देख रही थी। अब मेरे मन में सिर्फ़ एक ही बात चल रही थी कि में बाथरूम जा कर उसकी गांड जो ऊपर नीचे हो रही थी और बूब्स का अनुभव करके मूठ मार लूँ। लेकिन अब मेरा दिमाग़ कुछ और बोल रहा था, अब में ये सोचने लगा और उसकी और देखे जा रहा था। तभी मैंने देखा कि उसकी हल्की सी तिरछी नज़र मेरी पैंट पर लंड की और पड़ी और उसने जल्दी से अपनी नजर हटा ली।

अब में कुछ समझा नहीं कि उसने ठीक से मेरी और क्यों नहीं देखा? और ये सोचकर में उससे बात करने की कोशिश करने लगा। फिर मैंने सोचा कि वो औरत अभी मुझसे नाराज़ है, फिर में उसके एक बच्चे से जो उस औरत के साथ था उससे उसका नाम पूछने लगा और फिर उससे बातें करने लगा। तब मेरा ध्यान उस औरत की तरफ से थोड़ा हटा और मेरा लंड ठीक हो गया। फिर मैंने उस लड़के से उसके पापा का नाम पूछा, तो वो अपने पापा का नाम बता नहीं पा रहा था, तब उस औरत ने उसके पापा यानी अपने पति का नाम बताया। उसके पति का नाम सौरव था और फिर में चुप नहीं हुआ और मैंने उस औरत से बातें करना चालू कर दिया, इसी टाईम का तो मुझे इंतज़ार था। अब वो औरत सब बाते भूलकर जो ट्रेन के गेट पर हुआ था, सब भूल गई थी और मुझसे बातें करने लगी थी।

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अब उसकी बातों से ये मालूम हुआ कि वो अपने भाई की शादी में अपनी माँ के घर जा रही थी, जो पटना से काफ़ी दूर था। उसका एक बच्चा जो कि उसकी गोद में था, वो 8 महीने का है और जो साथ में हाथ पकड़े हुए था, वो 3 साल का था। अब ये सब बातें करते-करते पता नहीं कब रात हो गई और उसके बच्चे सोने के लिए रोने लगे। तब उस औरत जिसका नाम सोनाली था, उसने अपने बच्चे को खाने का कुछ सामान देकर, वो अपना छोटा बच्चा जो 8 महीने का है उसे अपना दूध पिलाने लगी। अब उसने दूध पिलाते वक़्त अपनी पीठ मेरी तरफ घुमा ली थी। खैर फिर ठीक थोड़ी देर के बाद उसके बच्चे खा कर सो गये और में भी अपना खाना खा कर कंप्लीट हो गया और अपनी सीट पर लेटकर उस औरत की तरफ देखने लगा। उस औरत की एक लोवर बर्थ थी तो उसने अपने दोनों बच्चों को उस बर्थ पर सुला दिया। अब उसके सोने की जगह नहीं हो रही थी और ना उसके पास कोई और चादर था कि वो नीचे सो पाए, अब में ये सब देख रहा था, ठंड तो काफ़ी थी।

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फिर मैंने बिना कुछ सोचे समझे उससे कहा कि यहाँ आ जाओं और मेरी सीट पर आ कर सो जाओ, मेरी चादर बड़ी है इसमें हम दोनों का हो जाएगा। तो उस औरत ने मेरी तरफ इस तरह से देखा, तो में डर गया और फिर मैंने दुबारा उससे नर्मी से कहा कि देखो ठंड बहुत है और सोने की भी जगह नहीं है, आपको ठंड लग जाएगी। तो फिर वो थोड़ी देर तक कुछ सोचने के बाद मेरी सीट पर सोने के लिए आ गई। अब में पीछे की तरफ चला गया और मैंने अपनी चादर को थोड़ा आगे की और कर दिया, जिससे वो आराम से चादर को ओढ़ सके, फिर वो ओढ़ कर सो गई। फिर करीब ठीक 11 बजे मैंने करवट ली और करवट लेते ही मैंने महसूस किया कि उसकी गांड में मेरा लंड कपड़े के ऊपर से ही दब रहा था। फिर मैंने उस पल का फायदा उठाया और उसे उसी तरह से रहने दिया, फिर थोड़ी ही देर में मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया, जिसकी साईज़ 8 इंच की थी।

फिर में अपने लंड को थोड़ा अंदर की और करने लगा, अब मेरा लंड पूरा खड़ा था। फिर जैसे ही मैंने पुश किया, तो उसकी गांड में मेरा लंड दबे जा रहा था और शायद अब तक उसे भी पता चल गया था कि में क्या कर रहा हूँ? लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। फिर मैंने इस बात का फायदा उठाया और अपने लंड को कपड़े के ऊपर से ही अंदर बाहर करने लगा। फिर थोड़ी देर के बाद जब उसने मुझसे ये करते वक़्त भी कुछ नहीं कहा, तो मैंने अपना हाथ उसकी गांड की तरफ किया और उसे मसलने लगा। उसकी गांड काफ़ी टाईट थी, लेकिन मस्त बड़ी थी, अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर भी उसने मुझसे कुछ नहीं कहा, तब में समझ गया कि इसे आज मुझसे चुदने का मन है। फिर मैंने चादर के अंदर ही उसके बूब्स की तरफ अपना हाथ किया और उसे भी मसलने लगा। अब उसके बूब्स मसलते वक़्त उसके मुँह से हल्की-हल्की अहह आह की तरह आवाज़ भी आ रही थी। अब मुझसे सहन नहीं हुआ और में अपना हाथ नीचे उसकी चूत की तरफ लेकर गया और उसकी सलवार को खोलने लगा।

अब सलवार खोलते वक़्त मैंने देखा कि वो भी अपने हाथों से अपने बूब्स को दबा रही है। फिर जब मैंने चादर के अंदर ही उसका सलवार हल्का सा नीचे किया, तो अब उसने भी अपनी गांड को कमर से उठाकर अपनी सलवार को नीचे करने में मेरी मदद की। फिर जब मैंने उसकी सलवार को नीचे कर दिया और उसकी पेंटी को भी खोल दिया, तब मैंने अपने हाथों से महसूस किया कि उसकी गांड मेरी सोच से भी बहुत ज़्यादा हॉट है। फिर मैंने उसी तरह से उसी चादर के अंदर ही अपने हाथों से उसकी गांड को फुक किया और अपना 8 इंच का लंड उसकी चूत में डालने लगा। फिर में जैसे ही अपने लंड को उसकी चूत की तरफ लेकर गया, तो वो उछल पड़ी और उसी तरह से पड़ी रही। फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर रखा और एक जोरदार झटका दिया, जिससे उसकी चीख निकल पड़ी उफफफ्फ़ अहह हम्मम्म ह्ह्ह्ह। फिर मैंने थोड़ी देर तक उसकी चूत में ऐसे ही अपना लंड डाले रखा, जब तक में जोर- ज़ोर से उसके बूब्स को दबाने लगा।

फिर 5 मिनट के बाद में अपने लंड से झटके पर झटके मारने लगा। अब मेरा लंड जब भी अंदर जाता, तो वो अपनी गांड यानी चूत को आगे की और कर लेती, इससे मुझे पता चल गया कि उसका पति का लंड बहुत छोटा होगा। फिर करीब 15 मिनट तक मैंने अपने लंड से उसकी चूत में जोरदार धक्को के साथ चुदाई की। अब में उसके बूब्स को भी मसल रहा था कि उतने में उसके बच्चे की रोने की आवाज़ आई, तो फिर उसने अपनी गांड आगे की तरफ हटाई और अपनी चूत से मेरा लंड निकालने की कोशिश करने लगी। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाल दिया और फिर जैसे ही मैंने अपना लंड बाहर निकाला, तो उसकी चूत से बहुत सारा पानी निकलकर मेरी चादर पर गिर गया। फिर वो उठी और अपना सलवार ठीक करके अपने बच्चे के पास पहुँची और उसे अपना दूध पिलाने लगी। अब जब वो उसे दूध पीला रही थी तो वो बार-बार मेरी तरफ देखे जा रही थी और अब वो मेरे लम्बे लंड को भी देखे जा रही थी।

फिर थोड़ी देर के बाद वो अपने बच्चे को सुलाकर मेरी तरफ आ गई और फिर से लेट गई, लेकिन इस बार उसने चादर नहीं ओढ़ी। फिर में उठा और उसको पूरा नंगा कर दिया और उसके बूब्स को चूसने लगा। फिर मैंने उसका एक पैर ऊपर उठाया और उसकी चूत में अपना लंड डालकर उसे खूब ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। अब वो मस्त हो गई थी और उछल-उछलकर मुझसे चुदवा रही थी और चिल्ला रही थी आह आह अम्म्म उफफफफ्फ़ हह्ह्ह्हह। अब में भी उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदे जा रहा था, फिर करीब 30 मिनट के बाद मैंने अपना पूरा पानी बाहर निकाला। फिर जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला, तो जैसे ही उसकी चूत से ढेर सारा रस निकला जिससे नीचे बिछी चादर पूरी भींग गई, इससे मुझे पता चला कि वो 10 से ज़्यादा बार रस छोड़ चुकी थी। उस रात मैंने उसके साथ 3 बार सेक्स किया और लास्ट बार उसकी गांड भी मारी ।।

धन्यवाद …

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